Jun 10, 2021 · कुण्डलिया
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86 कुंडलियां मार्च 2021

[01/03, 11:06 AM] Ravi Prakash: *विलक्षण (कुंडलिया)*
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पाई फागुन में गई , सिर्फ विलक्षण बात
दिन में भी बरसे शहद , चंदा वाली रात
चंदा वाली रात , पवन संगीत सुनाता
गीत गा रहे फूल , पेड़ नवयौवन पाता
कहते रवि कविराय ,मस्त ऋतु यह कहलाई
फागुन है ऋतुराज , न समता इसकी पाई
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
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*विलक्षण* = अद्भुत ,असाधारण ,अनोखा
[01/03, 12:08 PM] Ravi Prakash: *प्रियतम (कुंडलिया)*
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मधुमय फागुन क्या करे,प्रियतम बिना उदास
मौसम की खुशबू कहाँ ,प्रिय हो अगर न पास
प्रिय हो अगर न पास , गीत फागुन कब गाता
आता है मधुमास , हृदय प्यासा रह जाता
कहते रवि कविराय , हुई ऋतुरानी की जय
आओ प्रिय सँग-साथ,मनाओ फागुन मधुमय
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल_ 99976 15451
[01/03, 3:07 PM] Ravi Prakash: *पतझड़ (कुंडलिया)*
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पतझड़ तेरी वंदना , तेरी जय – जयकार
तू नव – यौवन दे रहा , तेरा शत आभार
तेरा शत आभार , मृत्यु उत्सव बन जाता
गिरा पेड़ से पत्र , जन्म नूतन ले आता
कहते रवि कविराय,न समझो इसको गड़बड़
लाता सुखद वसंत , धन्य है पावन पतझड़
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,* बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[02/03, 11:02 AM] Ravi Prakash: *पहर (कुंडलिया)*
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होते हैं दिन-रात में , पहर आठ या याम
लगभग घंटे तीन हैं ,इनका मतलब आम
इनका मतलब आम ,दोपहर अब भी चलता
दिन का चौथा याम ,शाम जब दिन है ढलता
कहते रवि कविराय ,शब्द कब मतलब खोते
सूर्योदय – सूर्यास्त , चार पहरों में होते
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*पहर* = रात-दिन (24 घंटे) का आठवां भाग, लगभग 3 घंटे ,समय, काल
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[02/03, 11:26 AM] Ravi Prakash: *गुलाबो*
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सर्वप्रथम एक कुंडलिया प्रस्तुत है :-
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*गुलाबो (कुंडलिया)*
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नाम गुलाबो रख दिया ,पौधे का अभिराम
रटते थे एडेनियम ,अब छूटा यह काम
अब छूटा यह काम , गुलाबी रँग का प्यारा
चिकना मांसल रूप ,फूल – पत्ती का सारा
कहते रवि कविराय ,पैर सब इसके दाबो
उपवन का सरताज ,आज से नाम गुलाबो
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
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सुंदर से पौधे का नाम एडेनियम था। हमने हिंदी नाम खोजा, लेकिन नहीं मिला। एडेनियम नाम याद करने में भी मुश्किल था। हालाँकि जब हमने लॉकडाउन और क्वारंटाइन जैसे नाम रट लिए तो एडेनियम क्या चीज है ! लेकिन फिर भी लगता था मानो किसी एलोपैथिक दवाई का नाम हो। दो-चार महीने में अगर नाम भूल गए तो पता नहीं रहेगा कि एडेनियम ,एडोनियम , ओडोनियम या आयोडीननियम में से कौन सा शब्द सही है ? इसलिए हमने इसका नाम गुलाबो रख लिया । गुलाबी रंग की सुंदर चिकनी और मोटी पंखुड़ियों वाला यह फूल बरबस सबका प्रिय बन जाता है । जब पौधे का नामकरण किया है तो नामकरण – संस्कार के साथ-साथ एक कुंडलिया भी इस को समर्पित कर दी । तो आज से एडेनियम बना गुलाबो ।।
[02/03, 3:02 PM] Ravi Prakash: *दादाजी (कुंडलिया)*
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ज्यादा सोचा मत करो ,हल्के में लो बात
वरना दिल पर होएगा ,भीषण कुछ आघात
भीषण कुछ आघात ,सहज मुस्काना सीखो
कठिनाई के बीच , दाँत दिखलाते दीखो
कहते रवि कविराय , भले हो जाओ दादा
बच्चा रहना ठीक ,फिक्र मत करना ज्यादा
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[02/03, 8:28 PM] Ravi Prakash: *आँखें और मोबाइल (कुंडलिया)*
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सबकी आँखें खा रहीं ,मोबाइल से मात
लाइक और कमेंट से ,होती दिन-भर बात
होती दिन-भर बात ,वीडियो सौ-सौ चलते
आँखें दो से डेढ़ , हो गईं ढलते – ढलते
कहते रवि कविराय ,गई है सेहत कब की
सूखी – सूखी आँख ,दीखती रोगी सबकी
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[03/03, 11:10 AM] Ravi Prakash: *प्रिया (कुंडलिया)*
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पाते प्रेमी हैं प्रिया , होते प्रेम – विवाह
किंतु दिखी फिर दूसरी ,नई प्रिया की चाह
नई प्रिया की चाह ,ब्याह फिर नया रचाया
दो दिन चलता प्रेम ,पुनः मन भर-भर आया
कहते रवि कविराय , चक्र यों चलते जाते
भ्रमर कहाँ संतुष्ट , तृप्ति कब भीतर पाते
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*प्रिया* = प्रेमिका ,पत्नी ,नारी
*भ्रमर* = भौंरा ,कामुक
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[03/03, 3:04 PM] Ravi Prakash: *कृष्णप्रिया (कुंडलिया)*
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कृष्णप्रिया श्री राधिका , वंदन बारंबार
तुम में हैं केशव बसे ,तुम केशव-आधार
तुम केशव-आधार ,प्रीति की शुभ्र-प्रदाता
तुम से है संसार , भक्त तुम से फल पाता
कहते रवि कविराय ,राधिके जग आभारी
कृपा चाहता दास ,तुम्हारा कृष्णप्रिया श्री
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*रचयिता : रवि प्रकाश* बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[04/03, 10:16 AM] Ravi Prakash: *नाहर (कुंडलिया)*
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होता सौ में एक है , नर नाहर का रूप
चलता जैसे चल रहा ,किसी राज्य का भूप
किसी राज्य का भूप ,शान से आगे बढ़ता
निर्भय वीर – विचार ,शीर्ष पर लेकर चढ़ता
कहते रवि कविराय ,तुच्छ बातें कब ढोता
शहर गाँव वन-राज ,नहीं साधारण होता
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*नाहर* = शेर
