.
Skip to content

आस

nutan agarwal

nutan agarwal

कविता

October 7, 2016

साहित्यकारों के लिए बनी इस साइट का एक बार अवलोकन जरूर करें । अगर पसंद आये तोअपनजागती काली रातें ,आखों से नीदें रूठी
घुटी घुटी सी साँसे ,अश्कों की लड़ी छूटी

रात का सन्नाटा ,और गूँजती हैं चीखें
मन में जो यादों की ,ज्वालामुखी हैं फूटी

चुभती हैं बस बदन को ,यादों की सिलवटें
जब डोर उम्मीदों की ,हाथों से जाये छूटी

भूलकर हकीकत ,जीने लगे जो सपने
अपने ही हाथ अपनी ,फिर जिंदगी हैं लूटी

मांग कर कुछ लम्हे ,जीना जो साथ चाहा
मुहं फेर कर कहा है ,लगाओ ना आस झूठी

दिखती नही किसीको .,ऐसी सजा मिली हैं
हैं जुर्म बहुत भारी, जिसकी सजा अनूठी

इक पल लगे सदी सा ,रात कैसे गुजरे
कटते नहीं हैं पल अब ,जीने की आस टूटी

नूतन’ज्योति’

Author
nutan agarwal
Recommended Posts
थोड़ा सा सुकूँ चाहिए हर शाम के बाद.
थोड़ा सा सुकूँ चाहिए हर शाम के बाद. अब तो तू आज मेरे दबे अरमान के साथ. मैं आज भी याद तुझे करता हूँ. याद... Read more
यादों के सैलाबों में ….
यादों के सैलाबों में …. शराबों में शबाबों में ख़्वाबों की किताबों में ..ज़िंदगी उलझी रही सवालों और जवाबों में ………कैद हूँ मुद्दत से मैं... Read more
यादें
शांत समुद्र.. दूर क्षितिज.. साँझ की वेला.. डूबता सूरज.. पंछी की चहक.. फूलों की महक.. बहके से कदम.. तुझ ओर सनम.. उठता है यूँ ही..... Read more
नजर के तीर
नजर के तीर तो चलाये प्यास पर बुझी नहीं संभल -संभल के वो चली तो जिन्दगी मिली नहीं जमीं मिली हरेक को यहाँ पे रहने... Read more