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विनीता (विनी) घरेलू महिला एम ए हिन्दी,
कविता लेखन,गायन,संवाद,राष्ट्र,बेटी,बचाओ पढाओ,स्थानीय काव्य आयोजनों,पत्रिकाओं में सम्मलित,मूल रूप से नरसिंगपुर निवासी,,,,
सबरस लेखन,हिंदी साहित्य की सेवा,,,

All Postsकविता (2)
@शिकवे मिटाते है@
*शिकवे मिटाते है* चलो आज कुछ खाव को हकीकत बनाते है,, अपने हाथों से ही नये कुछ घरौंदे बनाते है,, बहुत सह लिया जिलालत को... Read more
,,,कोना जगमग,,,
,,,कोना जगमग,,, जगमग दिल का कोना कोना हो जाये,,,, साफ नजर आये मंजिल ऐसा उजाला हो जाये,,,, सारे सपने सारे अपने खुश हो तुमसे,,,, खुशियों... Read more