*भूप* = राजा
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[04/03, 2:48 PM] Ravi Prakash: *मुफ्त वैक्सीन (कुंडलिया)*
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सरकारी में लग रही ,मुफ्त – मुफ्त वैक्सीन
साफ-सफाई सुख-भरी ,समझें इसे न हीन
समझें इसे न हीन , रोग से हमें बचाती
खर्च न कौड़ी एक , जेब से कोई जाती
कहते रवि कविराय , स्वदेशी के आभारी
अपना भारत देश , धन्य सुविधा सरकारी
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
*4 मार्च 2021 बृहस्पतिवार*
कोरोना से सुरक्षा के लिए जिला सरकारी अस्पताल में आज कोविड-19 वैक्सीन मैंने और मेरी पत्नी श्रीमती मंजुल रानी ने लगवाई । हम दोनों की ही आयु अभी कुछ महीने पहले साठ वर्ष की हुई है।
अनुभव सुखद रहा । साफ – सुथरा अस्पताल ,चमचमाता हुआ फर्स्ट -क्लास बड़ा हॉल ,वैक्सीनेशन रूम ,सुसज्जित स्टाफ ,सफेद पेंट-शर्ट तथा सफेद सलवार- कुर्ता -कोट ,मुस्तैदी से काम करने के लिए तत्पर,भीड़ कोई भी नहीं ,जाओ – नाम लिखाओ और वैक्सीन लग गई ।
..पता भी नहीं चला कि कब सुई लगी और कब नर्स ने कहा “अब आप आधे घंटे रूम में बैठिए। कोई समस्या हो तो बताइए।”
हमें तो कोई समस्या नहीं आई । जितने लोग वहाँ मिले ,सब प्रसन्न थे । सरकारी वैक्सीन से किसी को कोई दिक्कत नहीं थी। कुछ परिचित थे। कुछ से परिचय निकल आया । सुपरिचित श्री माधव गुप्ता जी वी.आई.पी .कॉलोनी से वैक्सीन लगवाने आए थे । प्रसन्न थे । एक दंपत्ति “इंदिरा कॉलोनी” से आए थे । रिटायर्ड थे । उनसे भी परिचय निकल आया । उनके समधी बाजार सर्राफा के ही रस्तोगी जी थे । कुल मिलाकर वातावरण प्रसन्नता से भरा था। जिला सरकारी अस्पताल की वैक्सीनेशन योजना आह्लादकारी है। शासन ,प्रशासन, भारतीय वैज्ञानिकों तथा अस्पताल के समस्त नर्सिंग स्टाफ का बहुत-बहुत धन्यवाद।
[04/03, 6:01 PM] Ravi Prakash: *छीना प्रभु ने (कुंडलिया)*
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छीना प्रभु ने किस लिए ,यह रहस्य की बात
देने से बढ़कर हुई , अक्सर यह सौगात
अक्सर यह सौगात , देखने में विष लगता
लगता जैसे दैव ,मनुज को आकर ठगता
कहते रवि कविराय ,जहर हँस-हँसकर पीना
होगा गहरा लाभ , मित्र प्रभु ने जो छीना
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर(उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[05/03, 11:53 AM] Ravi Prakash: *नमकास (कुंडलिया)*
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अतिशय है सबकी बुरी,क्या मिठास नमकास
जीवन में हो संतुलन ,दोनों का कुछ खास
दोनों का कुछ खास ,गृहस्थी मिलकर चलती
सिर्फ प्रीति या बैर , हमेशा रहती गलती
कहते रवि कविराय , रखो खटमिठ्ठा निर्भय
जीवन का आनंद , नहीं कह पाता अतिशय
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*नमकास* = शुभ्रा मिश्रा जी द्वारा ईजाद किया गया शब्द ,नमकीन
*प्रीति* = प्रेम ,आनंद ,संतोष
*अतिशय* = अत्यधिक
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_रचयिता : रवि प्रकाश_ ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[06/03, 9:06 AM] Ravi Prakash: *रमणी (कुंडलिया)*
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घायल करते तीर – बिन , रमणी के दो नैन
जिसको भी यह लग गए ,छीना उसका चैन
छीना उसका चैन ,भंग ऋषि का तप करते
इनसे रहते दूर , तपस्वी इनसे डरते
कहते रवि कविराय ,पैर में बजती पायल
जिसने खोले नेत्र , उसी को करती घायल
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*रमणी* = स्त्री ,विशेषतः युवती
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[06/03, 10:51 AM] Ravi Prakash: *आर्य समाज (कुंडलिया)*
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गाथा आर्य समाज की , दयानंद आभार
चार वेद पर है टिका , इसका शुभ्र विचार
इसका शुभ्र विचार ,सत्य ही सदा सुहाता
क्रांतिदूत अभिराम , यज्ञ से गहरा नाता
कहते रवि कविराय ,उच्च भारत का माथा
निराकार प्रभु रूप , हर्ष से गाता गाथा
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*रचयिता : रवि प्रकाश* बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[06/03, 11:07 AM] Ravi Prakash: *रोता नेता (कुंडलिया)*
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नेता खड़ा चुनाव में , बनने ग्राम – प्रधान
दारू की बोतल बनी ,बस उसकी पहचान
बस उसकी पहचान ,रोज सबको पिलवाता
सोच रहा था दुष्ट ,जीत – मदिरा का नाता
कहते रवि कविराय ,चतुर पव्वा ले लेता
देता मगर न वोट , अश्रु से रोता नेता
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[06/03, 11:18 AM] Ravi Prakash: *मनुज रूप में देव (कुंडलिया)*
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सोते – उठते – जागते , पाते परमानंद
जिनके मुख पर है सदा ,मधु मुस्कान अमंद
मधु मुस्कान अमंद ,सदा सबका हित गाते
लेश – मात्र भी क्रोध , न भीतर जिनके पाते
कहते रवि कविराय ,.धन्य दुर्लभ जन होते
मनुज रूप में देव , धरा पर खाते – सोते
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[06/03, 11:30 AM] Ravi Prakash: *निर्धन और धनवान (कुंडलिया)*
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निर्धन रोगी को कहो ,मनुज स्वस्थ धनवान
मुर्दा होते हैं भवन , जिंदा है इंसान
जिंदा है इंसान , प्रेम की डोर सुनहरी
शीतल होता चाँद , छाप होती पर गहरी
कहते रवि कविराय ,मिले जिससे अपनापन
उसको रखना याद , नहीं होगे फिर निर्धन
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*रचयिता : रवि प्रकाश* बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[06/03, 7:58 PM] Ravi Prakash: *वृंदावन (कुंडलिया)*
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लीला देखो कृष्ण की , जा वृंदावन धाम
हर रजकण पर है लिखा ,जहाँ कृष्ण का नाम
जहाँ कृष्ण का नाम , रास की भूमि कहाई
राधा की अनुभूति , श्वास के सँग – सँग पाई
कहते रवि कविराय , गगन विस्तृत है नीला
नदी पेड़ अभिराम , दीखते करते लीला
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[07/03, 12:46 PM] Ravi Prakash: *सीखो जीवन – राग (कुंडलिया)*
