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अजयप्रकाश सा. शुक्ला ,
निवास : मुंबई , महाराष्ट्र
पैत्रिक निवास : भदोही , उ. प्र.
शिक्षा : डिप्लोमा सिविल इंजीनियरिंग
रूचि : समाज सेवा , कविता लेखन

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All Postsकविता (11)लेख (1)
असर
नफरतो के असर दिखाई दे रहे है हर तरफ कहर दिखाई दे रहे है असर क्या हुआ जश्ने आज़ादी का लाशो के शहर दिखाई दे... Read more
दीवार
प्यार के गारे को लेकर सद्भावना के ईंट से मै दीवार बनाता हूँ ये मेरा पेशा है साहब मै मकाँ बनाता हूँ दीवारे बनाना भी... Read more
आदमी
बीत गए वो लम्हे अतीत के पन्नो पर कुछ छाप छोड़ गए कुछ मीठी यादे कुछ रिश्ते तोड़ गए यकीं होना किसी के होने का... Read more
पत्थर
गाँव से गुजरने वाले रास्ते का पत्थर जो दिखने में है सिर्फ एक पत्थर जो है किसी की याद दिलाता रोता है चिल्लाता है लोगो... Read more