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मेरी बारी
शुन्य मे निहारती निभा की आखें अपने छोटे पोता पोती की याद मे सूजती जा रही है जो उससे बहुत दुर चले गए है। अपने... Read more
मिलन
कुछ कहने गए उनसे तो साथ में शर्म भी चल पड़ी । फुरसत स बतियाएगे उनसे तो साथ में घड़ी भी चल पड़ी। वर्षो में... Read more
बारिश
आ मेरी हथेली पर आ तुझे मुठी मे बंद करलु जब भी जी चाहे मेरा में तुझसे बाते चंद करलु रोज रोज तु आती नही... Read more
एक अरसा
चलुं खुद से मिल आऊँ , खुद से मिले एक अरसा हो गया है, आखोँ की नमीं नही जाती, गमो मे कमी नही आती, इन्हे... Read more
पतझड़ से बहार
तेरे प्यार की कस्ती में सवार हो चली हूँ में पतझड़ सी थी में अब बहार हो चली हूँ में एक नजर जो डाली मुझपर... Read more