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अम्बाला कैंट हरियाणा में रहने वाले, विकास शर्मा 'दक्ष', हिमाचल विश्वविद्यालय से स्नातक हैं। निजी क्षेत्र की कंपनियों में सेल्स विभाग में तीस साल तक कार्यरत रहे। इन्होने भारत भर में भ्रमण कर ज़िन्दगी को करीब से देखा है। आज़ाद ग़ज़ल के माध्यम से इन्होने अपने खट्टे-मीठे अनुभवों को पाठकों तक पहुँचाने का प्रयत्न किया है।
इनकी आज़ाद ग़ज़लें और कविताएं देश-विदेश की कई पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। साँझा काव्य संग्रह “मुसाफिर”, “मृगनयना” और साँझा ग़ज़ल संग्रह “गुलजार” का सत्यम प्रकाशन द्वारा प्रकाशित । साहित्य सागर द्वारा “काव्य गौरव” सम्मान । भोपाल की अग्रणी साहित्यिक संस्था रंजन कलश के आगामी काव्य संग्रह में भी इनकी रचनाएँ सम्मिलित की गयी हैं । इसके इलावा एकल ग़ज़ल संग्रह “ज़र्द पत्ते” भी जल्द प्रकाशित हो रहा है।

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साँझा काव्य संग्रह
मुसाफिर
मृगनयना
सांझा ग़ज़ल संग्रह
गुलज़ार

Awards & Recognition

काव्य गौरव ....... साहित्य सागर द्वारा

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All Postsगज़ल/गीतिका (15)
हबीब
ये मुहब्बत करने वाले भी अजीब निकले, जज़्बातों के रईस, दिल के ग़रीब निकले, झूठे थे वो तमाम अफ़साने सच्चे इश्क़ के, हकीकत से दूर,... Read more
रतजगे
सरक के तकिये ने ख्वाब जो तोडा, नाता करवटों ने बिस्तर से जा जोड़ा, बेवज़ह नाराज़ और लौटती ही नहीं, क्यों मैंने ठीकरा नींद के... Read more
ज़िन्दगी
ज़िन्दगी भी अब चाय की प्याली सी है, चुस्कियां लेते लेते ये थोड़ी खाली सी है, वक़्त के साथ ठंडे होते गर्म अहसास, शक्ल-ओ-सूरत भी... Read more
घर आ गया
मैं यूँ खुद के बिखरे पुर्ज़े सिमटाता, घर आ गया, ज्यों चरवाहा अपनी भेड़ें लौटाता, घर आ गया, हर बशर बिकने को बैठा है, रिश्वत... Read more
किताब
जाने पढ़कर आयें हैं आज वो कौन किताब, उनके हर जवाब पर हो रहे हैं हम लाजवाब, ख़ामोशी से चले गए, तिरछी निगाह से देखकर,... Read more
आइना
आइना भी अब मुझसे पहचान मांगता है, चेहरे पर पहले सा ईमान मांगता है, बेशक़ रहे हम उम्र भर सफर में, रास्ता क़दमों के निशान... Read more