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पेशे से पत्रकार और शौक से कवि एवं लेखक ।

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All Postsगज़ल/गीतिका (3)
तेरी बुराइयों को हर अख़बार कहता है
तेरी बुराइयों को हर अख़बार कहता है, और तू है मेरे गांव को गँवार कहता है। ऐ शहर मुझे तेरी सारी औक़ात पता है, तू... Read more
मैं हिन्दुस्तान हूँ सरदार के आज़ाद सपनो का
मेरे सीने से निकला है लहूँ अपनो के ज़ख़्मो का , महल कब हाल पूँछेगे घिसीं बेकार सड़को का । मेरी हालत बनाई है किसी... Read more
सभी इल्ज़ाम शीशे पर ये जग कब तक लगायेगा
सभी इल्ज़ाम शीशे पर ये जग कबतक लगायेगा , भला। नाकामियों को वो यहाँ कैसे छुपायेगा । तुम्हारा है तुम्ही रख लो उजाला और सूरज... Read more