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अशोक दर्द
लेखन-साहित्य की विभिन्न विधाओं में निरंतर लेखन व प्रकाशन
सम्मान- विभिन्न सामजिक व साहित्यिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित
वर्तमान पता-प्रवास कुटीर बनीखेत तह. डलहौज़ी जि. चम्बा (हि.प्र)
मोबाइल -9418248262
ईमेल-ashokdard23@gmail.com

All Postsकविता (13)
तीन कविताएँ
[20] शब्द चितेरा मैं भी होता शब्द चितेरा ,कोई बात न्यारी लिखता | होरी की दुःख - गाथा लिखता , धनिया की लाचारी लिखता ||... Read more
कविताएँ
फैंके हुए सिक्के .... फैंके हुए सिक्के हम उठाते नहीं कभी | अपनी खुद्दरियों को गिरते नहीं कभी || खुद के बड़ा होने का जिनको... Read more
कविताएँ ----- महके महके आशियाने हो गये , नेकियाँ दिल में..,फूलों की खेतियाँ
महके महके आशियाने हो गये | चिड़िया के बच्चे सियाने हो गये || हर तरफ हैं प्यार की ही खेतियाँ | नफरतों के अब जमाने... Read more
लघुकथाएं
विमला को गाँव वाले मास्टरनी कह कर बुलाते थे | क्योंकि उसके पति गाँव के सरकारी स्कूल में मास्टर जो थे |गाँव में मास्टरनी को... Read more
कविताएँ
वक्त की हुंकार यह कैसी वक्त की हुंकार मिलती है | हो रही मानवता तार –तार मिलती है || मेरे बेटों –बहुओं से मुझे बचाओ... Read more
पांच कविताएँ
कवि और कलम बारूद के ढेर पर बैठी दुनिया समझा कवि | नफरतें सब धुल जाएँ प्रेमगीत सुना कवि || जंग की तैयारी में बन... Read more
कविता
फैंके हुए सिक्के .... फैंके हुए सिक्के हम उठाते नहीं कभी | अपनी खुद्दरियों को गिरते नहीं कभी || खुद के बड़ा होने का जिनको... Read more
बेटी
बेटी धरती का श्रृंगार है बेटी | कुदरत का उपहार है बेटी || रंग-बिरंगे मौसम बेशक | जैसे ऋतू बहार है बेटी || कहीं शारदा... Read more
मेरे पहाड़  में
मेरे पहाड़ में उगते हैं आज भी प्रेम के फूल , और घासनियों पर उगती है सौहार्द की दूब ; घाटियाँ गूंथती हैं छलछलाती नदियों... Read more
अशोक दर्द की कविताएँ
अग्निगीत तुम लिखो उनके खिलाफ अग्निगीत जिन्हें देश को गलियाँ बकने के बदले जनता की गाढ़ी कमाई की बरियानी खिलाई जाती है देश तोड़ने की... Read more