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Am a management professional with 20 years of rich experience. Working as a softskill Trainer Writing is my passion.

All Postsकविता (15)गज़ल/गीतिका (1)हाइकु (3)
अच्छा लगता है...
इक खामोशी अक्सर फैल जाती है हम दोनों में कभी -कभी ... इक दूजे में गुम होना भी अच्छा लगता है !! तेरा इंतजार क्यों... Read more
क्या है कोई राम
क्या है कोई राम ? ? ? ***************** कितनी अहिल्या जीती जागती बनीं शिला हुई भावशून्य ! उसी वजह से... जो व्यापित सतयुग से है... Read more
मर्यादा
मर्यादा क्यों मर्यादा की... चादर ओढ़े, दिन-रात यूँ ही... घुट -मर्यादा क्यों मर्यादा की... चादर ओढ़े, दिन-रात यूँ ही... घुट -घुट के जियूँ ! क्यों... Read more
हाइकु : जर्जर काया
हाइकु जर्जर काया, इच्छाएँ खंडहर, जीने को मरे नम नयन, गालों के सूखे आँसू, पुकारें तुम्हें ! छायी बदरी, व्याकुल फिर मन, गीला तकिया !... Read more
हाइकु : जलूं न कैसे
आड़ी - तिरछी किस्मत की लकीरें समझूं कैसे !! मुठ्ठी में बन्द भविष्य है अपना बदलूं कैसे !! बादशाह हो तक़दीर के तुम पाओ खुशियाँ... Read more
मेरी कविता
चहूँ ओर सूरज के घूमें धरती वैसे ही... हर रचना का केन्द्र तुम बन जाते हो ! हर लफ्ज, हर भाव समर्पित तुमको जाने -... Read more
नवजीवन
आशंकित सी मैं थी व्याकुल... दर्द- वेदना से आकुल मिला चैन थमा सैलाब ! फिर... नवजीवन की गूंजी आवाज़ ! अजब अनुभूति नया अहसास जीवन... Read more
सपनों की महानगरी
देख शहर की ऊँची अट्टालिकाएँ, मस्ती भरा आलीशान जीवन लिए स्वप्न सुनहरे असंख्य करें गाँव से पलायन ! यथार्थ दिखे और सपने ढहें शहर में... Read more
कैसी विडम्बना...
कैसी विडम्बना ! क्यों संवेदनहीन है बना समाज,,, हादसों के शिकार दर्द से कराहते लिए टूटती-उखड़ती साँसें उम्मीद से जब माँगे मदद... वीडियो बनाने में... Read more
तेरे बिन
बिन तेरे तेरी यादों में मुमकिन है... मैं जी जाऊँ बेखबर हूँ... ये भी हो सकता है पूरी तरह बिखर जाऊँ ! ढह रहा सपनों... Read more
किस्मत
आरजू थी बस इतनी ....  बन दुल्हन तेरी मैं, तेरे घर में आऊँ   ll हँसते-खिलखिलाते, खुशियों से तेरा, घर-आँगन सजाऊँ  ll साथ तेरा पाकर, पास... Read more
मेरी बिटिया
मेरी बिटिया घुटनों बल चलती, ठुमकती - थिरकती, कभी आँचल में छिपती, कभी कान्धे पर चढ़ती ! वो नन्ही परी पंख फैलाने लगी है.... मेरी... Read more