Skip to content
स्वरचित दोहे
स्वरचित दोहे ***** छोटे मुँह की बात भी,ऊँची राह सुझाय । सीख कहीं से भी मिले, सीखो ध्यान लगाय ।। ***** औरन को अपना कहें... Read more
छंद-- मनहरण घनाक्षरी-1
छंद-- मनहरण घनाक्षरी-1 ** भँवरों ने उपवन किया है गुंजायमान कलियां चटख रही आ रहा वसंत है पीत वस्त्र ओढे धरा तितलियां इठलायें मौसम बदल... Read more