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बढ़कर है सुरलोक से ,जहाँ कांता साथ
सुखमय जीवन कर गए ,परम दिव्य मधु-हाथ
परम दिव्य मधु – हाथ ,रूप की मदिरा पीता
सुघड़ सलोनी पास , अंक में लेकर जीता
कहते रवि कविराय ,प्रेम की पोथी पढ़कर
सीखो जीवन – राग , संपदा सबसे बढ़कर

रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर उत्तर प्रदेश
मोबाइल 99976 15451
कांता = सुंदर स्त्री ,भार्या ,पत्नी
[08/03, 7:39 PM] Ravi Prakash: *महिला दिवस (कुंडलिया)*
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चाहे वनिता सर्वदा ,वाणी सद् – व्यवहार
मित्र बनें नारी – पुरुष ,जीवन का यह सार
जीवन का यह सार , सभी नित पढ़ें पढ़ाएँ
सब क्षेत्रों में दौड़ , एक से एक लगाएँ
कहते रवि कविराय , उसी को विश्व सराहे
नारी – नर में भेद , नहीं किंचित जो चाहे
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*वनिता* = स्त्री ,औरत
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*रचयिता : रवि प्रकाश* , बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[09/03, 11:45 AM] Ravi Prakash: *जीवित की पहचान (कुंडलिया)*
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ज्वाला भरते देह में , श्री संपन्न महान
मौन कहाँ जग में रहे , जो प्रगल्भ इंसान
जो प्रगल्भ इंसान , प्रश्न नित पूछा करते
सम्मुख भले पहाड़ , नहीं चढ़ने से डरते
कहते रवि कविराय , रंग हो गोरा-काला
जीवित की पहचान ,अंक में जिसके ज्वाला
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*प्रगल्भ* = वाचाल ,निडर ,चतुर
*अंक* = आलिंगन करना
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[10/03, 1:17 PM] Ravi Prakash: *व्यथा (कुंडलिया)*
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कोई रहती है व्यथा , कोई सबको कष्ट
दुर्दिन कब सबके हुए , पूरी तरह विनष्ट
पूरी तरह विनष्ट , सभी को चिंता खाती
नई समस्या एक ,रोज सबके घर आती
कहते रवि कविराय ,वस्तु प्रिय सबने खोई
दुखी जगत में लोग , रोग सबको है कोई
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*व्यथा* = दुख ,चिंता ,कष्ट पीड़ा ,वेदना
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा रामपुर उत्तर प्रदेश मोबाइल 99976 15451
[11/03, 10:41 AM] Ravi Prakash: *शिव (कुंडलिया)*
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गाते जिनको देवगण ,गाता सकल समाज
चंद्रभाल कैलाशपति ,अखिल विश्व पर राज
अखिल विश्व पर राज ,जटा में गंगा लाए
सहा जाह्नवी वेग , कंठ ले विष हर्षाए
कहते रवि कविराय , आप को भोले भाते
जिनके मन निष्काम ,धन्य हो शिव को गाते
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*चंद्रभाल* = जिनके मस्तक पर चंद्रमा हो ,शिव
*कैलाशपति* = कैलाश पर्वत पर रहने वाले स्वामी ,शिव
*जाह्नवी* = गंगा
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[11/03, 5:20 PM] Ravi Prakash: [1]
*राधा जी और बाँसुरी (कुंडलिया)*
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राधा ने ली बाँसुरी , कान्हा जी से छीन
बोलीं कुछ बातें करो ,क्या बंसी में लीन
क्या बंसी में लीन ,अधर से लगीं बजाने
अब कान्हा बेचैन ,लाड़ के खुले खजाने
कहते रवि कविराय ,तत्व है आधा-आधा
आधे में श्री श्याम , शेष आधे में राधा
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[2]
*निधिवन मे रास (कुंडलिया)*
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निधिवन में अब भी बसे, युगल दिव्य सरकार
आते प्रतिदिन रात्रि को , करते नृत्य-विहार
करते नृत्य – विहार , रास की गाथा गाते
जग में सबसे उच्च , प्रेम होता बतलाते
कहते रवि कविराय ,सुधा रस पाते जन-जन
धन्य राधिका-कृष्ण ,धन्य है श्री श्री निधि वन
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[ 3 ]
*वृंदावन में समाधि हरिदास जी (कुंडलिया)*
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निधिवन में हरिदास जी ,चिर निद्रा में लीन
तानसेन के गुरु प्रवर ,तन – मन से स्वाधीन
तन – मन से स्वाधीन , दिव्य संगीत सुनाते
ईश्वर को यह भेंट , सिर्फ ईश्वर – हित गाते
कहते रवि कविराय ,छड़ी – मिट्टी का बर्तन
दो पावन पहचान ,.देख लो जाकर निधिवन
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[ 4 ]
*बाँके बिहारी मंदिर ,वृंदावन (कुंडलिया)*
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बाँके बिहारी की श्री , शोभा अपरंपार
भीड़ दिखी हर गेट पर ,दिखते भक्त अपार
दिखते भक्त अपार ,कठिन दर्शन कर पाना
जिस पर कृपा-प्रसाद ,धन्य है उसका आना
कहते रवि कविराय ,सौम्य छवि पल-पल झाँके
टेके जम कर पाँव , दिखे ठाकुर जी बांके
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 9997615451*
[12/03, 10:43 AM] Ravi Prakash: *चिंतन (कुंडलिया)*
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चिंतन में है क्या धरा , नेता करते जाप
जनता बेचारी सुने , ढोलक पर बस थाप
ढोलक पर बस थाप , दूर के ढोल सुहाने
वादे सब बेकार , बाद में सिर्फ बहाने
कहते रवि कविराय ,देह की दो-दो चितवन
एक निठल्ला काम , दूसरा सुंदर चिंतन

*थाप* = तबले ,मृदंग ,ढोलक आदि पर
पूरे पंजे से किया जाने वाला आघात
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99 97 61 5451
[13/03, 9:41 AM] Ravi Prakash: *नूतन और पुरातन (कुंडलिया)*
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सभी पुरातन ढह रहे , नूतन जग निर्माण
पीले पत्ते झड़ गए , देखो अब निष्प्राण
देखो अब निष्प्राण ,नियति का खेल पुराना
जब बीते सौ साल ,देह को सबकी जाना
कहते रवि कविराय ,काल का चक्र सनातन
कल के दृश्य नवीन ,आज के सभी पुरातन

*नूतन* = नवीन ,नया ,अभिनव
*पुरातन* = पुराना

*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[13/03, 11:57 AM] Ravi Prakash: *तीन कुंडलियाँ*
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( *1* )
*मत हारो (कुंडलिया)*
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हारो तो उठकर. करो , दूने श्रम से काम
