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मैं मूलत:एक शिक्षिका हूँ।लेखिका ,संपादिका ,समीक्षक भूमिका निभाकर साहित्य सृजन की ओर अग्रसर हूँ मेरी स्पर्धा किसी से नहीं , स्वत:अपने आपसे है।स्वयं को बेहतर से बेहतरीन बनाना मेरे साहित्यिक जीवन का लक्ष्य है।..
शब्द अथाह सागर हैं और भाव उठती हुई लहरें..
..डॉ.पूर्णिमा राय
,अमृतसर(पंजाब)

All Postsकविता (2)गज़ल/गीतिका (1)मुक्तक (1)
बेटियाँ
बेटी को जन्म देकर भी माँ माँ ही रहती है बेटी के जन्म पर अक्सर माँ की रुस्वाई होती है। एक बेटी क्या कम थी... Read more
बेटियाँ
बेटी को जन्म देकर भी माँ माँ ही रहती है बेटी के जन्म पर अक्सर माँ की रुस्वाई होती है। एक बेटी क्या कम थी... Read more
नई दिल्ली में चल रहे 69वें निरंकारी संत समागम( 19-20-21नवंबर)में "सत्गुरु बाबा हरदेव सिंह जी महाराज" को समर्पित कवि दरबार में शीर्षक "कर्ज चुकाया जा... Read more
मुक्तक
मुक्तक निर्धन को सहयोग दें,मिटे मान-अभिमान। झोली भर लो प्रेम से,बढ़ जाएगी शान।। मिल जाए संतोष धन,दें निर्धन का साथ। जीवन उनका खिल उठे ,नभ... Read more