Jun 10, 2021 · कुण्डलिया
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77 कुंडलियां फरवरी 2021

[01/02, 9:27 AM] Ravi Prakash: *साँझ (कुंडलिया)*
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किसका मन कब तक रहा ,चंचल हीरा – राँझ
ढलती सबकी ही सुबह ,आती सबकी साँझ
आती सबकी साँझ , देह बूढ़ी हो जाती
आँखें चलतीं मंद , साँस रह – रह सुस्ताती
कहते रवि कविराय ,लिखा युग जैसा जिसका
बीता – बीती बात ,एक – सा युग कब किसका
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*साँझ* = सूर्यास्त का समय ,शाम

*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[02/02, 11:11 AM] Ravi Prakash: *धनधाम ( हास्य कुंडलिया )*
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चाहत प्रभु जी है यही , सदा करें आराम
बिना किए कुछ काम ही ,बढ़े रोज धनधाम
बढ़े रोज धनधाम , फाड़कर छप्पर देना
लगे न उस पर टैक्स ,समूचे हर-हर लेना
कहते रवि कविराय , कमाने से दो राहत
सौ करोड़ बैलेंस , बैंक में हो यह चाहत
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*धनधाम* = धन-दौलत और घर-बार
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[02/02, 11:47 AM] Ravi Prakash: *दाँत ( कुंडलिया )*
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सोने से पहले करें , दाँतों को ब्रश रोज
परम पुरातन है मधुर ,अमृतमय यह खोज
अमृतमय यह खोज ,साफ दाँतों को रखते
पावन दिव्य सुगंध ,रात – भर सुंदर चखते
कहते रवि कविराय ,बचाओ यह खोने से
रखो दाँत मजबूत , रजत – जैसे सोने – से
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[02/02, 8:36 PM] Ravi Prakash: *जीवन (कुंडलिया)*
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जीना खुलकर चाहिए ,सबको ही स्वच्छंद
बोलो कब अच्छे लगे , किसे द्वार सब बंद
किसे द्वार सब बंद ,न खिड़की रोशनदानें
भीतर की आवाज , शत्रु जैसे सब जानें
कहते रवि कविराय ,घूँट क्या कड़वे पीना
जिओ ठीक उसी भाँति ,चाहते जैसे जीना
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[03/02, 10:08 AM] Ravi Prakash: *कतार (कुंडलिया)*
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जाने को जग से लगी , सबकी एक कतार
अपनी बारी जा रहे , सभी छोड़ घर-बार
सभी छोड़ घर-बार , सुनिश्चित सबको जाना
यही सनातन सत्य , सदा जाना – पहचाना
कहते रवि कविराय ,मरण-तिथि है आने को
बूढ़ा तन तैयार , किंतु है कब जाने को

*कतार* = पंक्ति ,क्रम ,सिलसिला

*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[06/02, 7:55 AM] Ravi Prakash: अंगार (कुंडलिया)
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जलता जब तक कोयला ,कहलाता अंगार
राख बना बुझकर यही ,खोता सब श्रंगार
खोता सब श्रंगार , अग्नि से जीवन चलता
जहाँ मिटी सब आग ,हाथ बूढ़ा तन मलता
कहते रवि कविराय ,विधाता अक्सर छलता
बुझ जाता अंगार ,अचानक था जो जलता

रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर, उत्तर प्रदेश
मोबाइल 99976 15451
[08/02, 12:26 AM] Ravi Prakash: *अधूरा प्रेम (कुंडलिया)*
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भरकर अंजलि प्यार की ,पाते जो इंसान
जीवन उनका स्वर्णमय ,मधुमय श्रेष्ठ महान
मधुमय श्रेष्ठ महान , प्यार अमृत कहलाता
धन्य-धन्य वह भाग्य ,प्रीति का प्याला पाता
कहते रवि कविराय ,जन्म लेते फिर मरकर
प्रेमी करते प्रेम , अधूरा अंजलि भरकर

*अंजलि* = दोनों हाथों की हथेलियों को जोड़कर बनने वाला गड्ढा

*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश))
मोबाइल 99976 15451
[08/02, 10:18 AM] Ravi Prakash: *पंथ ( कुंडलिया )*
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चलने से ही मिल सके ,सबको सुंदर पंथ
जीवन-भर चाहे पढ़ो ,सिखलाते कब ग्रंथ
सिखलाते कब ग्रंथ ,रटे से अनुभव ज्यादा
भर – भर भारी बोझ ,कहाँ ज्ञानी ने लादा
कहते रवि कविराय ,मुक्त दो जीवन पलने
निकलो हँसकर रोज ,नई राहों पर चलने
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*पंथ* = राह ,पथ ,रास्ता ,मार्ग