जब तक लक्ष्य मिले नहीं ,करो नहीं आराम
करो नहीं आराम , आलसी हारा करते
कर्मठ का तप देख ,दूत यम के भी डरते
कहते रवि .कविराय ,यत्न से भाग्य सँवारो
रखे हाथ पर हाथ , जिंदगी से मत हारो

( *2* )
*असफलता (कुंडलिया)*
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खिलती उसकी जिंदगी , पाई जिसने हार
असफलता में है छिपी , संघर्षों की धार
संघर्षों की धार , युद्ध लड़ना आ जाता
कठिनाई के बीच , धैर्य से जुड़ता नाता
कहते रवि कविराय ,हार से नव-गति मिलती
चलता जो दिन-रात ,नियति उसकी है खिलती

(3)
*अपयश (कुंडलिया)*
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अपयश हार मुसीबतें , समझो गहरे मित्र
सीखो कुछ इनसे सबक ,यह जीवन के चित्र
यह जीवन के चित्र , रंग भरना सिखलाते
जीवन है संघर्ष , राज की बात बताते
कहते रवि कविराय ,मनुज का चलता कब वश
कभी मिला सम्मान ,कभी मिलता है अपयश
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[13/03, 12:05 PM] Ravi Prakash: *निर्वाचन-संग्राम (कुंडलिया)*
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भागो – दौड़ो हो रहा , निर्वाचन – संग्राम
युद्ध छिड़ा है अब खुला ,दिखता सबको आम
दिखता सबको आम ,किसी की गर्दन काटी
डूबी कोई नाव , सूँघता कोई माटी
कहते रवि कविराय ,सँभल जाओ सब जागो
लोकतंत्र में मल्ल , मुष्टिका दौड़ो – भागो
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*मुष्टिका* = मारने के लिए बांधी गई मुट्ठी,
मुक्का ,घूँसा
*मल्ल* = कुश्ती लड़ने वाला पहलवान
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[13/03, 12:13 PM] Ravi Prakash: *ढोंगी नेता (कुंडलिया)*
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नेता लोग नहा रहे ,.नदिया में अविराम
शायद काटें वोट कुछ ,बन जाए कुछ काम
बन जाए कुछ काम ,लोभ का ढोंगी पहरा
धर्म ग्रंथ का पाठ , लेप चंदन का गहरा
कहते रवि कविराय , रूप धर सारे लेता
नाटक में उस्ताद , धर्म-प्रिय बनता नेता
🌱🌱☘️🟢🟢☘️🌱🌱
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
मोबाइल 9997 615451
[13/03, 4:30 PM] Ravi Prakash: *नारी (कुंडलिया)*
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नारी कब पीछे रही ,नर से लेती होड़
ईश्वर की रचना यही , सच पूछो बेजोड़
सच पूछो बेजोड़ , शक्ति – रूपा कहलाई
कोमल मन मृदु गात ,सौम्यता मुख पर छाई
कहते रवि कविराय , ईंट होती है भारी
पुरुष रह गए दंग ,देख श्रम करती नारी
🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃
*रचयिता :रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा* रामपुर (उत्तर प्रदेश )
मोबाइल 99976 15451
[13/03, 5:12 PM] Ravi Prakash: *नारी (कुंडलिया)*
🟨🟨🟡🟡🟡🟣🟣🍂
नारी कब पीछे रही ,नर से लेती होड़
ईश्वर की रचना यही , सच पूछो बेजोड़
सच पूछो बेजोड़ , शक्ति – रूपा कहलाई
कोमल मन मृदु गात ,सौम्यता मुख पर छाई
कहते रवि कविराय , ईंट ढोती है भारी
पुरुष रह गए दंग ,देख श्रम करती नारी
🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃
*रचयिता :रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा* रामपुर (उत्तर प्रदेश )
मोबाइल 99976 15451
[14/03, 8:15 AM] Ravi Prakash: *कोयल कूकी (कुंडलिया)*
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कूकी कोयल पेड़ पर , आमों के है बौर
मस्त महीना वर्ष भर , ऐसा कहीं न और
ऐसा कहीं न और ,हवा चलती बल-खाती
साँसो में मधु-गंध ,व्योम से हर क्षण आती
कहते रवि कविराय ,नजर जिसकी भी चूकी
नए मिले कब पेड़ , नहीं फिर कोयल कूकी
🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁
*बौर* = आम के पेड़ पर फागुन में लगने वाला
फूलों का गुच्छा जो बाद में फल में बदल जाता है
*कूकी* = कोयल की मधुर आवाज

*रचयिता : रवि प्रकाश* , बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश )
मोबाइल 99976 15451
[14/03, 10:23 AM] Ravi Prakash: *त्राहि-त्राहि भगवान( कुंडलिया )*
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करने कौरव-दल लगा ,हरण-चीर अपमान
द्रुपद-सुता ने तब कहा ,त्राहि-त्राहि भगवान
त्राहि-त्राहि भगवान ,लाज हे कृष्ण बचाओ
फँसी हुई मँझधार ,दौड़ कर केशव आओ
कहते रवि कविराय , प्राण भक्तों में भरने
दौड़े आए कृष्ण , योजना निष्फल करने
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*त्राहि* = रक्षा करना ,बचाना
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*रचयिता : रवि प्रकाश* , बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[14/03, 2:58 PM] Ravi Prakash: *फूलों का त्यौहार ( कुंडलिया )*
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लगता जैसे मन रहा ,फूलों का त्यौहार
हँसते उपवन से हुआ , धरती का श्रृंगार
धरती का श्रृंगार , पेड़ – पौधे हैं गाते
ऋतु वसंत का नृत्य , देख पक्षी हर्षाते
कहते रवि कविराय ,फागुनी मौसम ठगता
स्वर्ग-लोक का दृश्य ,धरा पर उतरा लगता
🍂🍂🍂🍂🍂🍃🍃🍃🍃
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[15/03, 3:24 PM] Ravi Prakash: *”आजकाशब्द” पर कुंडलिया का दोहरा शतक*
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28 अगस्त 2020 को हमने “आजकाशब्द” पर कुंडलिया लिखना आरंभ किया था । अमर उजाला फेसबुक-पेज शब्द देता गया ,हम प्रतिदिन कुंडलिया उस शब्द का प्रयोग करते हुए लिखते रहे । अमर उजाला के अनूठे आयोजन की प्रेरणा से ही यह संभव हुआ । अमर उजाला को धन्यवाद ।
*आजकाशब्द* पर 200वीं कुंडलिया इस प्रकार है :-
*पतझड़ और वसंत (हास्य कुंडलिया)*
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नेता जी से प्रश्न था ,पतझड़ और वसंत
कब इसकी शुरुआत है ,कब है इसका अंत
कब है इसका अंत ,कहा जब सत्ता पाते
समझो शुरू वसंत ,पीत-प्यारे दिन आते
कहते रवि कविराय ,पराजय सब ले लेता
पतझड़ मतलब हार , अश्रु टपकाते नेता
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*पीत* = पीला
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 9997 615451
