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पूरा नाम-
वकील कुशवाहा "आकाश महेशपुरी"
जन्म- 20-04-1980
पेशा- शिक्षक
रुचि- काव्य लेखन
पता-
ग्राम- महेशपुर, पोस्ट- कुबेरस्थान, जनपद- कुशीनगर (उत्तर प्रदेश)

All Postsकविता (6)गज़ल/गीतिका (39)मुक्तक (7)गीत (20)अन्य (6)दोहे (1)कुण्डलिया (2)कहानी (2)घनाक्षरी (2)
जाने किस दिन हो पायेगा भ्रष्टों का अवसान
जाने किस दिन हो पायेगा भ्रष्टों का अवसान ■■■■■■■■■■■■■ ■■■ ये चाहें तो नाहक़ में ही लड़ जाएं इंसान नेता बड़े महान कि भइया नेता... Read more
कुछ घनाक्षरी छंद
कुछ घनाक्षरी छंद ★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★ छन्द जो घनाक्षरी मैं लिखने चला हूँ आज, मुझको बताएँ जरा कहाँ कहाँ दोष है। या कि मैँ हूँ मन्दबुद्धि लिख... Read more
घनाक्षरी- नारियों का नर सम मान होना चाहिए
घनाक्षरी- नारियों का नर सम मान होना चाहिए ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ नारियों का अपमान क्लेश की वजह एक, इसका तो सबको ही ज्ञान होना चाहिए। कष्ट देते... Read more
माँ
माँ -------------------- टूटी खाट पर बैठी बुढ़िया चिल्लाए जा रही थी। "बेटा रामनाथ! बड़े जोर की प्यास लगी है...गला सूखा जा रहा है...बेटे! जरा पानी... Read more
अगर सत्ता न हिल जाये तो फिर ये खून कैसा है
अगर सत्ता न हिल जाये तो फिर ये खून कैसा है ◆★◆★◆★◆★◆★◆★◆★◆★◆ हमें जो रोटियाँ वापस मिली ना तो समझ लेना अगर मुश्किल हुआ जीना... Read more
गीतिका/ ग़ज़ल- देखिये कैसा जमाना...
गीतिका/ ग़ज़ल- देखिये कैसा जमाना... ★■★■★■★■★■★■★■★■★ देखिये कैसा जमाना आ गया हर किसी को दिल दुखाना आ गया *** था वहाँ मैं मौत की आगोश... Read more
ग़ज़ल- उसे अपने दिल की सुनाता नहीं मैं
ग़ज़ल- उसे अपने दिल की सुनाता नहीं मैं ●○●○●○●○●○●○●○●○●○●○●○●○● उसे अपने दिल की सुनाता नहीं मैं कि पत्थर पे आँसू बहाता नहीं मैं हूँ मैं... Read more
कुण्डलिया- दिल्ली की वायु
कुण्डलिया- दिल्ली की वायु ●●●●●●●●●●●●●● देखो रहकर गाँव में, सुविधाओं से दूर। मिलती है ताजी हवा, हरियाली भरपूर। हरियाली भरपूर, नहीं होती बीमारी। पर दिल्ली... Read more
ग़ज़ल- जिसे देखता हूँ मैं छिपकर हमेशा
ग़ज़ल- जिसे देखता हूँ मैं छिपकर हमेशा ☆☆☆☆☆☆☆☆☆☆☆☆☆☆ जिसे देखता हूँ मैं छिपकर हमेशा कि उसका रहा दिल है पत्थर हमेशा ~~~ वो मेरा नहीं... Read more
ग़ज़ल- क़ाबिल तेरे नहीं हूँ मुझे ध्यान आ गया
ग़ज़ल- क़ाबिल तेरे नहीं हूं मुझे ध्यान आ गया 221 2121 1221 212 मफ़ऊल फ़ाइलात मुफ़ाईल फ़ाइलुन ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ अच्छा हुआ कि यार अभी ज्ञान आ... Read more
गीतिका-  जिसने खुद को है पहचाना
गीतिका- जिसने खुद को है पहचाना ◆●◆●◆●◆●◆ जिसने खुद को है पहचाना उसके आगे झुका जमाना दुनिया में तो दुख हैं लाखों फिर भी इनसे... Read more
ग़ज़ल- बंजर में जैसे फूल निकलते कभी नहीं
ग़ज़ल- ये स्वप्न... मापनी- 221 2121 1221 212 ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ ये स्वप्न मेरे' स्वप्न हैं' फलते कभी नहीं। बंजर में' जैसै' फूल निकलते कभी नहीं।। उपदेश... Read more
गीतिका को समर्पित गीतिका
गीतिका को समर्पित गीतिका ■■■■■■■■■■■■■■ दिल को' करती है' हर्षित विधा गीतिका, अब तो' सबको समर्पित विधा गीतिका। ~~~ है न चोरी का' भय ही,... Read more
ग़ज़ल- बहुत दौलत जुटा कर भी हमें सब छोड़ जाना है
ग़ज़ल- बहुत दौलत जुटा कर भी ... ____________________________ ये कलयुग है यहाँ तो पाप को मिलता ठिकाना है कि सच मैं बोल कर टूटा बड़ा... Read more
ग़ज़ल- ये स्वप्न ही हमें तो रुलाते हैं आजकल
ग़ज़ल- ये स्वप्न ही हमें तो रुलाते हैं आजकल मापनी- 221 2121 1221 212 -------------------------------------------- यूँ ही हजार स्वप्न सजाते हैं आजकल ये स्वप्न ही... Read more
गीतिका- क्या परी हैं आप जो जादू चलाया आपने
गीतिका- क्या परी हैं आप जो जादू चलाया आपने ◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ प्यार में अपना बनाकर है सताया आपने। हम अभी सोए कहाँ थे जो जगाया आपने।।... Read more
गीतिका- किसको किसको प्यार लिखें
गीतिका- किसको किसको प्यार लिखें ०००००००००००००००००००००००००००००००० कितनों ने दिल सौंप दिया है किसको किसको प्यार लिखें पर चाहत के बदले बोलो कैसे हम इनकार लिखें... Read more