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मेरी बातों से आप का सहमत होना जरुरी नहीं, आप ने मेरी बातों को पढ़ा इसके लिए हृदय से आपका अनंत साधुवाद...

All Postsकविता (1)मुक्तक (2)अन्य (1)शेर (3)दोहे (2)
'मुक्त'
आज कर दिया तुम्हें अपनी 'कैद' से 'मुक्त'। 'भविष्य' बना सको तुम, बस इतनी आरजू है।। खूब सिंह 'विकल' 31/05/2017
'सुबह'
सुबह की पहली किरण तुम्हें जगा रही है, ठंडी-ठंडी पवन ताज़गी तुम्हें उठा रही है। उठो, राष्ट्र कार्य के लिए आज फिर तुम, आवाज दे,... Read more
स्वप्न
स्वप्न पूर्ण हो आपके, जो भी दिखें न्यारे। रात हुई है बहुत, अब सो जाओ प्यारे।। खूब सिंह 'विकल' 29/05/2017
उठो, जागो
उठो, जागो लक्ष्य पूर्ति को निकल पड़ों तुम। चुनौतियों से टकराकर आज सफल बनों तुम।। खूब सिंह 'विकल' 28 मई 2017
सुबह मुबारक
आज की तिथि मुबारक हो तुम्हें, आज का दिन मुबारक हो तुम्हें। मुस्कुराते रहो तुम हमेशा यूं ही, आज की सुंदर सुबह मुबारक हो तुम्हें।।... Read more
इश्क
जिन्दा रहना इश्क में, 'विकल' नहीं आसान। हँसी-खेल अब इश्क को, समझ रहे नादानन।। खूब सिंह 'विकल' 27 मई 2017
चापलूसी
चापलूसी में चापलूसों को कर दिया कुछ ने फेल। सत्ता प्राप्ति को फर्जी कर रहे नित्य नए खेल।। खूब सिंह 'विकल' 27 मई 2017
'इश्क'
'इश्क' में फना होना भी आसान नहीं 'विकल'। जिंदगी को 'इश्क' समझ जी रहे हैं यहां लोग।। खूब सिंह 'विकल' 27 मई 2017
विकल
मैं तो सागर हूं, हजारों नदियां मुझ में गिर कर अपना आस्तिव समाप्त कर लेना चाहती हैं! फिर भी मैं 'विकल' हूं... और मुझे तलाश... Read more