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मन के भावों को उन्हीं की तासीर के शब्दों के साथ कागज पर उतारना मुझे अच्छा लगता है....। मैं अपने लेखन के माध्यम से संबंधों के मानवीयकरण और प्रकृति पर लिखना पसंद करती हूं...। मुझे लगता है हमारे संबंध तभी गहरे हो सकते हैं जब वे मानवीय होते हैं, उनकी प्रकृति को समझने की आवश्यकता है...। मेरा लेखन मन के अहसासों की एक शब्दगाथा है...।

All Postsकविता (8)लेख (3)कहानी (1)
कर्मपथ
जब भी हो कठिन डगर न आंको अपने को कमतर बस धैर्य को बांधे हुए कर्मपथ पर रहो अडिग माना बेशकीमती चीजों की होती है... Read more
ये रिश्ते...
औपचारिकता की चकाचौंध में है एक अजीब सा आकर्षण जिसके वशीभूत होकर मैं भी सोचती रही क्यों हूं मैं ऐसी स्पष्ट और खरी सी। क्यों... Read more
नदी सी बहती मैं....
मैं वेग हूं जलधारा की, बहती चली सतह पर। पाप-पुण्य का भेद किये बिना, सब जल में समाहित करती चली। दिशा के प्रवाह में प्रवाहित,... Read more
आखिर कब तक...
Kamla Sharma लेख Jul 8, 2017
यात्रा के दौरान मिले खट्टे-मीठे अनुभव जहां सफर को आसान बनाते हैं वहीं कुछ स्मृतियां हमारे जेहन में रह जाती हैं। ऐसा ही कुछ यात्रा... Read more
अनंत गहराई
तेरी मोहब्बत का, कुछ यूं हुआ असर, हम खुद से ज्यादा, तुझ पर यकीं करने लगे। कभी-कभी लगता है डर, तेरे प्यार की गहराई से,... Read more
मन से गुजरती ट्रेन
Kamla Sharma लेख Jul 5, 2017
ट्रेन मेरे लिए एक सफर तय करने का संसाधन मात्र नहीं थीं, इसकी रफ्तार के साथ मेरी जिंदगी की रफ्तार तय होती थी। उनींदी अवस्था... Read more
...नन्हीं परी
क्यों कोख में ही हो जाता भेदभाव उस अजन्मी बच्ची से जो कोख से प्रस्फुटित हो ..... अंकुरित होने को है व्याकुल इस गर्भ गृह... Read more
परवाह
सौम्या गांव में पली बड़ी एक सरल स्वभाव की लड़की थी। उसने गांव में रहकर ही शिक्षा प्राप्त की थी, सौम्या बाहरी दुनिया से बेखबर... Read more