*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[08/02, 12:00 PM] Ravi Prakash: *लाल गुलाब (कुंडलिया)*
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रोज मनाओ रोज – डे , देखो लाल गुलाब
टहनी पर जब तक लगा , होता कहाँ खराब
होता कहाँ खराब , गुलाबी पीले काले
कुछ में भरी सुगंध ,बिना कुछ खुशबू – वाले
कहते रवि कविराय ,चित्र खुशनुमा बनाओ
घर में उगे गुलाब , रोज – डे रोज मनाओ

*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[09/02, 10:19 AM] Ravi Prakash: *मौजीराम (कुंडलिया)*
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सीधे – सादे कब जँचे , जँचते कुंचित केश
मजा गृहस्थी का वहीं , जिसमें किंचित क्लेश
जिसमें किंचित क्लेश ,गाल पर तिल इतराता
कुछ मीठा – नमकीन , धन्य जो चखता जाता
कहते रवि कविराय , रहो मत चिंता लादे
उत्तम मौजीराम , जी रहे सीधे – सादे

*कुंचित* = घुंघराले (बाल) ,छल्लेदार टेढ़ा ,घुमावदार

*रचयिता : रवि प्रकाश* , बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[09/02, 11:17 AM] Ravi Prakash: *पीला गुलाब (कुंडलिया)*
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पीला – पीला आ गया ,लड़ने आज गुलाब
बोला क्या मुझ में कमी ,दे दो सही जवाब
दे दो सही जवाब ,लाल ही क्यों इतराता
जहाँ देखिए शान , झाड़ने यह आ जाता
कहते रवि कविराय , पीत सबसे रंगीला
मन में अगर वसंत , रंग उसका है पीला
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*रचयिता:रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर( उत्तर प्रदेश )
मोबाइल 999761 5451
[10/02, 12:14 AM] Ravi Prakash: *गोवा यात्रा : 13 कुंडलियाँ*
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
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🌷 *(1) गोवा चलें* 🌷
आओ प्रिय गोवा चलें ,सागर तट के पास
मैं तुममें मुझ में करो ,तुम खुद का आभास
तुम खुद का आभास ,सिंधु की फैली राहें
जितनी दिखें विराट , एक दूजे को चाहें
कहते रवि कविराय , गीत लहरों सँग गाओ
रहो सदा स्वच्छंद , घूमने गोवा आओ

🌻 *(2) सागर और लहर* 🌻
सागर तट पर जब दिखा ,मस्ती का अंदाज
मैंने पूछा सिंधु से , क्या है इसका राज
क्या है इसका राज , सिंधु ने यह बतलाया
लहरें मेरी मुक्त , व्यक्त करती हैं काया
कहते रवि कविराय , लहर हर खुद में गागर
सागर का प्रतिबिंब , समझिए इसको सागर

🌸 *(3) वायुयान की सैर* 🌸
आओ करते हैं चलें , वायुयान की सैर
ऊपर से धरती लगे , लोक एक ज्यों गैर
लोक एक ज्यों गैर , बादलों से उठ जाते
नीचे बादल यान , उच्च की सैर कराते
कहते रवि कविराय ,सात लोकों तक जाओ
बादल सारे चीर , घूम कर वापस आओ

🌹 *(4) सागर* 🌹
सागर को केवल पता , होता क्या तूफान
किसको कहते ज्वार हैं ,आते तुंग समान
आते तुंग समान , नदी सागर से छोटी
झील और तालाब , खेलते कच्ची गोटी
कहते रवि कविराय ,शेष सब समझो गागर
जल अथाह भंडार ,नील – नभ होता सागर
*तुंग* =पहाड़

🍁 *(5) लहर में पाँव भिगोएँ* 🍁
तट पर सागर के चलें ,सुनें सिंधु का शोर
मैं देखूंँ तुमको प्रिये , तुम प्रिय मेरी ओर
तुम प्रिय मेरी ओर ,लहर में पाँव भिगोएँ
नयन – नयन में डाल , एक दूजे में खोएँ
कहते रवि कविराय ,नेह की भाषा रटकर
हम पाएँ उत्कर्ष , सिंधु के पावन तट पर

🏵️ *(6)मादक अपरंपार* 🏵️
आकर गोवा में जिओ ,मस्ती का संसार
शहद हवा में ज्यों घुला ,मादक अपरंपार
मादक अपरंपार , मधुर रंगीन अदाएँ
घने नारियल वृक्ष , लहर सागर की पाएँ
कहते रवि कविराय ,सुहाना मौसम पाकर
पहनो नेकर रोज , स्वर्ग – गोवा में आकर

