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जो बात हो दिल की वो कलम से कहता हूँ....
गर हो कोई ख़ामोशी...वो कलम से कहता हूँ...

✍अरविन्द दाँगी "विकल"

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All Postsकविता (24)
है केवल काश्मीर नहीं, सिर मुकुट है भारत का वो...
है केवल काश्मीर नहीं, सिर मुकुट है भारत का वो... कोई टुकड़ा पुश्तेनी नहीं, अविभाज्य अंग है भारत का वो... पत्थर ईंटो से न पाटों... Read more
हम ही तो वो है जिन्होंने शून्य का इतिहास रचा...
हम ही तो वो है जिन्होंने शून्य का इतिहास रचा, हम ही तो वो है जिन्होंने सिकन्दर के कदमो को रोका। लव कुश की धरा... Read more
नूतन नववर्ष सनातन ये....
नूतन नववर्ष सनातन ये.....आदि अनादिकाल से चलित जो है। भारतवर्ष जिससे सुशोभित है....राजा विक्रमादित्य से नामित जो है। माँ शक्ति से जिसका आरंभ है...नवरात्र से... Read more
क्रोंच विरह से निकली कविता,हर उर की भाषा बन आयी हो...
क्रोंच विरह से निकली कविता,हर उर की भाषा बन आयी हो। मन के भावों की तुम भाषा,हर मन व्यक्त कर पायी हो। जीवन का हर... Read more
ये रंगों का महापर्व खुशियां फिर ले आएगा...
ये रंगों का महापर्व खुशियां फिर ले आएगा... भूल न जाना अपनेपन को फिर एहसास दिलाएगा... तुम न बदलो मन को अपने होली के रंगों... Read more
खण्ड खण्ड कर दिया भारत को, अखण्ड भारत तो ख्वाब रहा
मेरे साहित्य जीवन की प्रथम भारत कविता ------------------------------------------------ खण्ड खण्ड कर दिया भारत को, अखण्ड भारत तो ख्वाब रहा 1 खण्ड - खण्ड कर दिया... Read more
हा बन सको तो बनो महावीर की बेटियों से तुम जाने जाओ...
जीवन में अधिकारों की सीमा में उनको बांध दिया... बेटी है कहकर उनको घर की दीवारों में बस सम्मान दिया... वारिस के पीछे इस जग... Read more
होली ये ख़ुशनुमा लम्हो को फिर सजाने का मौसम है..
पलाश के फूलों के महकने का मौसम है.. रंगो के संग खुशियों से मिलने का मौसम है.. रूठो के अपनेपन में लौट आने का मौसम... Read more
चल रहा चुनावी महासमर शब्दों के बाण से...
चल रहा चुनावी महासमर शब्दों के बाण से... लग रहा पुरज़ोर यूपी में सिंहासन के नाम से... बज रही तालियां कटाक्ष व्यंग्य बाण पे... वादे... Read more
क्यों न होता यहाँ इक साथ चुनाव..?
बड़ा अज़ीब सा हाल है मेरे देश का... कभी यहाँ चुनाव...कभी वहाँ चुनाव... इस साल चुनाव...उस साल चुनाव... हर साल चुनाव...पांचो साल चुनाव... कभी यहाँ... Read more
करो तो कुछ ऐसा की बेटियों से तुम पहचाने जाओ यार...
न कहो अब छुईमुई सी होती है बेटियाँ... न समझो अब की कमज़ोर होती है बेटियाँ... न आँको की कमतर बेटों से होती है बेटियाँ...... Read more