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मन
मन से मन के दीप जला लो मन से मन को फिर महका लो मन से मन का मेल जो होगा हो जायेगा जग उजियारा..... Read more
शाम..।
कभी कभी शाम कुछ ऐसे कहीं होती है, जैसे तुम्हारी याद आसमां में सितारे बोती है। दूर कहीं से ख्यालों का कारवाँ चला आता है,... Read more
नज़्म..
सोचता हूँ... दोनो आस्तीनों के सहारे लटके, मज़बूरियों का बैग उतार दूँ, पीठ से अपनी.. और बदल दूँ ये खाल, बदन की एक रोज़..। सोचता... Read more
गज़ल
कैसी समस्या है कि कोई हल नही निकलता क्यों अर्जुन के तीर से भी जल नही निकलता मै मुस्कुराकर ही अपने अश्क पोछ लेता हूँ... Read more
गजल..
तनहाई में वो अक्सर पास में रहता है, कुछ यादों का उजाला रात में रहता है। दो कदम चलता हूँ और थक जाता हूँ, बाबुजी... Read more
गजल..
जिन्दा रहने के लिये कौन सा शहर अच्छा है, जलता हो आसमां तो कौन सा शज़र अच्छा हैl कौवे,कोयल,पपीहा कोई भी तो महफ़ूज़ नही, बाज़... Read more