🍃🍂 *(7) सागर तट पर*🍂🍃
परिचय सागर ने दिया ,कर के चरण पखार
बोला बंधु पधारिए , स्वागत मेरे द्वार
स्वागत मेरे द्वार , कहा हमने बस काफी
आलिंगन का अर्थ , नहीं पाएँगे माफी
कहते रवि कविराय ,जिंदगी का होता क्षय
बलवानों के साथ , मित्रता दुष्कर परिचय

🪴 *(8)लहर* 🪴
बहती जैसे है नदी , सदा – सदा अविराम
वैसे ही क्षण-भर कहाँ ,सागर को आराम
सागर को आराम , हमेशा नर्तन करता
घुमा-घुमा कर पेट , सिंधु आलस सब हरता
कहते रवि कविराय ,लहर सागर की कहती
मैं सागर की साँस , जिंदगी बनकर बहती

✳️ *(9)देखा गोवा* ✳️
देखा गोवा हर जगह ,खपरैलों का भाव
संरक्षण प्राचीन का , भवनों में है चाव
भवनों में है चाव ,मनुज हरियाली गाते
वृक्ष नारियल बहुल , हर जगह पाए जाते
कहते रवि कविराय ,सिंधु है जीवन-रेखा
मस्ती का अंदाज , अनूठा तुझ में देखा

🌸 *(10)कैसीनो में लोग* 🌸
आते पैसा जीतने , कैसीनो में लोग
गोवा में अद्भुत दिखा , किस्मत का संयोग
किस्मत का संयोग ,अंक पर दाँव लगाते
हर चक्कर के साथ ,जुआरी खोते – पाते
कहते रवि कविराय ,स्वप्न – नगरी में जाते
सैलानी स्थानीय , रात मस्ती में आते

🌻 *(11)सिंधु गरजता* 🌻
सिंधु गरजता हर समय , नदी बह रही शांत
अपने-अपने भाव हैं , दोनों कभी न क्लांत
दोनों कभी न क्लांत , एक को शोर मचाना
दूजे को प्रिय मौन , सत्य जाना – पहचाना
कहते रवि कविराय ,सुकोमल पर चुप सजता
उच्छ्रंखल बलवान , रात – दिन सिंधु गरजता

*क्लांत* = थका हुआ

🟣 🟡 *(12) लहरें पहरेदार* 🟡
पहरेदारी कर रहीं , लहरें चारों ओर
सागर में घुसने नहीं , पाए कोई चोर
पाए कोई चोर , शोर हर समय मचातीं
सदा सजग मुस्तैद , घूमती पाई जातीं
कहते रवि कविराय ,जागना हर क्षण जारी
पाओ इनसे ज्ञान , सीख लो पहरेदारी

🟣 *(13)आओ कैसीनो चलें* 🟣
व्याख्या जीवन की यही ,जीवन है टकसाल
आओ कैसीनो चलें , खेलें कोई चाल
खेलें कोई चाल , जीतकर बाजी आएँ
कुर्सी पर फिर बैठ ,अंक पर दाँव लगाएँ
कहते रवि कविराय ,जिंदगी की यह आख्या
जुआ मस्तियाँ मौज ,मधुर साँसों की व्याख्या

*टकसाल* = जहाँ सिक्के ढलते हैं
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[10/02, 6:08 AM] Ravi Prakash: *आओ कैसीनो चलें (कुंडलिया)*
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व्याख्या जीवन की यही ,जीवन है टकसाल
आओ कैसीनो चलें , खेलें कोई चाल
खेलें कोई चाल , जीतकर बाजी आएँ
कुर्सी पर फिर बैठ , अंक पर दाँव लगाएँ
कहते रवि कविराय ,जिंदगी की यह आख्या
जुआ मस्तियाँ मौज ,मधुर साँसों की व्याख्या

टकसाल = जहाँ सिक्के ढलते हैं

रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर( उत्तर प्रदेश )
मोबाइल 99976 15451
[10/02, 6:11 AM] Ravi Prakash: *नत ( कुंडलिया )*
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आती है जिनको कला ,नत होने का ज्ञान
उड़ते नभ में इस तरह ,जैसे उड़े विमान
जैसे उड़े विमान , स्वयं हल्के हो पाते
मिलता है सम्मान , मान जो देते जाते
कहते रवि कविराय ,ख्याति उनकी ही छाती
उन्हें पूजता लोक , नम्रता जिनको आती

