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सामाजिक कार्यकर्ता,पुर्व ॻाम प्रधान

Hometown: Saklana Tehri Garhwal
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All Postsकविता (20)
सृष्टि
ऐ सृष्टि, कहाँ है तेरी दृष्टि, कभी अतिवृष्टि, तो कहीं अनावृष्टि। ऐ सृष्टि, ये जो आषाड है, मेघों की चिंघाड है, उफनती बाढ है, तो... Read more
अभिलाषा
कुछ किया नहीं ऐसा,पर विशिष्ठ स्थान मिले, ऐसी चाहत लिये जी रहा हूँ मैं। शुभ कामनाओं को ओढे,कल्पना लोक में रहकर, यथार्त के धरातल पर... Read more
लोक तन्त्र और आतंकवाद
हर रोज,हर वक्त। रेडियो,दूरदर्शन,और समाचार पत्र। में, पक्ष,एवं विपक्ष,एक स्वर एक मत । देते हैं,यह बयान, लोकतन्त्र में,हत्या और आतंकवाद का, नहीं है कोइ स्थान।... Read more
मां
मां, सिर्फ रिस्ता नहीं है , अहसास है । मां सिर्फ शब्द नहीं है, विश्वास है। मां का होना भरोशाा है, मां का न रहना... Read more
पहाड की नारी
पहाडी पगडण्डियों पर पैदल चलती नारी, सिर पर घास का बोझ पीठ पर बंधा नन्हा प्राणी, दोपहरी की चढती धूप में पसीने से तरबतर, हांफती... Read more
आज कि जिन्दगी
मैं, जा रहा था ,सडक के उस पार, देख गाडियों कि रफ्तार, प्रतिक्षा करता रहा,खाली सडक का, तब जाके वह पल आया, जब सडक, को... Read more
हिन्दी सेल
मेरे भारत वर्ष में,यानि कि अपने हिन्दोस्तान में, देशी भाषाओं के विकास को,प्रयत्नशील हैं सभी, अपने अपने तरीकों से, किन्तु सवांद,बनाये रखने को,हम एक दुसरे... Read more
किसान और बादल
उमड,घुमड के आते बादल, गोरे बादल,काले बादल, गरज गरज के गाते बादल, बिन बरखे,जब जाते बादल, उम्मीदों को करके घायल, ये काले बादल,ये गोरे बादल,... Read more
स्कुली बच्चे
मूसलाधार बर्षा से लेकर, कडकडाती ठन्ड मे होकर चिलचिलाती धूप मे चलकर, उन बच्चों,कि स्थिथि पर गौर करें, जिन्हे नसीब नही है, चलने को प्रयाप्त... Read more
ग्रह नक्षत्र,
तरक्की के इस दौर में वैज्ञानिकों ने चान्द मंगल जैसे सितारों(उपग्रह) तक, तय कर ली है अपनी यात्रा, अपने बनाये उपॻहों के माध्यम से, और... Read more
आविष्कार,आवश्यकता कि जननी है
कहते हैं कि आवश्यकता आविष्कार,आवश्यकता कि जननी है, और आविषकार नित नये रुप में मेरे समक्ष आकर, अपनी सुनहरी तस्वीर प्रस्तुत करते हैं, और जब... Read more
सपना ,
मेरा भी,था एक सपना एक घर हो,अपना ्और घर में होंगी, जरुरत कि सभी,वस्तुऐं पर यह क्या, घर तो,जैसे,तैसे बना ही दिया, पर जरुरत कि... Read more
नया नवेला,अपना आंचल,नाम मिला हमें उत्तरांचल
नया नवेला,अपना आंचल,नाम मिला हमे उत्तरांचल,नकद रोकडा ना सही,ठन ठन पर प्रकृति का है,सुन्दर उपवन, चार धामों का तीर्थाटन है,अर्धकुम्भी,हरिद्वार है,उधम सिहं,पर उधोग का भार... Read more