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मै अखिलेश चन्द्र ,आयु ७२ साल (मूल निवासी शहर बाराबंकी उत्तर प्रदेश हूँ )वर्त्तमान में कल्याण जिला थाना महाराष्ट्र का निवासी हूँ , मुझे साहित्य विशेषतया कविता में अभिरुचि है, ,अभियांत्रिकी में स्नातक हूँ और मैं केन्द्रीय सरकार में ४१ साल सेवा के नवम्बर २००४ में सेवानिवृत हुवा

All Postsकविता (8)अन्य (2)लेख (1)लघु कथा (1)
कविता :तितली
तितली ****** तितली के पँख रंगीन और वो हसीन होती है कली कली फूल फूल वो तो घूमती फिरती है कितनी भी दुश्वारियां हों..तितली फिर... Read more
कविता : पिता जी
परिचय ****** कविता पिता जी ... एक बेटी के उद्गार हैं जो वोह अपने पिता जी को आश्वस्त करते हुए देती है ..पदिये ये सुन्दर... Read more
सदोका मलिका ...प्रभु
सदोका मालिका.. प्रभु ****************** जानूँ प्रभु को रहता प्रयास में पोथी पढता सत्संग में भी जाता बाँचता धर्मग्रन्थ जान न पाया प्रभु की यह माया... Read more
निर्लज्ज राजनीति
तांका मालिका .. राजनीति ******** राजनीति तो बन गयी निर्लज्ज शर्म गायब लिहाज़ भी ग़ायब स्वार्थ हुआ सर्वोच्च सिद्धांत वोह किसका है ये नाम ईमानदारी... Read more
ऐसे भी लोग
पलटा ट्रक सब्जियाँ हैं बिखरी लूटते लोग घायल ड्राइवर खून तर बतर कोई न देखे घायल ड्राइवर लूटते लोग आखिरी होती साँसें बेबस औ लाचार... Read more
बदनाम औरतें
बदनाम औरतें ************ भोंडे श्रृंगार से लिपी पुती बदनाम औरतें छज्जे और खिड़कियों से झाँकती औरतें पापी पेट के लिये ग्राहक तलाशती औरतें हर हाल... Read more
बेटियाँ
माँ बाप का बड़ा अरमान होती हैं बेटियाँ हमारे घरों की अनोखी शान होती हैं बेटियाँ हमारे गोद में डालता जब परमात्मा है इन्हें हर... Read more