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डॉ.रघुनाथ मिश्र 'सहज'
अधिवक्ता/साहित्यकार/ग़ज़लकार/व्यक्तित्व विकास परामर्शी /समाज शाश्त्री /नाट्यकर्मी
प्रकाशन : दो ग़ज़ल संग्रह :1.'सोच ले तू किधर जा रहा है
2.प्राण-पखेरू
उपरोक्त सहित 25 सामूहिक काव्य संकलनों में शामिल

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All Postsकविता (9)गज़ल/गीतिका (19)मुक्तक (18)गीत (3)दोहे (3)कुण्डलिया (6)तेवरी (3)कव्वाली (1)
ग़ज़ल:
जो बिखर गई थी टुकड़ों में, बोटी जनता की थी वह। छीना -झपटी से जो लूटा, रोटी जनता की थी वह। पानी के नल की... Read more
ग़ज़व
मोहब्बत का जादू, असरदार होता, अगर दिल तुम्हारा,ख़बरदार होता। ए दुनियां कसम से,बहुत ख़ूब होती, अगर दिल का कमरा,हवादार होता। ख़ूबसूरत ग़ज़ल, कह गए हैं... Read more
गीतिका
*मापनी मुक्त गीतिका* *समान्त:डरना * *पदान्त:क्या * किया नहीं कुछ बुरा अगर,तो डरना क्या। मस्त जियो यूँ रोज-रोज, फिर मरना क्या। सुनता नहीं जनम से... Read more
ग़ज़ल
तेरी आँखों की गहराई,मुझे पागल बना देगी. तेरे चेहरे की सुन्दरता,मुझे घायल बना देगी. हमारे बीच की ए गुफ़्तगू,कुछ ख़ास लगती है. तेरी बातों की... Read more
कालजयी बन जाओ
कालजयी बन जाओ: एक यथार्थ परक मुक्त छन्द कविता-समीक्षार्थ: अभी -अभी स्वानुभव पर आधारित, विशिष्टतया नकारात्मक सोच वालों के नाम पाती. विमर्श के लिए" 000... Read more
ग़ज़ल
जीभ से जो हुआ, जख़्म भरता नहीं। दिल हो जब उदास, धीर धरता नहीं। अवसान की बात,पकड़ो न अभी बस, सुनहरा अवसर,कभी ठहरता नहीं। कर्म... Read more
मुक्त छन्द रचना -कालजयी बन जाएँ
कालजयी बन जाओ: एक यथार्थ परक मुक्त छन्द कविता-समीक्षार्थ: अभी -अभी स्वानुभव पर आधारित, विशिष्टतया नकारात्मक सोच वालों के नाम पाती. विमर्श के लिए" 000... Read more
गीतिका:
बड़े - बड़ों को, आइना दिखा दिया हमने. हँसना - रोना, व गाना सिखा दिया हमने. कल तलक, जिन्हें मालूम नहीं थीं राहें, आज उनको... Read more
कुण्डलिया छंद
जागो प्रियवर मीत रे, कर लें रवि से प्रीत। क्या रक्खा उतपात में,छेड़ें म्रिदु संगीत। छेड़ें म्रिदु संगीत,रहें हर पल आनंदित। बहें हवा में नहीं,करें... Read more
'सहज' के दोहे -खामोशी
खामोशी पसरी रही,लोग रहे भयभीत। दूर-दूर तक मौन थे,छन्द-ग़ज़ल औ गीत। हम जब तक खामोश थे,खूब चल गई पोल। ठान लिया अब बोलना,होगा डब्बा गोल।... Read more
अन्दर कुछ गुल खिले
ह्रदय से ह्रदय मिले. दीप से दीप जले. दूर या पास रहें, अन्दर कुछ गुल खिले. @डॉ.रघुनाथ मिश्र 'सहज' अधिवक्ता / साहित्यकार सर्वाधिकार सुरक्षित.
यदि
कोयल की कूक मयूर की थिरक रिमझिम सावन की खुशबू मधुबन की सच है बहुत प्यारी लगती हैं यदि पेट भरे हों तन ढके हों... Read more
अक्षम्य है
परिणाम गलती का गलत ही होगा अंततः जानकर की गई गलती अक्षम्य है विवेक है हममें ईश्वर प्रदत्त फिर भी गलती पर गलती सोचें किधर-क्यों... Read more
ग़ज़ल
जला है दिया, अब अंधेरा हटेगा. सुखों पर लगा है,वो पहरा हटेगा. शिकंजे में थीं चन्द, लोगों के खुशियाँ, आम लोगों से, ज़ुल्मों का डेरा... Read more
मुक्त छंद कविता
हंस की अंतर्ध्वनि : 000 मैं खुश हूँ 000 जिन्दगी! शुक्रिया तेरा मुझे इंसान नहीं बनाया. मैं खुश हूँ इस रूप में परमात्मा का भी... Read more
ग़ज़ल:
चिराग लेके मैं खुद ही को, खोजता यारो । कर्ज़ के बोझ पे दिन-रात,सोचता यारो। ज़ुल्म की आंधियों के बीच है,हॅसना सीखा, सितम पे होके... Read more
गीतिका
जीना -जीकर मर जाना , भैया यह क्या बात हुई. कठिन समय में डर जाना,भैया यह क्या बात हुई. कोई मरे कुपोषण से, कोई अतिशय... Read more
ग़ज़ल
2122 2122 2122 212 मात्र भर 26 यति 14,12 क्या करूँ किससे कहूँ मैं, बात कोई ख़ास है. हर यहाँ मालिक कहे है,हर वही पर... Read more
मुक्तक
क़ैदखाने में कहाँ है, शुद्ध जल- ताज़ी हवा. छिन गई मजलूम से है,रोटियाँ - मरहम- दवा. भूख का तांडव ग़ज़ब,पसरा हुआ कुछ इस तरह, लग... Read more
मुक्तक:
वरिष्ट सिखाएं-नवोदित सीखें -मिशन है हमारा. सब ही एक दुसरे का-मिल जुल कर-बनें सहारा.' खुद करके खाना, बाँट के खाना,कोई न देगा, सीखें सबक हम... Read more
मुक्तक:
तुझे जी-जान से चाहा. मान-सम्मान से चाहा. सजदा न किया-सच है ए, तुझे अभिमान से चाहा. @डॉ.रघुनाथ मिश्र 'सहज' अधिवक्ता/साहित्यकार सर्वाधिकार सुरक्षित
दोहा मुक्तक
आयी बाढ़ बहे सभी, सपने औ अरमान. छिना खेत-गिरवी हुआ, सर्व मान-सम्मान. बनिए ने है कर लिया, तिगुना क़र्ज़ वसूल, गया ब्याज ही ब्याज में,... Read more