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परछाइयां
झूठी परछाइयाँ.... तुम देखते हो जो छोटा आदमी.... वो छोटा नहीं है.. तुम देखते हो जो, बड़ा आदमी... वो भी बड़ा नहीं है... ये सिर्फ़... Read more
विचलित सा मन
विचलित सा मन है मेरा कभी तरु छाया के अम्बर सा कभी पतझड़ के ठूंठ सा कभी प्रसन्न मैं,कभी दुखी क्रोधित सा मैं भींगा-भांगा सा,डरा... Read more