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writng story -gazals-haiku in gujarati and hindi

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All Postsकविता (6)गज़ल/गीतिका (9)लेख (1)लघु कथा (5)कहानी (9)
सिर्फ हादसा?
हँसती खेलती एक ज़िन्दगी, शाम ढलते ऑफिस से निकलकर, है दिल्ली की सड़क पर ..., ओवरटाइम से... सुनहरे सपने को जोड़ती, घरपर मोबाइल से कहेती,... Read more
ये कैसी बारिश?
लघुकथा ये कैसी बारिश? खिडकी के पास खड़ी होकर मन्वीता रीमझीम गीरती बारिश देख रही थी।पेड़ की लहेराती शाखो पर रंगीन फूल नृत्यमग्न झूल रहे... Read more
काफी नहीं ?
बैठे रहते है जब हम खोये हुए सपनो की खोज मैं, आसमान से टपकते पानी से संवेदना हथेली पर शायद फिर से संजोले पर ..... Read more
लकी
लकी, सुबह के नौ बज़े सृजन चायका कप लिये टीवी देख रहा था की मोबाईल की रिंग.... "सो रहे थे क्या ?" आवाज़ सुनकर सृजन... Read more
मुहिम
मुहिम कैसे हो पारसजी ?कहते हूँए विमलजी बंगलो की सोसायटी में बने गार्डन की बेंच पर बैठकर बातें करने लगे। "आज जल्दी ऑफिस से ...... Read more
क्यों ऐसा?
क्यों ऐसा ? विश्वा जल्दी से अपनी कंपनी की बस से उतरती हुई घर के कम्पाउंड में दाखिल हुई ।बाहर ही उसकी सर्वेंट मिली ,... Read more
ये मेरा दोष है?
ये मेरा दोष है? अपने वार्डरोब से जल्दी से साड़ी निकालकर पहन ली और पर्स के साथ हॉस्पीटल चेकअप की फ़ाइल लिए हुए सुविधा ने... Read more
गज़ल
तुम जो मेरे यहाँ ही अगर हो , जिंदगी की रात की तो,सहर हो। यूँ न मंजिलें तन्हा को मिलती प्यार की जो ना राह... Read more
गज़ल
ऐक शाम हॅसी अजनबी हो गई, सांस मेरी भी अनकही हो गई जो चहेरे थे अभी है कहां, जिन की परछाई प्यारी हो गई। हम... Read more
गज़ल
आपका वो मिलना तो याद है दिलका वो खिलना तो याद है। जिस तरहा बिछड़े थे मोड़ पर और तुम्हें ही गवाँना याद है। देखते... Read more
गज़ल
आज खुदसे प्यार करने दो हमें ओर थोडा ओर कहने दो हमें। जिंदगी के दिन तो बस चार है, दिल में ही यार रहने दो... Read more
स्त्री-शक्ति
स्त्री शक्ती स्त्री और पुरुष इस विश्व की धरोहर मानें जाते हे ।। कही दोनेा में से कोई एक दूसरे से ज्यादा जरूरी या ताकतवर... Read more
मेरा  आत्मसम्मान
मेरा आत्मसम्मान मेरा आत्मसम्मान रात ऐसे मध्यम सी ढल रही थी । अपनी बाल्कनी से नीचे झाँकते हुअे, रितीमा विहार का इंतजार कर रही थी... Read more
मेरा विश्र्वास
मेरा विश्र्वास यूॅंही माेल में घूमते हुए आठ बज चुके थे। मौनवी ने मोबाइल से नरीत को बताया , "मुझे थोड़ी देर लग जायेगी ,मै... Read more
शाम का साया
शाम का साया तेज दौड़ती हुई ट्रेन की खिड़की के पास बैठी हुई तक्षवी, उड़ती हुई लटो को संभालती घड़ी में टाइम देख रही थी... Read more
समजौता
समझौता अभी तो सुबह के ८- ३० हुए थे ।। जल्दी तैयार होकर नित्या एक्स्ट्रा क्लास के लिए अपनी कार लेकर निकल ही रही थी... Read more
स्वरिता
'अरे ,चलो देर हो रही है 'कहते हुँऐ अंगना अपनी छोटी सी बेटी स्वरिता को हाथ खींचकर कार में बिठाने लगी । 'नहीं आना हे... Read more