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हम जितेंद्र कमल आनंद को यह साहित्य पीडिया पसंद हैं , हमने
इसलिए स्वरचित ११४ रचनाएँ पोस्ट कर दी हैं , यह अधिक से अधिक लोगों को पढने को मिले , आपका सहयोग चाहिए, धन्यवाद
----- जितेन्द्रकमल आनंद

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मेरे स्वर संगम सँग वीणा अंतरमन ने ( गीत) जितेंद्रकमलआनंद
Jitendra Anand गीत Apr 30, 2017
मेरे स्वर संगम सँग वीणा अन्तर्मन ने आज बजायी । तेरे अंतस के पृष्ठों पर स्वर्णिम- स्वर्णिम पावन अपने । लिखे गीत गाऊँ हरषाऊँ,सतरंगी दृग... Read more
कविता : हुआ अपेक्षित है आवश्यक
हुआ अपेक्षित है आवश्यक,सद् मारग पर तुमको चलना। परहितार्थ जीवन यापन हो,सद् आचरण बनाये रखना ।।३!! सुस्थिरप्रग तुम्हें रहना है,घबराहट तुमसे घबराये विजय तुम्हारी होगी... Read more
इस स्थावर जंगम जगत् का जो मूल तत्व( घनाक्षरी)
इस स्थावर जंगम जगत् का जो मूल तत्त्व, बीज प्रधान सत्त्व, परब्रह्म निष्काम हैं । दुग्धामृत - दायिनी हैं जिनकी कृपा से गायें, उन्हीं गोपाल... Read more
परमब्रह्म हैं जो परमपुरुष जिनसे ( घनाक्षरी)
परमब्रह्म हैं जो परमपुरुष जिनसे- विष्णु भी पाते ऐश्वर्य करते निवास हैं । उन योगेश्वर कृष्ण को करते प्रणाम , रखते श्रद्धा भी हम ,करते... Read more
हरि- नारायण,विष्णु जो कृष्ण के स्वअंश हैं( घनाक्षरी)
हरि- नारायण ,विष्णु जो कृष्ण के स्व- अंश हैं, प्राप्त करते हैं रूप प्रभु रूपवान से । कृष्ण ही परमेश्वर ,उनसे महेश्वर भी, प्राप्त करते... Read more
मंजरी को चाहता हूँ ( गीत ) पोस्ट -२३जितेंद्रकमलआनंद( पोस्ट१६५)
माधुरी को चाहता हूँ ( गीत ) तुम हिरन सम मरुथलों में दौडना चाहूँ करूँ क्या ननिजह्लदय ,गोविंद की मैं माधुरी क चाहता हू रंग... Read more
घनाक्षरी:: मेरे लिए कुछ भी न दूर और : जितेंद्र आनंद( पो १६३)
मेरे लिए कुछ भी न दूर और समीप ही, मेरा प्रतिबिम्ब ही तो होता अवलोकित है । दृष्टि में न भेद|वाह्य, आंतरिक जगत् में, सर्वत्र... Read more
हम मानव हैं हरित धरा के :: जितेन्द्र कमल आनंद ( पोस्ट १५९)
Jitendra Anand गीत Nov 21, 2016
हम मानव हैं हरित धरा के ,मानवता से नाता है । भारत भाग्य विधाता है ।। महारथी कवि काव्यप्रज्ञ ये स्वर्णिम रथ दौडाते हैं। काव्यकलश... Read more
यह ब्रह्मही है आत्मा ,आत्माही है: जितेन्द्र कमल आनंद ( पो १४२)
घनाक्षरी ----------- यह ब्रह्म ही है आक्मा, आत्मा ही ब्रह्म अत: ब्रह्माण्डीय चकुर्दिक विस्तार आत्मा का है । यह आत्मा सम्पूर्ण और आत्मा ही सत्य... Read more
सत्यके सुदर्शन जिसे होते हैं:: जितेंद्रकमल आनंद ( पोस्ट१४०)
घनाक्षरी:-- ---------- सत्यके सुदर्शन जिसे होते हैं अलौकिक , आत्मपद पर वही होता है सुशोभित । निरावृत दृष्टि और पाकर वह सद्ज्ञान, खिल कर कमल... Read more
स्वप्नवत् हो भ्रांतियॉ जिसके :: जितेन्द्र कमल आनंद ( पोस्ट१३९)
स्वप्नवत हो भ्रांतियॉ , जिसके बोधोदय से, उस सुखरूपी शॉत, तेजस्वी को नमन हैं । वासनाओं में जो नहीं होता है संलिप्त कभी , उस... Read more
युग निर्माण करें सब मिलकर::-- जितेन्द्र कमल आनंद ( पोस्ट १३८)
युग निर्माण करें सब मिल कर, मानवताके पथ पर चलकर । परम अपेक्षित है गीताके ,परमतत्व को फिर पाने की । आवश्यकता है भारतको ,... Read more
१३५ : अंतस जब दर्पण बन धुँधलाता यादों को -- जितेंद्रकमलआनंद ( पोस्ट१३५)
अंतस जब| दर्पण बन धुँधलाता यादों को । विरहाकुलनयनों से नीर छलक आता है ।। दामन में धूप लिए यौवन दोपहरी में ---- भटका है... Read more
ओंकार, अघनाशक,परम आनंद हैं जो: जितेंद्र कमल आनंद ( १३१)
ओंकार, अघनाशक ,परम आनंद हैं जो , क्यों न करें भक्त यशगान आठों याम ही । देख- देख प्रभु प्रेममूर्ति की सौंदर्य राशि , करते... Read more
काव्य से अमृत झरे,वेदका वह सार दें:- जितेंद्र कमल आनंद ( पो १३०)
सरस्वती -- वंदना ----------------------- काव्यसे अमृत झरे, वेद का वह सार दें! मॉ मेरी वरदायिनी साधकों को प्यार दें । ऑधियों से लड़ सके ,... Read more
जो पिता से प्यार करतीं वो हमारी वेटियॉ: जितेंद्र कमल आनंद ( पो १२९)
गीत ------- जो पिता से प्यार करतीं, वो हमारी वेटियॉ हैं । सूर्यको जो अर्घ्य देतीं, ज़िन्दगी का अर्थ देतीं । हर्ष देती खेलकर भी,... Read more
समय बदलते सूखी धरती मुस्काती :: जितेंद्र कमल आनंद
मुक्तक ( पोस्ट १२७) ----------------------- समय बदलते सूखी धरती मुस्काती ऐसे बाला । नयी नवेली ओढ चुनरिया मदमाती जैसे बाला । सृष्टि - चक्र का... Read more
घूँट सुरा का तीखा होता प्यालों में : जितेन्द्र कमल आनंद ( पोस्ट१२६)
घूँट सुरा का तीखा होता प्यालों में माना ,बाला ! यात्रा शभ हो जाये भर दो खाली पैमाना ,बाला ! मेरे होठों के गीतों को... Read more