रचयिता : रवि प्रकाश, बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश )
मोबाइल 9997615451
[10/02, 1:11 PM] Ravi Prakash: *कुटीर (कुंडलिया)*
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ढाबा कब ढाबा रहा ,अब यह रेस्टोरेंट
एसी वाले हो गए , महंगे – महंगे टेंट
महंगे – महंगे टेंट , बंगला कुटी कहाता
रखते नाम कुटीर , गिना महलों में जाता
कहते रवि कविराय ,नाम के हैं कुछ बाबा
चलता धंधा और , बोर्ड पर लिखते ढाबा

*रचयिता : रवि प्रकाश* , बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[11/02, 11:04 AM] Ravi Prakash: *कुटिल (कुंडलिया)*
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देते जग को कष्ट ही ,जिनका कुटिल स्वभाव
कैसे क्षति पहुँचे किसे ,रहता मन में चाव
रहता मन में चाव , जगत – दुख में सुख पाते
जितनी है सामर्थ्य , सभी को सिर्फ रुलाते
कहते रवि कविराय , मजे दुख देकर लेते
जब तक अंतिम साँस , दुष्ट पीड़ा बस देते

*कुटिल* = मन में कपट व द्वेष रखने वाला

*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[11/02, 3:10 PM] Ravi Prakash: *मायका (कुंडलिया)*
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आता जीवन – भर सदा , रहा मायका याद
इस – सा आकर्षण कहाँ , इस-जैसा उन्माद
इस – जैसा उन्माद ,पिता – माँ मधुर कहानी
बचपन का वह दौर ,मस्त ज्यों बहता पानी
कहते रवि कविराय , बुढ़ापा चाहे छाता
जहाँ हुई शुरुआत ,याद घर रह – रह आता
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*मायका* = विवाहित नारी के माता-पिता का घर
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[11/02, 6:30 PM] Ravi Prakash: *जीवन – मृत्यु (कुंडलिया)*
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होता ज्यों-ज्यों वृद्ध तन ,त्यों-त्यों दिखती मौत
जीवन से रिश्ता जुड़ा , लगता जैसे सौत
लगता जैसे सौत , मरण सच असली लगता
घर दुकान धन-धान्य ,सत्य जाना यह ठगता
कहते रवि कविराय , कभी हँसता मन रोता
क्या जीने का अर्थ , मृत्यु से क्या कुछ होता

*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[11/02, 9:31 PM] Ravi Prakash: *साकी (कुंडलिया)*
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गिनती के सबको मिले ,मस्ती के दिन चार
सोचो कितने जी चुके , लेकर खुशी अपार
लेकर खुशी अपार , बचे अब कितने बाकी
मदिरा कितनी शेष , जरा बतलाओ साकी
कहते रवि कविराय ,मौज सब ही की छिनती
साकी के पास हिसाब ,चषक बाकी की गिनती

*साकी* = मदिरालय में प्याला भर कर देने वाली
*चषक* = प्याला

*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[12/02, 10:35 AM] Ravi Prakash: *क्षेम (कुंडलिया)*
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आया फिर से लौटकर , पहले वाला प्रेम
पूछ रहे मिलकर गले , सब आपस में क्षेम
सब आपस में क्षेम , बहुत दिन बीते भाई
किसने देखी शक्ल ,किसी ने कब दिखलाई
कहते रवि कविराय , नया जीवन मुस्काया
गया अभी था मित्र , दूसरा शायद आया

*क्षेम* = कुशल-मंगल ,सुख-चैन

*रचयिता :रवि प्रकाश* , बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[12/02, 12:45 PM] Ravi Prakash: *चित्र पुराना (कुंडलिया)*
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चित्र पुराना जब दिखा ,पहचाने जब लोग
कुछ तो थे जीवित अभी ,कुछ से हुआ वियोग
कुछ से हुआ वियोग ,चित्र बन कर रह जाते
कल तक जिनके साथ ,बोलते हँसते – गाते
कहते रवि कविराय ,जगत से आना – जाना
समझाता चिर – सत्य , एक बस चित्र पुराना

*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[13/02, 10:32 AM] Ravi Prakash: *खग (कुंडलिया)*
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खग में उड़ने की कला ,देखा गज बलवान
जल में रहती मीन को , तैराकी का ज्ञान
तैराकी का ज्ञान , फूल फल पौधे सजते
तबला और सितार , मधुर स्वर में है बजते
कहते रवि कविराय ,मनुज मत रोओ जग में
तुलना सबकी व्यर्थ ,दोष – गुण होते खग में

