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मैं छंदबद्ध रचनाऐं मुख्यतः दोहा,कुण्डलिया और मुक्तक विधा में लिखती हूँ, मुझे प्रकृति व मानव मन में उमड़ते भावों पर लिखना पसंद है......

All Postsकविता (3)मुक्तक (1)दोहे (1)
"मेरी बिटियाँ" तुमको पाया जब आँचल में, नव स्वप्न नयन पलते देखा...... वह अद्भुत सी अनुभूति थी, जब महकीं तुम इस आँगन में। यह ह्रदय... Read more
किस्मत के दोहे
मेरी किस्मत ले चली,अब जाने किस ओर। प्रभु हाथों में सौप दी,यह जीवन की डोर।। किस्मत में है क्या लिखा,नहीँ किसी को भान। निरर्थक हैं... Read more
पार लगाना है नोका
स्वर्ण रश्मियों संग भास्कर,दूर छितिज में ढलता जाये। मझधार खड़ी नोका लेकिन,माँझी खेता चलता जाये। दूर बहुत है अभी किनारा,अँधियारा कुछ गहराता सा, पर पार... Read more
पर्यावरण
आज विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रस्तुत मुक्तक.... दिन-दिन बढ़ता ताप धरा पर,मानव तू अबतक अंजान। यह विकास है राह पतन की,अपनी त्रुटियों को पहचान। जल-थल-वायु... Read more
मेरे जीवन के सुरभित गीत का आगाज तुम ही हो। मेरी धड़कन में बजते इन सुरों का साज तुम ही हो। तुम्ही कविता बने मेरी... Read more