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गीत
एक गीत ( ताटंक छंद आधृत) कब तक यूँ ही गद्दारों पर, दया दिखाते जाएँगे। भारत के माँ लाल दुलारे,कफन ओढ़ते जाएँगे।। धींगामुश्ती का खेल... Read more
कुंडलिया छंद
कुंडलिया छंद- मिलना मुश्किल हो गया,जग में अच्छे मित्र। अंकित सबके हृदय में,एक स्वार्थमय चित्र। एक स्वार्थमय चित्र,करे बस चिंता अपनी। मुँह में केवल दोस्त,स्वयं... Read more
कुंडलिनी छंद
कुंडलिनी छंद - ठाढ़ी आँगन रूपसी,ज्यों खोले घन केश। ऐसा मादक लग रहा, घटा सँग परिवेश। घटा सँग परिवेश,देख रति इच्छा बाढ़ी। धरकर सुंदर रूप,प्रकृति... Read more