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दोधक छंद
211 211 211 22 साजन-साजन रोज पुकारूँ आँगन-आँगन द्वार निहारूँ। पीर नहीं सजना अब जाने भूल गये अब क्या पहचाने।।
मुक्तक
आज कैसा सवाल आया है उन अमीरों पे काल आया है। नोट जिनके करीब हैं ज्यादा सीर उनके बवाल आया है।। भाऊराव महंत "भाऊ"
मुक्तक
विलोम शब्द आस्था:- 2122 1212 22 आस्था पे सवाल आया है जाने' कैसा बवाल आया है। आज इंसान में न जाने क्यूँ जानवर सम खयाल... Read more
मुक्तक
2212 2212 2212 2212 ये भूल मानव की कहूँ ,या काल की मैं क्रूरता। मानव मगर इस चीज़ को,कहता रहा है वीरता।। कैसे कहें भगवान... Read more
मुक्तक
समंदर के किनारों पर निशां गर हम बनायेंगे मगर उसकी लहर को हम कभी क्या रोक पायेंगे। निशानी रेत पर रहती नहीं समझा करो "भाऊ"... Read more
मुक्तक
122 122 122 122 मेरे साथ में एक हलचल हुआ है बताऊँ मैं कैसे बड़ा छल हुआ है। दिया है उधारी जिसे कर्ज मैंने कभी... Read more
चौपाई
जीवन अपना फूलों-सा है जीना लेकिन शूलों-सा है। जो भी शूलों पर है चलता जीवन में फूलों-सा खिलता।।
मुक्तक
कोई बादशाह यहाँ, कोई बना गुलाम करे गुलामी रात दिन,करते रहे सलाम। ऐसे ही होता यहाँ, राजनीति का खेल बादशाह के राज में, मरती जनता... Read more
उल्टी बात
कुण्डलिया छंद लम्बूजी छोटे दिखे, छोटूजी छह फीट। सीधेजी टेढ़े लगे, जैसे हो अनफीट जैसे हो अनफीट, अंग हैं टेढ़े-मेढ़े नाम समोसाराम, खाते रोज के... Read more
आज के गीत
~~~~~~कुण्डलिया छंद~~~~~~ सुनते राम भजन सभी,,,हो जाते हैं बोर चिकनि-चमेली धून पे, होते भावविभोर। होते भावविभोर,,,,सभी को नाच-नचाते होता है हुड़दंग,,,,,,,जोर से साँग बजाते। कह... Read more
जीवन सत्य
हुआ प्रस्थान बचपन का हुआ आगाज यौवन का यहीं प्रारंभ होता है यहीं परिवार-उपवन का। बुढ़ापे के लिए रखते कमाई मान धन सेवा यहीं फिर... Read more
जीत का जश्न
हमारी जीत पर कैसे धमाका हो रहा यारो बजे अब ढोल ताशे नाच गाना हो रहा यारों। मजे लेते रहेंगे देश में हम पाँच सालों... Read more
मुक्तक - 2
चुल्हों में सभी के नहीं रोटियाँ बदन पे सभी के नहीं धोतियाँ। हजारों बिना रोटियों के मरे करों में सभी के नहीं बोटियाँ।। भाऊराव महंत... Read more
मुक्तक
माँ को मेरे ऐसा अक्सर लगता है। मेरा बेटा अब तो अफ़सर लगता है सूटबूट से जब भी निकलूँ मैं घर से कहती पूरब का... Read more