Skip to content

अर्चना त्रिपाठी (एम् ए, बी एड),,जन्म नागपुर में वर्तमान निवास टनकपुर उत्तराखंड हैं।जीवन में प्रत्येक चुनौती का सामना करने के लिए माँ प्रेरणा स्तोत्र हैं।97 /98 में कुछ रचनायें महिला पत्रिका में प्रकाशित हुई उसके पश्चात पुनः लेखन कार्य 2013 में पुनः फेसबुक से शुरू किया हैं।सतत चलते रहना जीवन का उद्देश् हैं।

All Postsलघु कथा (2)
खोट (लघुकथा )
पिता और छोटे भाई का अंतिम संस्कार कर गाँव के लम्बे सफर से बदहाल लौटे रामचरण रिक्शे से उतरे ही थे कि पड़ोसी निलय आ... Read more
रस्म अदायगी
पति के मृत्यु की सुचना आई थी। साथ ही सन्देश भी,"पत्नी तो तुम ही हो, चिता को अग्नि बड़ा बेटा ही तो देता हैं।" परिवार... Read more