[15/03, 3:26 PM] Ravi Prakash: *होते फागुन हम अगर (कुंडलिया)*
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होते फागुन हम अगर ,बसता हम में फाग
मुस्काते फिर हर समय ,मन में रखते राग
मन में रखते राग ,प्रेममय होकर जीते
बनते कोयल-मोर ,वायु से मधु को पीते
कहते रवि कविराय ,सदा मस्ती में खोते
दिखते बारहमास ,देख सबको खुश होते
🌻🌻🌻🟡🟡🌺🌷🌷🌷
*रचयिता : रवि प्रकाश* , बाजार सर्राफा_
रामपुर( उत्तर प्रदेश )
मोबाइल 99976 15451
[16/03, 11:01 AM] Ravi Prakash: *आजकाशब्द* पर यह 201 वीं कुंडलिया है । दो शतक पूरे हो चुके हैं ।
प्रस्तुत है आज के दिए गए शब्द *विविध* का प्रयोग करते हुए रची गई कुंडलिया
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*धीर (कुंडलिया)*
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पाते हैं सुख-दुख सभी ,जग में विविध प्रकार
जैसा जिसको मिल गया , वह वैसा भंडार
वह वैसा भंडार , धीर सुख-दुख सम सहते
सुख आए या दुःख , एक – से भीतर रहते
कहते रवि कविराय , लाभ में कब बौराते
जब आती है हानि , न रोते उनको पाते
🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻
*धीर* = धैर्य रखना ,मन की स्थिरता
*विविध* = अनेक तरह का
🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[16/03, 3:15 PM] Ravi Prakash: *तीन कुंडलियाँ*
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( *1* )
*मत हारो (कुंडलिया)*
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हारो तो उठकर. करो , दूने श्रम से काम
जब तक लक्ष्य मिले नहीं ,करो नहीं आराम
करो नहीं आराम , आलसी हारा करते
कर्मठ का तप देख ,दूत यम के भी डरते
कहते रवि .कविराय ,यत्न से भाग्य सँवारो
रखे हाथ पर हाथ , जिंदगी से मत हारो

( *2* )
*असफलता (कुंडलिया)*
🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁
खिलती उसकी जिंदगी , पाई जिसने हार
असफलता में है छिपी , संघर्षों की धार
संघर्षों की धार , युद्ध लड़ना आ जाता
कठिनाई के बीच , धैर्य से जुड़ता नाता
कहते रवि कविराय ,हार से नव-गति मिलती
चलता जो दिन-रात ,नियति उसकी है खिलती

(3)
*अपयश (कुंडलिया)*
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अपयश हार मुसीबतें , समझो गहरे मित्र
सीखो कुछ इनसे सबक ,यह जीवन के चित्र
यह जीवन के चित्र , रंग भरना सिखलाते
जीवन है संघर्ष , राज की बात बताते
कहते रवि कविराय ,मनुज का चलता कब वश
कभी मिला सम्मान ,कभी मिलता है अपयश
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[16/03, 3:26 PM] Ravi Prakash: *बुढ़ापा (कुंडलिया)*
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ढोना पड़ता देह को , बूढ़ा तन लाचार
गाड़ी खिंचना कब सरल ,पिचहत्तर के पार
पिचहत्तर के पार , साठ से होता ढीला
जैसे सूखा पेड़ , पेड़ का पत्ता पीला
कहते रवि कविराय , बुढ़ापा मतलब रोना
भारी लगती साँस , बोझ लगता है ढोना
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[16/03, 4:51 PM] Ravi Prakash: प्रसन्नतां या न गताभिषेकतस्तथा न मम्ले वनवासदुःखतः।
मुखाम्बुजश्री रघुनन्दनस्य मे सदास्तु सा मंजुलमंगलप्रदा॥
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*भावार्थ*
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*राज्याभिषेक वनवास (कुंडलिया)*
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पाया राजतिलक मगर ,कब प्रसन्न रघुनाथ
वन जाने पर कब दिखे ,दुखी हृदय के साथ
दुखी हृदय के साथ ,एक-सा सुख दुख माना
मुख – मंडल का भाव ,तृप्त जाना – पहचाना
कहते रवि कविराय , न अंतर मुख पर आया
वरदायी अभिराम ,कमल – सा खिलता पाया
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*कुंडलिया के रचयिता : रवि प्रकाश*
*बाजार सर्राफा ,रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
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[17/03, 9:55 AM] Ravi Prakash: *मौत (कुंडलिया)*
🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃
जग में सबके घर हुए ,कभी शोक-संतप्त
कौन यहाँ रहता सुखी ,खुशियों ही में तृप्त
खुशियों ही में तृप्त ,मौत सब के घर आती
मानव है निरूपाय ,भूख यम की खा जाती
कहते रवि कविराय ,मृत्यु बढ़ कर दो डग में
लेती देह दबोच , न बचता कोई जग में
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*संतप्त* = अच्छी तरह से खूब तपा हुआ ,परम दुखी
*जग* = संसार
*डग* = कदम
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[17/03, 10:48 PM] Ravi Prakash: *तन में बंदी कौन (कुंडलिया)*
🌻🌸🌻🌸🌻🌸🌻🌸
भागे दुनिया हर कहीं ,गली देस परदेस
दौड़े जग में इस तरह ,जैसे घोड़ा रेस
जैसे घोड़ा रेस ,न भीतर लेकिन झाँका
तन में बंदी कौन ,ठहर थोड़ा कब आँका
कहते रवि कविराय ,अधमुँदे रहे न जागे
फुर्सत मिली न एक ,अनवरत दौड़े-भागे
🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃
*रचयिता: रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[17/03, 10:58 PM] Ravi Prakash: *पीछे-पीछे मौत (कुंडलिया)*
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आगे – पीछे हैं लगे , सब लाइन में लोग
कोई पहले जा चुका ,सुख-दुख सारे भोग
सुख-दुख सारे भोग ,किसी को रुककर जाना
चला अनवरत चक्र ,समय जो लिखा बिताना
कहते रवि कविराय , मनुज हैं सभी अभागे
पीछे – पीछे मौत , जिंदगी आगे – आगे
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[18/03, 8:25 AM] Ravi Prakash: *बुढ़ापा (कुंडलिया)*
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भरते मुख में लाड़ जो ,देते अपना प्यार
विमुख बुढ़ापे में दिखा ,उनको ही परिवार
उनको ही परिवार , अकेलापन है खाता
वृद्धाश्रम में दौर ,आखिरी किसको भाता
कहते रवि कविराय ,समय से पहले मरते
चुक जाता उत्साह ,साँस की किस्तें भरते
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*विमुख* = उदासीन ,जिसने मुख मोड़ लिया हो
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[19/03, 8:42 AM] Ravi Prakash: *चाणक्य (कुंडलिया)*
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बाँधी थी अपनी शिखा ,किया नंद का नाश
