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Though a science master by education, a tax collector by work did write in Hindi n English since 1970.
Got published in print media since 1970 intermittently!
Now a retired person, pursuing my hobby as writer!

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All Postsकविता (3)हाइकु (4)
हाइकु
हाइकु जन बगीचा फूलों बना गलीचा मन है रीता 2 न कटी नाक नकटे की थी बात नेताई ठाठ 3 मंत्री था बाप बेटा कराता... Read more
हाइकु
हाइकु -- अरुण प्रदीप 1 सूरज दादा रथ पर सवार वार पे वार 2 सावन बैरी परदेशी साजन गोरी बेमन 3 एकाकी मन भगवत शरण... Read more
हाइकु
हाइकु 1 गीली गलियां भीगते तन मन आया सावन 2 मीठी ठंडक गुनगुनी सी धूप आया वसंत 3 कूकी कोयल अंबिया लदे वृक्ष सोने से... Read more
होली
होली के हुड़दंग में ,अपने कवि कलवालाल थे भंग चढ़ाये घूमते, मुंह पर भले गुलाल थोड़ी सी ही देर में, भंग की उठी तरंग सभी... Read more
बेटी :: एक विचार
बेटी :: एक विचार -- अरुण प्रदीप सृष्टि रचना के समय पुरुष ने जब देखा होगा सर्वगुण संपन्न प्रकृति को तभी उपज होगा उसमें हीन... Read more