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पता-महेशपुरा (कोटखावदा) जयपुर
अध्यापक
समसामयिक लेखक
शिक्षा - NTT, BA ,BE.d MA (हिन्दी )
बडा बनने से ज्यादा मुझे
सामाजिकता की जरूरत है

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All Postsकविता (5)लेख (1)
विदाई
दो और तीन मिलाकर थे तुम कुल उतने ! मेरे शिक्षक जीवन के प्रथम शिष्य थे तुम उतने ! इतिहास बना गए यादों का कैसे... Read more
वीरांगना
शशि मुख पर घूंघट डाले आँचल में विरह दु:ख लिए जीवन के गोधूलि में कौतूहल से तुम आयी . नवयौवन में अर्धांगिनी बनकर तुम आयी... Read more
बेटी
संसार का कोई बंधन जो तुमसे बंधा न हो ऐसा कोई रिश्ता नहीं जिसमें तुम्हारा नाम न हो. ऐसा कोई घर नहीं जिसमे तुम्हारा वास... Read more