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अध्यापक, कवि, लेखक व विभिन्न समाचार पत्रों में स्तम्भ लेखन

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All Postsकविता (5)
बेटीयाँ
क्या सच में होती हैं घर का श्रृंगार बेटियां, फिर समाज में क्यों दिखती आज भी लाचार हैं बेटियां माना कि पापा की लाडली ,माँ... Read more
बाल कविता
दूध मलाई रोज खाओ चुनु मुनु दो भाई, खूब खाते दूध और मलाई दूध है उनको खूब भाता पीकर उनको बड़ा मजा आता, दो गिलास... Read more