मतलब है चाणक्य का ,निर्मल शुभ्र प्रकाश
निर्मल शुभ्र प्रकाश , सबल भारत-निर्माता
सादा जीवन उच्च , विचारों से शुभ नाता
कहते रवि कविराय ,राष्ट्र – हित लाए आँधी
मुट्ठी अपनी हिंद , देश की कसकर बाँधी
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*शिखा* = सिर पर बालों की चोटी ,चुटिया
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_रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा_
_रामपुर (उत्तर प्रदेश)_
_मोबाइल 99976 15451_
[19/03, 11:03 AM] Ravi Prakash: *मन में राम (कुंडलिया)*
🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃
आँकें कपड़ों से नहीं ,किसका शुभ्र विचार
अक्सर कपड़े रँग लिए ,उच्छृंखल व्यवहार
उच्छृंखल व्यवहार ,ध्यान कपड़े कब आते
जिनके मन में राम , दुपट्टा कब रँगवाते
कहते रवि कविराय , हृदय में अपने झाँकें
देखें खुद को आप , करें मूल्यांकन आँकें
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*रचयिता : रवि प्रकाश* , बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[19/03, 12:02 PM] Ravi Prakash: *होली के रंग ,हाथी दादा के संग*
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*होली : तीन कुंडलियाँ*
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*(1)चुहिया काँपी (कुंडलिया)*
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हाथी दादा चल दिए , भरे सूँड में रंग
चुहिया काँपी लो हुआ ,आज रंग में भंग
आज रंग में भंग ,कहा मुझ पर मत डालो
पहलवान गजराज , रंग से मुझे बचा लो
कहते रवि कविराय ,कहा हाथी ने साथी !
जबरन कभी न रंग ,डालता सुन लो हाथी
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*(2) महा – पिचकारी (कुंडलिया)*
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टोली होली की बनी ,हाथी के सँग खास
बोले पिचकारी – महा , देखो मेरे पास
देखो मेरे पास , सूँड फव्वारे जैसी
करती है बौछार , न समझो ऐसी – वैसी
कहते रवि कविराय ,धूम से मनती होली
हाथी राजा संग , सजी है जिस की टोली
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*(3) पिचकारी – बाजार (कुंडलिया)*
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पिचकारी से था सजा ,होली का बाजार
पिचकारी को बेचने , हर दुकान तैयार
हर दुकान तैयार , कहा हाथी से ले लो
होली के दिन साथ ,हाथ में लेकर खेलो
कहते रवि कविराय ,कहा गज ने आभारी
एक सूँड के साथ ,चलेंगी दो पिचकारी
🌺🌺🌺🌿🌿🌿🪴🪴
*रचयिता : रवि प्रकाश , बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[19/03, 1:23 PM] Ravi Prakash: *हुआ पतझड़ वरदाई (कुंडलिया)*
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आई कोंपल हो गया ,नया पेड़ का गात
लगता ज्यों रजनी गई ,सुरभित हुआ प्रभात
सुरभित हुआ प्रभात ,रूप नव-यौवन छाया
कोमल – कोमल पत्र , लग रही नूतन-काया
कहते रवि कविराय , हुआ पतझड़ वरदाई
पुनर्जन्म-ऋतु खास , इसी के कारण आई
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*कोंपल*=पेड़ में से निकलने वाला नया पत्ता
*गात* = शरीर
*रजनी* = रात
*प्रभात* = सुबह
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[20/03, 9:03 AM] Ravi Prakash: *चिड़िया (कुंडलिया)*
🪴🌿🍃🍂🌿🍃🍂🪴
फुदकी चिड़िया बोलती ,वाणी मस्त-महीन
ऐसे चीं – चीं कर रही , लगा भजन में लीन
लगा भजन में लीन , जरा – सा चुगती दाना
थोड़ी – सी बस भूख , तृप्त जल्दी हो जाना
कहते रवि कविराय ,बनाती कविता खुद की
मनमौजी अभिराम , उड़ी फिर बैठी फुदकी
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*लीन* = किसी में समा जाना
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*रचयिता : रवि प्रकाश, बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[20/03, 12:18 PM] Ravi Prakash: *खाती सबको मौत (कुंडलिया)*
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आती है सब के यहाँ ,खाती सबको मौत
रखती सबसे शत्रुता ,जीवन की यह सौत
जीवन की यह सौत ,बुढ़ापा इससे डरता
बच्चे और जवान , प्राण सबके यह हरता
कहते रवि कविराय ,उदासी छा-छा जाती
जिस घर आती मौत , रुलाई केवल आती
🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍂🍂
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[20/03, 8:02 PM] Ravi Prakash: *बहाने कैसे – कैसे (कुंडलिया)*
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वैसे तो सबको मिले , जीने के सौ साल
लेकिन कब किसको पता ,खाए आकर काल
खाए आकर काल ,आयु कब देखा करता
जिस पर पड़ी कुदृष्टि , वही तत्क्षण है मरता
कहते रवि कविराय , बहाने कैसे – कैसे
ऐसे कोई मृत्यु , मृत्यु है कोई वैसे
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
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[21/03, 11:20 AM] Ravi Prakash: *मदिरापान (कुंडलिया)*
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पीने वाले पर चढ़ा , जादू मदिरापान
जिसने पी ली फिर कहाँ ,उसे मान-अपमान
उसे मान – अपमान , रसातल जाकर रहता
अनुचित है जो बात ,बेसुधी में वह कहता
कहते रवि कविराय , जाम में जीने वाले
खोते सुंदर स्वास्थ्य , संपदा पीने वाले
°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°
*रसातल* = पृथ्वी के नीचे छठा लोक
जो पाताल से थोड़ा ऊपर है ,
बर्बादी होना
*जाम* = शराब पीने का प्याला
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*रचयिता : रवि प्रकाश, बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
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[22/03, 4:40 PM] Ravi Prakash: *सूर्य (कुंडलिया)*
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जैसे उगते – डूबते , रवि की रंगत एक
जीवन-वृत्त समान शुभ ,रखते मानव नेक
रखते मानव नेक , मैल कब आने देते
अतिशय हर्ष न शोक ,चित्त पर अपने लेते
कहते रवि कविराय , जियो तो जीवन ऐसे
सूर्योदय सूर्यास्त , एक – सा रवि का जैसे
°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°
*रवि = सूर्य*