*खग* = आकाश में उड़ने वाले पक्षी
*गज* = हाथी
*मीन* = मछली

*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[14/02, 11:47 AM] Ravi Prakash: *वैलेंटाइन (कुंडलिया)*
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वैलेंटाइन चुन लिया ,जिसने जिसको आज
चट मँगनी शादी करो ,जोड़ो सुखद समाज
जोड़ो सुखद समाज ,निमंत्रण घर-घर बाँटो
नाते – रिश्तेदार , नाम सूची के छाँटो
कहते रवि कविराय , बुलाने भेजो नाइन
बाँधे मंगल – बेल , कहे है वैलेंटाइन

*नाइन* = विवाह आदि शुभ कार्यों में रिश्तेदारों के घरों पर बुलावा /सूचना देने तथा द्वार पर फूल-पत्रों की बेल बाँधने वाली स्त्री

*रचयिता : रवि प्रकाश ,* बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[14/02, 1:18 PM] Ravi Prakash: *पैसा (हास्य कुंडलिया)*
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पैसा जिस पर आ गया , उसकी ऊँची नाक
पैसा अब जिस पर नहीं ,उसकी इज्जत खाक
उसकी इज्जत खाक , जगत मनुहार लगाता
पुष्प – हार सम्मान , खींच कर पैसा लाता
कहते रवि कविराय , भले हो चाहे जैसा
मुख्य – अतिथि अध्यक्ष ,पास में जिसके पैसा
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*मनुहार* = रूठे व्यक्ति को मनाने के लिए की जाने वाली मीठी बातें ,खुशामद
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[14/02, 5:44 PM] Ravi Prakash: *पुलवामा की याद (कुंडलिया)*
🙏🙏🇮🇳🇮🇳🙏🙏🇮🇳🇮🇳
आती चौदह फरवरी ,पुलवामा की याद
बदला बालाकोट का ,था फिर उसके बाद
था फिर उसके बाद ,वीरता की ऋतु आई
कायर हुआ धड़ाम ,देश ने ली अँगड़ाई
कहते रवि कविराय ,गीत सेना के गाती
अपना है कश्मीर ,गंध केसर की आती
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[15/02, 11:21 AM] Ravi Prakash: *उन्माद (कुंडलिया)*
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छाए जब कोई नशा , होता है उन्माद
धुन के पक्के को कहाँ ,रहता बाकी याद
रहता बाकी याद ,दृष्टि में लक्ष्य समाया
सदा उसी के बीच ,बैठता – चलता पाया
कहते रवि कविराय ,धन्य पागल कहलाए
मिलती तब ही सिद्धि ,मेघ बेसुध के छाए

*उन्माद = अत्यधिक प्रेम ,पागलपन ,सनक*

*रचयिता : रवि प्रकाश* , *बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 9997615451*
[15/02, 9:19 PM] Ravi Prakash: *कुत्ते (तीन कुंडलियाँ)*
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🍃🍃 ( *1* )🍃🍃
कुत्ते मिलते हर गली , चौराहे हर मोड़
बदमाशों – से लग रहे , गुंडों के गठजोड़
गुंडों के गठजोड़ , दैत्य – से दिखने वाले
दिखते रस्ता रोक , रात में भूरे – काले
कहते रवि कविराय , पैर डर से हैं हिलते
काँपे पूर्ण शरीर , दुष्ट जब कुत्ते मिलते

🍃🍃(2)🍃🍃
कुत्ते बोले क्यों भई , कहाँ चल दिए आप
बीच सड़क पर मिल गए ,सड़क रहे जब नाप
सड़क रहे जब नाप ,सात थे चलते – फिरते
हम रह गए अवाक , देख कुत्तों में घिरते
कहते रवि कविराय , आग के लगते शोले
समझो हम यमदूत , डरा कर कुत्ते बोले

🍃🍃 (3)🍃🍃
रोकी साँसें जब दिखे ,हमको कुत्ते सात
मरने – जीने की लगा ,आई है अब बात
आई है अब बात ,चले हम डरते – डरते
घबराए बेचैन , बचे ज्यों मरते – मरते
कहते रवि कविराय ,सुनी सब टोका-टोकी
सुन-सुन कर भौंकार ,,साँस रस्ते भर रोकी
🌺🌺🌸🌺🌸🌸🌺🌸🌺🌺
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[16/02, 10:45 PM] Ravi Prakash: *स्वागत हे ऋतुराज (कुंडलिया)*
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पिचकारी भर कर किया ,स्वागत हे ऋतुराज
कामदेव आए सदन , हृदय – शुष्क में आज
हृदय – शुष्क में आज , शुरू लो देखो होली
सखियों की मदमस्त , दीखती सुंदर टोली
कहते रवि कविराय , लाज का घूँघट नारी
चली छोड़ उद्यान , हाथ में ले पिचकारी
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[16/02, 11:33 PM] Ravi Prakash: *ऋतुराज वसंत (कुंडलिया)*
🟡🟡🌻🌻🍁🍁🟡🟡
मस्ती में हैं झूमते ,क्षिति जल गगन समीर
गायन को उत्सुक हुए ,प्राणी सभी अधीर
प्राणी सभी अधीर ,राग – रंगों की माया
शुभ ऋतुराज वसंत ,गंध मादक ले छाया
कहते रवि कविराय ,नगर हर बस्ती-बस्ती
मौसम का अवदान ,देह में भरती मस्ती

