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मनिंदर सिंह "मनी"
पिता का नाम- बूटा सिंह
पता- दुगरी, लुधियाना, पंजाब.
पेशे से मैं एक दूकानदार हूँ | लेखन मेरी रूचि है |
जब भी मुझे वक्त मिलता है मैं लिखता हूँ |

मशरूफ हूँ मैं अल्फ़ाज़ों की दुनिया में.......
cont no-9780533851

All Postsकविता (10)गज़ल/गीतिका (8)गीत (1)अन्य (6)
तेरी बिटिया
MANINDER singh गीत Jan 10, 2017
ऐ माँ मैं हूँ तेरी बिटिया, नन्ही, प्यारी सी बिटिया, लगा गले मुझे आज अपने, आँचल में तेरे देखूं सपने,, कभी पराया न मुझे करना,... Read more
दीवानी
जुदाई तेरी, मुझे जीने नहीं देती, यादें तेरी, मुझे मरने नहीं देती, ऐ कम्भख्त, तूने किस मोड़ पर ला छोड़ा, मेरी मुस्कराहट, मुझे रोने नहीं... Read more
सियासत
हर गली हर चोराहे में कितने खुल चुके है ठेके, मुझे तो अपने ही घर से मद बू आ रही है, स्कूल जर्जर हालत में,... Read more
बदला सावन
देख दूर से बारिश की बूंदे. सोचा, जवानी के सावन का अहसास लिख दू, पर सोच जिया नहीं जिस पल को, उसे लफ़्ज़ों में पिरो... Read more
पर्दा ना कर
पर्दा ना कर, ऐ दिलबर, तेरे हुसन का दीवाना हु, जाने कितनी सदियों से, तू शमा, मैँ जलता परवाना हु, बिना पीए, मदहोश मैँ, तेरे... Read more
लफ्ज़ो की किताब
निकल पड़ा, लिए लफ्ज़ो की किताब, जिंदगी के हर दौर का था हिसाब, कुछ पन्नो पर मुस्कुराता शैशव काल, कुछ पन्नो पर जवानी के संघर्ष... Read more
इत्तफाक
दुआओ का मोहताज़ हु, अल्फाज़ो के सुलगते शहर में, मुस्कराहट के दम पर, जिन्दा हु नफरतो के शहर में, मुद्दते हो गयी, जाम से जाम,... Read more
हाल ऐ जिंदगी
मेरी आँखों में अश्को का तूफान सा उमड़ता है, जब कोई हाल ऐ जिंदगी पूछता शख्स मिलता है,, हर दर्द को ढक लिया मैंने मुस्कुराहट... Read more
बीवी
पढ़ अख़बार मैंने, बड़ी रोचक जानकारी जुटाई, रह न जाये आप इससे अनजान, जल्दी से रचना बनायीं, अनुसंधाओ से पता चला है की, बीवी से... Read more
ऐ जिंदगी
ऐ जिंदगी बता तू क्यों मुझसे इस कदर खफा खफा सी है, क्या हुआ है ऐसा मुझसे जो लगती मुझको तू बेवफा सी है,, मिले... Read more
तकदीर
बहकते है मेरे पाँव बहकने दे यार, गिरता हु आज, मुझे गिरने दे यार,, पी मैंने महकशी बेइंतिहा बेहिसाब, सरेआम हसरतो को बिखरने दे यार... Read more
ऐ चाँद
ऐ चाँद जब भी देखा तुझे, अकेला ही मिला तू मुझे,, हर तारे का, कोई ना कोई साथी, तू हर पल साथ, तलाशता मिला मुझे,... Read more
मैं आज़ाद नहीं
मैं आज़ाद नहीं, अपनी सोच का गुलाम हु, अन्धविश्वाश, रीतिरिवाज़ों में, डूबा हुआ बिखरता जाम हु, बिन मांगे दुसरो को, देता सलाहों का पैगाम हु,... Read more
लापता
अभी कुछ दिन पहले हुआ था उद्घाटन, तारीफ कर रहे थे नेता अपनी दनादन, आज जाने कैसे सब कुछ लापता हो गया, कुछ दिनों में... Read more