“°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
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[23/03, 11:51 AM] Ravi Prakash: *शहादत (कुंडलिया)*
🍂🌿🍃🍂🌿🍃🍂🌿🍃
फहराया ध्वज हिंद का ,आजादी परिणाम
फाँसी पर जो चढ़ गए ,सौ-सौ उन्हें प्रणाम
सौ – सौ उन्हें प्रणाम , जवानी देने वाले
धन्य शहादत – वृत्ति , ले चले जो मतवाले
कहते रवि कविराय ,गीत अभिमानी गाया
अर्पित करके देह , देश का ध्वज फहराया
🍂🍂🍂🍂🍂🍂
*शहादत* = बलिदान
🍃🍃🍃🍃🍃🍃
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
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[23/03, 4:33 PM] Ravi Prakash: *मुँह खोला (कुंडलिया)*
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मुँह खोला जब चोर ने ,धमकी का अंदाज
थाना नतमस्तक दिखा ,बिना शर्म बिन लाज
बिना शर्म बिन लाज ,न भैया मुंह को खोलो
रोया थानेदार , तरस खाओ मत बोलो
कहते रवि कविराय , सभी ने दाँव टटोला
सब हैं आधे मौन , अर्ध सब ने मुंह खोला
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
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[23/03, 4:41 PM] Ravi Prakash: *अनहोनी (कुंडलिया)*
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अनहोनी करते प्रभो ,रखो मनुज विश्वास
दुर्बल के बल राम की ,छोड़ो कभी न आस
छोड़ो कभी न आस ,काल का चक्र घुमाते
बानक सब अनुरूप ,भक्त के सहज बनाते
कहते रवि कविराय , न रहती सूरत रोनी
रचते अचरज – दृश्य , प्रभो करते अनहोनी
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*बानक* = परिस्थितियाँ ,परिदृश्य
°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
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[24/03, 3:57 PM] Ravi Prakash: *समय की धारा कहती (कुंडलिया)*
🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃
रहती कब रजनी सदा ,आता निश्चित भोर
छँटती है भ्रम की घटा ,चाहे जितनी घोर
चाहे जितनी घोर , लोभ के पाँव न टिकते
आती है सद्बुद्धि , सदा ईमान न बिकते
कहते रवि कविराय ,समय की धारा कहती
जो लौटा घर शाम , प्रात की भूल न रहती
🌿🍂🌿🍂🌿🍂🌿🍂🌿🍂
*रजनी* = रात
*भोर* = सुबह
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[24/03, 10:40 PM] Ravi Prakash: *हैदराबाद – विजय (कुंडलिया)*
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कट्टर एक निजाम था , राज्य हैदराबाद
विलय रियासत कब किया ,आजादी के बाद
आजादी के बाद , हिंद ने करी चढ़ाई
यह पटेल का शौर्य , दुंदुभी विजय बजाई
कहते रवि कविराय ,लौह-मति जूझे बढ़कर
जिंदाबाद पटेल , गिरा औंधे मुंह कट्टर
■■■■■■■■■■■■■■■■
*दुंदुभी* = नगाड़ा ,डुगडुगी या ढोल जैसा वाद्ययंत्र
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[25/03, 11:26 AM] Ravi Prakash: *फागुन की पूर्णिमा [कुंडलिया]*
🟡🟡🟡🟥🟣🟡🟡🟡
पूरनमासी चंद्रमा , फागुन का शुभ मास
बिखरा धरती पर रजत ,हुआ शुभ्र आभास
हुआ शुभ्र आभास , गगन में मस्ती छाई
नाचे गाए लोग , अग्नि पावन मुस्काई
कहते रवि कविराय , दूर सब हुई उदासी
रंगों का त्यौहार , फागुनी पूर्णमासी
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*रजत* = चांदी
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा* *रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[26/03, 9:46 AM] Ravi Prakash: *चुनाव – अभियान (कुंडलिया)*
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नोटों की ले गड्डियाँ , जगते बीते रैन
खड़े चुनावों में हुए , उनको अब कब चैन
उनको अब कब चैन ,रात-दिन भागे-फिरते
मतदाता के हाथ , जोड़ पैरों में गिरते
कहते रवि कविराय ,सिर्फ चाहत वोटों की
चाहे हो जो खर्च , नहीं चिंता नोटों की
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*रैन* = रात
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[26/03, 10:45 AM] Ravi Prakash: *दूर से कहिए होली (कुंडलिया)*
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होली पर दीखे जहाँ ,प्रिय के गोरे गाल
प्रेमी- मन कहने लगा ,रँग दे आज गुलाल
रँग दे आज गुलाल ,आज परिपाटी प्यारी
तभी ढक लिया मास्क ,मुई ने लेकर भारी
कहते रवि कविराय ,चतुर नारी फिर बोली
दो गज रखिए दूर , दूर से कहिए होली
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश )*
_मोबाइल 99976 15451_
[26/03, 2:44 PM] Ravi Prakash: *खिले लिली के फूल (कुंडलिया)*
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आया फागुन मदभरा ,खिले लिली के फूल
जिसने देखे क्या कभी , पाया इनको भूल
पाया इनको भूल ,नयन में बस – बस जाते
श्वेत गुलाबी रंग , दीखते हैं मुस्काते
कहते रवि कविराय , रूप का जादू छाया
आकर्षित हो मस्त , घूमता भँवरा आया
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
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[26/03, 4:37 PM] Ravi Prakash: *साठ वर्ष की आयु ( कुंडलिया )*
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साठ बरस की उम्र है , जीना चालिस और
किसे पता इस बीच में , आएँ कितने दौर
आएँ कितने दौर , बुढ़ापा रंग दिखाए
बीमारी से जंग , जीत पाए ना पाए
कहते रवि कविराय ,नियति कब किस के बस की
कुछ को मिलती उम्र ,भाग्य से साठ बरस की
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
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[27/03, 10:27 AM] Ravi Prakash: *फागुन का मधुमास (कुंडलिया)*
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मस्ताता मृदु आ गया ,फागुन का मधुमास
फूल लिली के खिल उठे ,आभूषण-आभास
आभूषण – आभास , सुरीली कोयल गाती
सरगम का ज्यों गान ,वायु हर समय बजाती
कहते रवि कविराय , रूप सब पर छा जाता
रहता नहीं उदास , मनुज मन से मस्ताता
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*मृदु* = कोमल
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[27/03, 1:44 PM] Ravi Prakash: आजकल तो खैर कोरोना चल रहा है, लेकिन पिछले वर्षों में घरों के अंदर होली खेलने के बाद रंग फर्श से हटाना एक मुश्किल काम हो जाता था। घंटों बाल्टी में पानी भर- भर कर फर्श धोते थे। रंग फिर भी नहीं हट पाता था । इसी प्रसंग को ध्यान में रखकर एक कुंडलिया लिखी गई है। प्रस्तुत है:-