*क्षिति* = पृथ्वी
*अवदान* = योगदान ,सहयोग ,अच्छा काम

*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[17/02, 11:38 AM] Ravi Prakash: *झालर ( कुंडलिया )*
🍁🍃🍁🍃🟡🍃🍁🍂🍃🍁
लटकी झालर रह गई ,मूल्यों की बस आज
तार – तार वरना हुआ , पूरा आज समाज
पूरा आज समाज , कौन नैतिकता गाता
पद – पैसे का शोर , दीखने में बस आता
कहते रवि कविराय , बात रिश्वत पर अटकी
सच की तख्ती व्यर्थ ,एक झालर-सी लटकी
🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃
झालर = किसी चीज के किनारे पर शोभा के लिए लटकी हुई किनारी
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[17/02, 8:55 PM] Ravi Prakash: *हे लक्ष्मी हे सरस्वती (कुंडलिया)*
🍁🟡🍁🌻🌺🌻🍁🟡🍁
वर दें माता लक्ष्मी , सरस्वती वरदान
जिएँ सदा जीवन लिए ,सात्विक शुभ्र महान
सात्विक शुभ्र महान ,उच्च मूल्यों को गाएँ
कभी न मन में पाप ,लोभ किंचित भी छाएँ
कहते रवि कविराय , पारदर्शी मन कर दें
भीतर – बाहर एक , जिंदगी हो माँ वर दें
🍂🍂🍂🍂🌸🌸
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[17/02, 10:35 PM] Ravi Prakash: *सस्ते के वह ठाठ (कुंडलिया)*
🍃🍂🍃🍂🟡🍂🍃🍂🍃
जाने कौन कहाँ गए ,सस्ते के वह ठाठ
मिले गोलगप्पे सुखद ,एक रुपै के आठ
एक रुपै के आठ ,चार टिकिया आलू की
दहीबड़े की प्लेट ,अठन्नी में कालू की
कहते रवि कविराय ,भले माने मत माने
सवा रुपै परसाद , बड़ा हर कोई जाने
🌻🌻🌸🌸🌺🌺🌻🌻
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[18/02, 10:12 AM] Ravi Prakash: *दैहिक (कुंडलिया)*
🍃🍂🍃🍂🌸🌸🍂🍃🍂🍃
बसते हैं संसार में , सब में दैहिक ताप
फँसते लोग स्वभाववश ,इनमें अपने आप
इनमें अपने आप ,सृष्टि का नियम निराला
काम क्रोध मद मोह ,लोभ का रँग है काला
कहते रवि कविराय ,पेंच जो मन के कसते
कभी न कलुषित भाव ,देह में उनके बसते

*दैहिक* = देह संबंधी

*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[18/02, 12:39 PM] Ravi Prakash: *झटपट का दौर ( कुंडलिया )*
🍂🍂🍂🍁🌸🍃🍃🍃
भरते थे घर में कभी , गेहूँ चावल दाल
अब लाते आधा किलो ,किलो दो किलो माल
किलो दो किलो माल , सभी थैली में आता
पापड़ और अचार , कौन अब घर के खाता
कहते रवि कविराय , फोन पर आर्डर करते
आता झटपट भोज, पेट .सब उससे भरते
🌸🍃🍂🍃🍁🍃🍂🍃🌸
रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा ( उत्तर प्रदेश ) मोबाइल 99976 15451
[19/02, 10:51 AM] Ravi Prakash: *प्राची (कुंडलिया)*
🟡🟡🌻🌻🏵️🌻🌻🟡🟡
प्राची की मंजुल दिशा , प्राची से दिनमान
प्राची से सूरज उगा , प्राची स्वर्ग – समान
प्राची स्वर्ग – समान , किरण पहली है आती
खिड़की-घर का द्वार ,सुखद स्वर्णिम कहलाती
कहते रवि कविराय ,विवश पश्चिम बस याची
देख रहा अभिराम , मनोहर सुंदर प्राची

