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शिक्षा- परास्नातक ( जैव प्रौद्योगिकी ) बी टी सी, निवास स्थान- आगरा, उत्तरप्रदेश,
लेखन विधा- कहानी लघुकथा गज़ल गीत गीतिका कविता मुक्तक छंद (दोहा, सोरठ, कुण्डलिया इत्यादि ) हाइकु सदोका वर्ण पिरामिड इत्यादि|

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All Postsकविता (15)गज़ल/गीतिका (8)मुक्तक (5)गीत (2)दोहे (1)कुण्डलिया (2)लघु कथा (4)
तेरी बेरुखी
तेरी बेरुखी _________ ""तू अपने ग़म से आज़िज है मैं तेरे ग़म से अफ़शुर्दा तू है मशग़ूल औरों में मैं तुझ बिन अश्क़ में गुम... Read more
गीतिका
2,2,2,2,2,2,2,2, पदांत किया जाता है समांत आन ------------------------------ मन बलवान किया जाता है भय का दान किया जाता है हो जीवन में घोर निराशा प्रभु... Read more
वो
वो पहली राइड मैं तुम और बाइक सिनेमा को जाते सबसे लम्बा रास्ता पकड़कर मेंहदी - चूड़ी वाले हाथ कमर को घेरे चेहरे को छूती... Read more
मेरा देश महान
शुचि गीता या बाइबल ..या हो पाक कुरान क्या विनती क्या आरती ..क्या अरदास अजान भिन्न वेश भाषा मगर ..भाव दिलों के एक मेरे देश... Read more
जाना है दूर
जाना है दूर बहुत दूर तुम्हारा हाथ थामकर जहां न नफरतें हों न टूटी हसरतें कहीं जहाँ तुम भर सको मुझे आगोश में महसूस कर... Read more
गज़ल
सभी राज हमसे छिपाए हुए हैं कभी जो थे अपने पराए हुए हैं लबों पे हमारे हंसी तुम ना देखो जमाने से' हम चोट खाए... Read more
युंही....
आँखोँ की झील मेँ डूबे सपने मेरे , बरस जाते हैँ ,तकिये के सिरहाने.. ...पलक खुलते ही दूर तुम्हेँ पाती हूँ जब .. ...रिदा की... Read more
नीति के दोहे
१. नमन करूँ माँ शारदे .. करुं विनय कर जोर। विद्या का वरदान दो..करो ज्ञान की भोर ।। २. यह नर तन तुझको मिला,रख ले... Read more
अॉड - ईवन 2
"कौन आ गया सुबह सुबह" द्वारकानाथ जी लाठी टेकते हुए दरवाजा खोलने गए और दरवाजा खुलते ही बच्चों की तरह खिलखिला उठे। दरवाजे के दूसरी... Read more
मन निर्विकार
निर्विकार निराकार एक स्वप्न साकार होता हुआ , तोड़ कर भ्रान्तियाँ , कर रहा क्रान्तियाँ , किन्तु है निशब्द , मन मेँ है भय व्यप्त... Read more
हां नारी हूँ
" मैं चपला सी तेज युक्त नभ तक धाक जमाऊँ आ सूरज, तेरी किरणों से अपना भाल सजाऊँ कभी धरा- गांभीर्य ओढकर मौन का काव्य... Read more
जीवन लीला
जीवन - लीला रहे अधूरी सुख - दुख के संयोग बिना .. प्रीति कहाँ हो पाती पूरी कुछ दिन विरह वियोग बिना.. खट्टे - मीठे... Read more
मुकरी
सब दिन पीछे पीछे डोले कभि कुछ मांगे कभि कुछ बोले डांटूं तो रो जावे नाहक ए सखी साजन? ना सखी बालक। तन से मेरे... Read more