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Doctor (Physician) ; Hindi & English POET , live in Lucknow U.P.India

Hometown: लखनऊ उ. प्र.
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अश्रुनाद मुक्तक संग्रह ( हिन्दी )

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All Postsकविता (10)मुक्तक (6)गीत (6)
अश्रुनाद
. .... मुक्तक .... अनुपम आह्लादित घेरा तुममें संचित है मेरा अंतर्मन में जो चित्रित कण- कण है चित्रण तेरा अँग्रेज़ी भावानुवाद Matchless gleeful has... Read more
अश्रुनाद
. .... मुक्तक .... भव- सिन्धु प्रलापित फेरे लहरें सुनामि बन घेरे भू- गर्भ प्रकम्पित होता जब अश्रुनाद से मेरे डा. उमेश चन्द्र श्रीवास्तव लखनऊ
मुक्तक
. .... मुक्तक .... तिमिराञ्चल में शालायें कल्पित शशि कलित कलायें तम के छल में खो जातीं उत्तुंग शिखर मालायें डा. उमेश चन्द्र श्रीवास्तव लखनऊ
गीत
. .... गीत ..... चिर- पुरातन प्रेम की नित बह रही नव धवल धारा थिर धरातल सुखद संगम रूप सुन्दरतम् तुम्हारा कोटि तारक अवनि अम्बर... Read more
अश्रु- नाद
...... मुक्तक ..... ... अनबूझ नियति ने खेली जीवन की दुखद पहेली हे! विकल वेदने मेरी बन जाओ सुखद सहेली परिहास किया जीवन का निर्मल... Read more
गीत ...
.... जीवन की दुखद अनुभूति .... ॥ अनुज-व्यथा ॥ कुछ कही अनकही बात कुछ भी नहीं किन्तु सुलझी नहीं बस उलझती रही मैं उपेक्षित रहा... Read more
..... गीता ...
.... ..गीत.. हे ! पार्थ सुनो परिचय मेरा हम में तुम में अणु कण में मैं सर्वत्र सदा आभिनय मेरा फूलों कलियों काँटों में मैं... Read more
राष्ट्र - वन्दना
हे!वन्दनीया हे!वत्सलाय नमामि भारत वसुन्धराय प्रसून पुष्पित सुवास मलयज हिलोर सागर सुदर्शनाय अगम्य गगनम् सुरम्य सरिता निनाद कल-कल हिममंडिताय अरण्य कलरव आरुण्य अञ्चल प्रफ्फुल्ल जीवन... Read more
.... पद ...2
भगवन ! कैसे दर्शन पाऊँ ? तीरथ चारो धाम गया जा , सागर गंग नहाऊँ । अर्पण तर्पण पूर्ण समर्पण , कंठी कर सरकाऊँ ।... Read more
..... ..  पद ......
भगवन!क्यों नहिं दर्शन पाऊँ । योग मंत्र श्रुति ग्रन्थ न जानू , कैसे तुमको ध्याऊँ ? मृदु-पद उन्मुख सतत् हृदय में , मूरति मञ्जु सजाऊँ... Read more