Skip to content
बेटियाँ
चोटियों को मापती हैं बेटियाँ अब गगन बन बोलती हैं बेटियाँ।1 हो रहे रोशन अभी घर देख तो रूढ़ियों को तोड़तीं है बेटियाँ।2 अब नहीं... Read more
दिन बदलते......
दिन बदलते देर लगती कब बता? भेड़ बनकर घूमता है भेड़िया।1 लूटकर सब ले गया हर बार ही माँगता है जो बचा फिर से मुआ।2... Read more
अपरिचित
पल- पल से मैं आज अपरिचित जानी-सी आवाज अपरिचित।1 उड़ता जाता दूर गगन में फिर भी है परवाज अपरिचित।2 मंजिल के कुछ पास पहुँच कर... Read more
चोर(लघु कथा)
चोर(लघु कथा) ************ गाँव में चोरों का प्रकोप बढ़ रहा था। लोग परेशान थे।आये दिन किसी-न-किसी घर में चोरी हो जा रही थी। ग्राम प्रधान... Read more
चलो रोशनी.....
गीतिका/हिंदी गजल#(दीप-पर्व पर) (वाचिक भुजंगप्रयात छंद) *** *********************** चलो रोशनी को जगाने चलें हम अँधेरे यहाँ से हटाने चलें हम।1 रहे माँगते इक किरण का... Read more
हिंदी गजल/गीतिका
#गीतिका# *** टूटता रहता घरौंदा फिर बनाना चाहिये जोड़कर कड़ियाँ जरा-सा गुनगुनाना चाहिये।1 जिंदगी से दर्द का बंधन बड़ा मशहूर है जब समय थोड़ा मिले... Read more
गजल(सरहद)
#गजल# *** होंगे उनके ढ़ेरों मकसद भूल गये हैं वे अपनी जद।1 पढ़ते स्वार्थ- पुराण बहुत ही उनके अपने-अपने हैं पद।2 धरती को गाली बकते... Read more
गीतिका
अभी तो बस जरा हमने कला अपनी दिखायी है समझ में लग रहा उसको भली सब बात आयी है।1 अमन की कोशिशों को अब तलक... Read more
गजल
#गजल# *** नहीं चाहता जो कराती, बता दे, अलग राह तू क्यूँ चलाती बता दे?1 बहुत दूर पीछे रखा था नशा को, मगर बास घर... Read more