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*होली खेलने के बाद घर की धुलाई (कुंडलिया)*
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होली खेली रँग गया ,घर आँगन दालान
रंग छुटाएँ किस तरह , परेशान इंसान
परेशान इंसान , हुई सौ बार धुलाई
पक्के थे पर दाग , कहाँ रंगत जा पाई
कहते रवि कविराय , दूर से टालो टोली
कहो गली या पार्क ,खेलने जाओ होली
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश )*
*मोबाइल 99976 15451*
[27/03, 3:05 PM] Ravi Prakash: *होली – मिलन – मिलाप (कुंडलिया)*
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होली पर फिर आ गया , कोरोना चुपचाप
कैसे अब किस भाँति हो ,होली-मिलन-मिलाप
होली – मिलन – मिलाप , रखें दो गज की दूरी
फिर कैसे हो बंधु ,साध मिलने की पूरी
कहते रवि कविराय ,करो सब हँसी – ठिठोली
खुद पर डालो रंग , कहो खुद से शुभ होली
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*रचयिता : रवि प्रकाश, बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[27/03, 7:15 PM] Ravi Prakash: *होली के समय कोरोना (कुंडलिया)*
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आता उत्सव चुलबुला , एक साल में एक
करें प्रतीक्षा सर्वजन , शहर – गाँव प्रत्येक
शहर – गाँव प्रत्येक ,रोग अति घातक आया
पिचकारी रँग छोड़ , विश्व जिससे थर्राया
कहते रवि कविराय , बहुत जी है घबराता
होली ही के वक्त , मुआ कोरोना आता
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[28/03, 10:00 AM] Ravi Prakash: *रोली (कुंडलिया)*
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रोली का मतलब सुनो , हल्दी – चूना चूर्ण
इससे ही लगता तिलक , माथे पर संपूर्ण
माथे पर संपूर्ण , सदा शुभ भाव जगाता
यज्ञ हवन सत्कार , कार्य में लाया जाता
कहते रवि कविराय , रंग की पुड़िया घोली
मिलती अब कब शुद्ध ,नाम की मिलती रोली
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[28/03, 10:46 AM] Ravi Prakash: *काश ! ऐसी हो होली (कुंडलिया)*
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होली पर बरसात हो , बरसें ऐसे रंग
नीले पीले बैंजनी , रह जाएँ सब दंग
रह जाएँ सब दंग ,पेड़ पर गुँझियाँ आएँ
तोड़ें भर – भर ढेर ,पेट भर – भर कर खाएँ
कहते रवि कविराय ,कन्हैया करो ठिठोली
उड़ें हवा में लोग , मनाएँ नभ में होली
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[28/03, 11:34 AM] Ravi Prakash: *होली के रंग,कोरोना के संग (कुंडलिया)*
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होली तो आई मगर , कोरोना के साथ
गले लगाने से बचो ,छूना तनिक न हाथ
छूना तनिक न हाथ ,नहीं कोरोना लाना
अच्छी यह तरकीब ,नैन से नैन लड़ाना
कहते रवि कविराय ,भले हो सँग में टोली
रहना छह फिट दूर ,मनाओ ऐसे होली
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[29/03, 10:14 AM] Ravi Prakash: *हुआ चैत्र आरंभ (कुंडलिया)*
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पहने धरती खुशनुमा ,मधुर हरित परिधान
भीतर – बाहर गा रहे , सब पक्षी – इंसान
सब पक्षी – इंसान , मस्त मौसम की माया
पेड़ों पर नव – पत्र ,रूप नव – यौवन छाया
कहते रवि कविराय ,पुष्प खिलते ज्यों गहने
हुआ चैत्र आरंभ , सुगंधित कपड़े पहने
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*हरित* = हरा रंग
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
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[29/03, 3:31 PM] Ravi Prakash: *मासूम गुलाल (कुंडलिया)*
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कहने भर को था मुआ ,बस मासूम गुलाल
नटखट रंग बसा हुआ , उसमें पक्का लाल
उसमें पक्का लाल ,रंग फिर कब छुट पाया
जाने था वह कौन , मिलाकर जो ले आया
कहते रवि कविराय , प्यार पड़ते हैं सहने
कुछ अपनों का वार ,वाह भ्राता क्या कहने
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*भ्राता* = बंधु ,भाई ,घनिष्ठ मित्र
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
रामपुर( उत्तर प्रदेश )
मोबाइल 99976 15451
[30/03, 10:00 AM] Ravi Prakash: *दो मीत (कुंडलिया)*
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चलते जीवन में मधुर ,लिए हास दो मीत
उड़ते नभ में दूर तक , गाते सुंदर गीत
गाते सुंदर गीत , देह दो एक कहाते
डाल हाथ में हाथ , गृहस्थी सुखद बसाते
कहते रवि कविराय ,हाथ रह जाते मलते
डँस लेता जब काल ,एक को चलते-चलते
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*मीत* = मित्र,साथी ,दोस्त
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[30/03, 4:35 PM] Ravi Prakash: *मात्रा (कुंडलिया)*
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मात्रा पर समझो टिकी , कविता दवा दवात
स्याही थोड़ी कम मिली ,पानी-सी फिर बात
पानी-सी फिर बात , दवाई गिन कर खाते
मात्रा घट – बढ़ एक ,काव्य दोषी हो जाते
कहते रवि कविराय , ठहर कर करिए यात्रा
दुखदाई परिणाम , जरा यदि ज्यादा मात्रा
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*दवात* = छोटा-सा वह बर्तन जिसमें लिखने की स्याही पुराने जमाने में रखी जाती थी और कलम की नोक को उस दवात में भरी हुई स्याही में डुबो-डुबोकर लिखा जाता था।
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[30/03, 5:04 PM] Ravi Prakash: *मिलना गले – मिलाप (कुंडलिया)*
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परिपाटी जाती रही ,मिलना गले – मिलाप
कोरोना का लग गया ,इनको घातक शाप
इनको घातक शाप , लोग मिलते कतराते
पहने मुख पर मास्क ,दूर छह फुट रुक जाते
कहते रवि कविराय , पतँग सुत्तल से काटी
मिलना – जुलना बंद , भूलिएगा परिपाटी
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451

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Ravi Prakash
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