*प्राची* = पूर्व दिशा ,पूरब
*मंजुल* = सुंदर
*दिनमान* = दिन की अवधि

*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[19/02, 2:45 PM] Ravi Prakash: *छत्रपति शिवाजी (कुंडलिया)*
धन्य शिवाजी छत्रपति ,वीर शौर्य-अवतार
जीता जिनका बघनखा ,हारी कुटिल कटार
हारी कुटिल कटार ,देश संस्कृति के गायक
जीते रण से दुर्ग , मराठा – हिंदू नायक
कहते रवि कविराय , जीतते हारी बाजी
जीजाबाई धन्य ,राष्ट्रसुत धन्य शिवाजी
*रचयिता : रवि प्रकाश बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश )*
*मोबाइल 99976 15451*
*🍃छत्रपति शिवाजी🍃* (19 फरवरी 1630 – 3 अप्रैल 1680) // 1674 में राज्याभिषेक /वीर मराठा राष्ट्र नायक/ स्वतंत्रता आंदोलन की संपूर्ण अवधि में प्रेरणा के स्रोत / बीजापुर के सुल्तान ने अफजल खान को संधि के नाम पर भेजा ,उसने छिपी कटार से मारना चाहा ,शिवाजी ने कूटनीति से अपना छिपा हुआ “बघनखा” निकालकर आत्मरक्षा की / सरकारी कामकाज में फारसी के स्थान पर मराठी और संस्कृत का प्रयोग शुरू किया/ औरंगजेब के कट्टर साम्राज्य का दृढ़ता पूर्वक मुकाबला किया।
[20/02, 10:47 AM] Ravi Prakash: *धवल (कुंडलिया)*
🍃🍂🍃🟡🌻🟡🍃🍂🍃
करता मन तुमको धवल ,वंदन सौ-सौ बार
तुमसे ही है चल रहा , यह सारा संसार
यह सारा संसार , उच्च मूल्यों को गाते
जहाँ तुम्हारा राज , कलुष पाए कब जाते
कहते रवि कविराय , रूप वासंती झरता
तुम पावन युग – दूत ,प्रशंसा दिल है करता

*धवल* = श्वेत ,उजला ,निर्मल ,सुंदर

*रचयिता : रवि प्रकाश* बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[20/02, 4:16 PM] Ravi Prakash: *पैसा (कुंडलिया)*
🍂🍃🍂🟡🟡🟡🍂🍃🍂
पैसा है सबसे बड़ा , छोटे सब संबंध
हर रिश्ते में घुस गई ,पैसे की बस गंध
पैसे की बस गंध , कहाँ की रिश्तेदारी
नफा और नुकसान ,बड़ा है छोटी यारी
कहते रवि कविराय ,न समझो ऐसा-वैसा
बेटा भाई बाप , भतीजा चाचा पैसा

*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[20/02, 4:22 PM] Ravi Prakash: *तीर हाथों से छूटा (कुंडलिया)*
🏹🏹🏹🟡🟡🏹🏹🏹
छूटा तीर न आ सका ,वापस कभी कमान
हाथों को मलता रहा ,विवश दिखा इंसान
विवश दिखा इंसान भाग्य सब रंग दिखाता
हो जाती वह बात ,सोच मानव कब पाता
कहते रवि कविराय ,हृदय इस कारण टूटा
गलती थी गंभीर , तीर हाथों से छूटा
“””””””””””'”””””””””””””””””””””””””””””””””
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[21/02, 8:53 AM] Ravi Prakash: *क्षोभ (कुंडलिया)*
🍃🍂🍁🍃🍂🍁🍃🍂🍁
आता तो है दो घड़ी ,मन में पापी लोभ
युगों-युगों परिणाम है ,इसका भारी क्षोभ
इसका भारी क्षोभ ,हृदय में जन पछताते
घोर नर्क की आग ,भीतरी हर क्षण पाते
कहते रवि कविराय ,दुखी मन हो-हो जाता
साँस-साँस में अश्रु ,निकल बाहर को आता

