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मतगयंद सवैया
ATUL PUNDHIR अन्य May 29, 2017
दीप वही तम जो हरता जुगनू जलता न जला तम पाये प्यास हरे हर बूँद सुधा बसुधा हर पीर पिये मुसकाये नीरज कीचड़ अंग लगे... Read more
मुक्तक
आँखों के स्वप्न यूँ जले काजल से जा मिले आँसू हमारी आँख के बादल से जा मिले दुनियाँ की बेवफाई से जब दिल ये भर... Read more
दोहा
ATUL PUNDHIR दोहे May 17, 2017
पलकें अनशन कर रहीं, आँखें बेउम्मीद अगर मोल मिल जाय तो, ला दो कोई नींद बेलन जब सर पर पड़े, चले न कोई जोर बीबी... Read more
मुक्तक
ये दिल निकाल कर कहीं रख दो दराज में हो गये हैं लोग अब पत्थर समाज में मार कर दिल के जमीरों को खुदा मिलता... Read more