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कार्य- अध्ययन (स्नातकोत्तर)
पता- रामपुर कलाँ,सबलगढ, जिला- मुरैना(म.प्र.)/ पिनकोड-476229
मो-08827040078

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All Postsकविता (13)गज़ल/गीतिका (24)मुक्तक (29)गीत (7)दोहे (2)
राधास्तुति
*श्री राधास्तुति* श्री राधिके वृषभानुजा घनश्याम चित्त विहारिनी। सुख धाम बरसाने विराजत कीर्ति मंगल दायिनी। गोलोक स्वामिनि नित्य लीलारत रसेश्वर संगिनी। वर भक्ति श्रीपद दायिका... Read more
दर्द चिर  सोत रहा
*विधा- नवगीत* *दर्द चिर सोता रहा* ------------------------------------------------- चाहतें सहमी हुई हैं आहटों को सुन पुकारे। दर्द चिर सोता रहा अश्रु की चादर लपेटे। छुप गयी... Read more
श्री परशुराम आरती
*आरति* आरति परशुराम मुनिवर की। युध्द दक्ष कर फरसा धर की। उग्र नयन दहकत अति ज्वाला। महा तपस्वी देह विशाला। ब्रह्मचर्य के शुचि निर्झर की।... Read more
बेटी जो हँस दे तो कुदरत हँसती है।
*बेटिया* सामाजिक बगिया में, गुल सम रहती है। बेटी जो हँस दे तो, कुदरत हँसती है। चिंताऐं हर रोज जकड़ लेती मन को। पल में... Read more
नहीं क्यों आजमाया जो शिकायत है अभी बाकी।
             . *गजल* नहीं क्यों आजमाया जो शिकायत है अभी बाकी। नजर  बदनाम  है  बेशक शराफत है अभी बाकी। जुबां  खामोश  बैठी  है  यकीनन कुछ... Read more
तेरे आगोश ने दिलवर
तेरे आगोश  ने  दिलवर  मुझे  जीना  सिखाया  है। मैं   बेजां   था  मैं  वीरां  था  तूने  ही  जिलाया  है। मतीरे -इश्क  में  तेरे  मैं  रुसवा  था ... Read more
ए- इंसान तेरे दिल में
ऐ- इंसान  तेरे  दिल  में  गुमान   क्यूँ   है। हकीकत- ए- जहान  से  अनजान क्यूँ है। नश्तर  रहम  भुला  खुद  रूह पर चलाए। फिर क्यों मलाल... Read more
दीपावली
*गीतिका* जिंदगी में भरे प्यार दीपावली। हर्ष का सौम्य उपहार दीपावली। दीप बंधुत्व बन झिलमिलाते रहैं। है तिमिर द्वेष की हार दीपावली। कामना पूर्ण हों... Read more
सुधा सिंधु से तर निकाली हो जैसे
*गीतिका* सुधा सिंधु से तर निकाली हो जैसे। शरद चाँदनी तुम दिवाली हो जैसे। हृदय पुष्प आश्रय सतत पाये जाता। तुम्हीं वह उराधार डाली हो... Read more
देश भक्ति अब दिलों में झिलमिलाना चाहिए।
*गीतिका* देश में दीपक स्वदेशी जगमगाना चाहिए। लोभ से बचकर हमें यह पद उठाना चाहिए। और कितना सोए'गी आत्मा तुम्हारी रात भर। देश के लोगो... Read more
जीवन के अंश
*मुक्तक* अस्तित्व हीन रहकर भी जो, आश्रय देने वाले हैं। मरते-मरते जीवन के कुछ, अंश उन्होनें पाले हैं। गंध विखेरा करते हैं सुंदरता शुचिता शुष्मा... Read more