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शिक्षा - हिंदी स्नातकोत्तर
कृतियां - बरसात की एक शाम
नाट्य विधा - औरत दास्ताँ दर्द की
नाट्य विधा - जिंदगी कैसी है पहेली
अनेक पत्र पत्रिका में कहानियां , लेख , और कविताएं

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All Postsकविता (17)गज़ल/गीतिका (1)
इबादत
मुहब्बत की दुहाई का अर्थ क्या है रिश्तों में आई दरारों को सरेआम करने का नायाब तरीका ...... नही मुहब्बत तो वो एहसास है जिसे... Read more
दहलीज़
अहसासों की दहलीज से निकल कर शब्द जब यूँ बिखरते हैं ......... एक अफसाना मुहब्बत का लिख जाते हैं क्यों तोड़ते हो गुरुर मेरा की... Read more
संवेदना
नित्य संवेदनाओ से घिरी अस्तित्व विहीन अपरिपूर्ण परिलक्षित सी #मैं ........ ■आह प्यार के सारगर्भित रहस्य को छुपा निश्चेतन , निष्प्राण सी शिलाखंड न भावनाओ... Read more
गौरेया
चूं चूं करती जब चिड़िया रानी सुबह सुबह बुलाती है ... उसकी यह मनमोहक अदा मेटे मन को लुभाती है ... फुदक फुदक मेरे चारो... Read more
दर्द
मायूसी को छोड़ मुस्कराना सीख लिया हमने भी अपने दर्द को छुपाना सीख लिया दर्द दिल से उठ कर आँखों में नज़र आता था आंसू... Read more
आह
खुबाब पल भर का दिखा कर इन्तजार सदियों का दे गई आँखे खाई थी कसमे साथ निभाने की बेवफाई कर गई सारी बातें ...... न... Read more
‘’ दुर तक कोई अवाज नहीं ‘’
कोई नही ‘’   उसके जाने के बाद जीने का सबब पा ना सके,जो मुसकराते थे हमबात बात पर उस हंसी को दुबारा अपने घर बुला ना सके , लोगो नेसाथ छोड़ दिया मेरा और बेखुदी का इल्जाम दिया ,कि रोए हालातपे छुप छुप के हम पर कोई इल्जाम उन पर लगा ना सके । ‘’ दुर तक कोई अवाज नहीं ‘’ जानती हुं आज कोई मेरे साथ नही क्यो दुर तक देता कोई अवाज नही ये उसकि याद ने हालत कर दी मेरी वरना इस तरह रहना मेरा अन्दाज नही वक्त ने ढाए सितम कुछ इस तरहा आख खुली तो शाम ढल चुकी थी, हुआ कब सवेरा कुछ याद ही नह। थका दिया जिन्दगी ने,तो सोचा थोड़ा सुस्ता लूँ । की कब उठ जाए जिन्दगी का कारवाँ पता नही कि कब आए थे तेरे जहाँ मे, मुझे याद नहीं| दूर दूर तक फ़ैला अँधेरा , कही रौशनी नहीं हैं, कब बीता दिन और अँधेरा कब हुआ, मुझे याद नहीं| लोग कहते है इश्क ने बर्बाद किया मुझे मै तो अब भी कहती हुं, मुझे कुछ भी याद नहीं,। लोग तो कहेंगे, उनके पास को काज नहीं, मै सही हुं ,इसके सिवा कुछ याद नही। दिन भी कट जायेंगे भरोसा हैं मुझे, जिसके बाद सुबह न हो ऐसी कोई रात नहीं,। मै जानती हुं ,कोई मेरे साथ नही पर सच कहती हुं मै किसी से नाराज़ नहीं| द्वारा मनीषा गुप्ता... Read more
तारीफ़
तारीफ़ एक "शब्द " पर उसमें सिमटा एक रूपसी का श्रृंगार , माँ का ममतामयी रूप , एक मासूम से बच्चे की मासूमियत भरी अदाओं... Read more
जिंदगी........
जिंदगी। हर बार पिघलते देखा तुम को जिसने जैसे चाहा बनाया तुमको हर साँचे में ढलते देखा मैंने ✍✍✍✍✍✍ क्यों कभी तुम को किसी से... Read more
यादें
मनु स्मृतियों सी जब हो जाती हैं "यादें" रंग ए"पलाश " उसमें बहुत गहरा होता है नूर बिखरता है "ज़हनियत " में कतरा-कतरा उसके एहसासों... Read more
शाख़
हक़ हवा को जब तेज़ बहने के हासिल हो जाते हैं ..........!! यादों की तरहा सूखे पत्ते भी एक हवा से झड़ जाते हैं ....!!... Read more
जज़्बात
दरमियाँ तेरे मेरे , कुछ जज़्बात मासूम से ख्यालात , सर्दियों की बारिश की रिमझिम सी बूंदों का एहसास कराते हैं ........!! बिन बोले मेरी... Read more