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न मंजिल पता है, न डगर हमें मालूम है,
रुकना कहाँ है, मुझे नहीं मालूम है,
धक्का दे रहा है ये जमाना मुझे,
कहाँ धकेलना चाहता है ,ये मुझे नहीं मालूम है।

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भारत मेरौ महान : एक मीठी कविता
देखौ भारत की उजियारी रे भारत मेरौ महान, देखौ भारत की उजियारी रे भारत मेरौ महान, सारी यहाँ बीमारी रे पर भारत मेरौ महान, रोटी... Read more