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Kokila Agarwal

Kokila Agarwal

गज़ल/गीतिका

September 12, 2017

२२१–१२२१–१२२१–१२२
ईर अलग है

जाना ही नहीं प्यार की तो पीर अलग है
ये दर्द बड़ा है मगर तासीर अलग है

पर्दो ने कहा था तुम्हें आंखों की ज़ुबां से
इस दिल की कसक ख्वाब की ताबीर अलग है

कहने को तो कहते ही हैं जब कहने पे आते
आंखो से कही बात की शमशीर अलग है

खाते हैं यहां कसमें भी इस पल के ही वास्ते
मजनू की लैला रांझे की वो हीर अलग है

वो तोड़ भी लायेगा अगर तारे ज़मी पर
कैसे कहें अब प्यार की जागीर अलग है

Author
Kokila Agarwal
House wife, M. A , B. Ed., Fond of Reading & Writing
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