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मैं भूरचन्द जयपाल 13.7.2017 स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिंदी रचनाएं 9928752150 मेलl आई डी jaipalbhurchand73@gmail.com

Hometown: मुक्ता प्रसाद नगर , बीकानेर ( राजस्थान )
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All Postsकविता (175)गज़ल/गीतिका (25)मुक्तक (137)गीत (55)लेख (4)शेर (26)लघु कथा (1)हाइकु (2)कव्वाली (1)
*** जैसे माथे औरत बिंदी ***
13.12.17 प्रातः 10.21 महनीय भाषा हिंदी जैसे माथे औरत बिंदी शोभनीय राष्ट्रभाषा जैसे माथे औरत बिंदी भाल-ललाम करता है शोभित कहते हिंदी शुभदिन आया जैसे... Read more
*****  शेर  ******
गफ़लत और गलतफहमियां अक्सर धोखा देती हैं मगरूर गरूर से जिसे ना दूर किया जा सकता है ।। ?मधुप बैरागी गलतफहमियां बाज़ार में बहुत सस्ते... Read more
*****  शेर  *****
जुबां से कह दे एक बार है तुझको भी मुझसे प्यार फिर जवानी जवानी बदस्तूर कहानी कहाती है । तुमने की मुझ पर बड़ी मेहरबानी... Read more
*** दुश्मन-दोस्त ***
चन्द अल्फ़ाज ही तो है जो दोस्त-दुश्मन बनाते हैं जो जुबां-मिश्री-घुली हो तो दुश्मन-दोस्त बनाते हैं बनाते हो त्योंहारी-मीठा क्या देखो ग़जब ढाते हो अहाते-ख़ंजर... Read more