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'ऐ ज़िन्दगी कुछ ख़ास नहीं हैं चाहतें मेरी,
थोड़ी सी मुस्कान लबों पर और थोड़ी सी पहचान दिलों में..'
पंजाब के शिक्षा विभाग में सीनीयर सैकेंडरी स्कूल में हिन्दी विषय की अध्यापिका हूँ।पंजाब विश्वविद्यालय से भूगोल विषय में आॅनर्स और एम.ए.(हिन्दी) किया है। भाषा मुझे अत्यन्त प्रिय है और हिन्दी साहित्य में रुचि है।प्रयास करती हूँ कि मेरे कारण किसी के हृदय को ठेस न पहुंचे।

All Postsकविता (8)
ख्वाहिशें
समेट लूं कुछ पल, जी लूं कुछ लम्हे कि जिंदगी तुझसे मोहब्बत हो गई है।अल्फाजों में बयां कैसे करूं,क्या चाहता है मन कि बेवजह मुस्कुराने... Read more
मन
कभी कभी तन्हाई भी खूबसूरत लगती है और कभी किसी के साथ को मन बेकरार होता है,कभी कभी मन ओढ़ लेता है नक़ाब बेसाख्ता और... Read more
हसरतें
कुछ हसरतें जिंदगी की राह में यूं शामिल हो गई, उन की ताबीर मेरे इरादों की हकीकत हो गई, क्या हुआ ग़र ख्वाहिशों को पंख... Read more
फ़ासले
लहरों की तरह आगे हम बढ़ते रहे, दायरे हमारे और भी सिमटते रहे, कभी तुम आगे निकल गए कभी हम, फासले यूं ही हमारे बढ़ते... Read more
हिन्दी
मंदिर की घंटियों सी मीठी ध्वनि है हर इंसान के ह्रदय में धीरे से उतरी है । ईश्वर से मिलने की सीढ़ी है यह प्रेम... Read more