*क्षोभ* = व्याकुलता ,पछतावा

*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[21/02, 2:12 PM] Ravi Prakash: *मित्र तुम्हारा कृष्ण (कुंडलिया)*
🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂
होते हैं अक्सर सुने ,चमत्कार शत बार
प्रभु की लीला वाकई ,होती अपरंपार
होती अपरंपार , नहीं हिम्मत को हारो
बाजी लोगे जीत , नाथ हे नाथ पुकारो
कहते रवि कविराय ,व्यर्थ आँसू से रोते
मित्र तुम्हारा कृष्ण ,रंक क्यों उसके होते
“””””””””””””””””'””””””””””””””””””””””””
*रंक* = निर्धन ,गरीब
“”””””””””””””””””””””‘””””””””””'””””””””””
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[22/02, 10:03 AM] Ravi Prakash: *सिंधु (कुंडलिया)*
🌸🍁🌸🍃🍃🍃🌸🍁🌸
जाने यह कैसा मिला , बली सिंधु को काम
उठती – गिरती हैं लहर ,सदा – सदा अविराम
सदा – सदा अविराम ,न क्षण भर खाली पाया
क्या है इसका राज , सिंधु ने नहीं बताया
कहते रवि कविराय , भेद रहते अनजाने
रहता है बेचैन , शक्तिशाली क्यों जाने

*सिंधु* = सागर ,समुद्र

*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[22/02, 5:00 PM] Ravi Prakash: *शुगर रहित मिष्ठान्न (हास्यकुंडलिया)*
🍁🌸🍁🌸🍁🌸🍃🍃🍃
फीके के दिन चल रहे ,सबको डायबिटीज
गुझिया खाना है मना ,सब ही बने मरीज
सब ही बने मरीज , मिठाई कैसे खाएँ
शुगर रहित मिष्ठान्न , इमरती गरम बनाएँ
कहते रवि कविराय ,स्वस्थ हों लस्सी पी के
शुगर रहे कंट्रोल , बनाओ लड्डू फीके
🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 9997615451
[23/02, 9:16 AM] Ravi Prakash: *निरापद (कुंडलिया)*
🍂🍃🍂🍃🌸🍃🍂🍃🍂
आते संकट रात – दिन ,जीवन में अविराम
कौन निरापद रह सका ,मिला किसे आराम
मिला किसे आराम ,सदा ही चिंता खाती
एक मुसीबत बाद , दूसरी दौड़ी आती
कहते रवि कविराय , कन्हैया पार लगाते
डूबी कभी न नाव , खिवैया बनकर आते

*निरापद* = जिसमें कोई संकट या आपत्ति न हो ,सुरक्षित

*रचयिता : रवि प्रकाश* , बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[23/02, 2:38 PM] Ravi Prakash: *निराकार वह कौन (कुंडलिया)*
🔴🟡🔵🟥🟨🔵🟡🔴
कितना सुंदर जग बना ,कितने सुंदर चित्र
चित्रकार वह कौन है ,मालिक सबका मित्र
मालिक सबका मित्र ,किसी ने कब वह देखा
प्रतिमा बनी न एक ,न खिंचती किंचित रेखा
कहते रवि कविराय ,विचारो चाहे जितना
निराकार वह कौन , जान पाओगे कितना
🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[23/02, 4:37 PM] Ravi Prakash: *खोलें चलो किताब (बाल कुंडलिया)*
🍁☘️🍁☘️🍁☘️🍁☘️🍁
पढ़ने के दिन आ गए ,खोलें चलो किताब
खेलकूद काफी हुआ , पूरा साल खराब
पूरा साल खराब , महामारी अब भागी
कक्षा की तकदीर ,साल में जाकर जागी
कहते रवि कविराय ,चलें किस्मत को गढ़ने
मोबाइल घर छोड़ , पाठ कक्षा में पढ़ने

*रचयिता : रवि प्रकाश* बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[23/02, 7:36 PM] Ravi Prakash: *शादी (कुंडलिया)*
💐💐💐🌸🌹🌸💐💐💐
शादी जीवन की कहो ,मधुर सरस सौगात
जिनकी शादी हो गई , खुशनसीब दिन-रात
खुशनसीब दिन-रात ,जिन्हें पत्नी प्रिय मिलती
मनपसंद पतिदेव , जिंदगी पाकर खिलती
कहते रवि कविराय , लड़े तो है बर्बादी
बन जाते यदि मित्र , स्वर्ग कहलाती शादी
🌹🌸🌹💐💐💐🌹🌸🌹
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर ( उत्तर प्रदेश )
मोबाइल 99976 15451
[24/02, 10:29 AM] Ravi Prakash: *बटोही (कुंडलिया)*
☘️🌸☘️🌸🟡🟡🌸☘️🌸☘️
चला बटोही छोड़कर ,अपनी गली-मकान
उसकी केवल रह गई ,यादों में मुस्कान
यादों में मुस्कान ,अजाने पथ पर जाता
जाने कैसे लोग ,नया किस से हो नाता
कहते रवि कविराय ,सदा से है निर्मोही
सब को रोता छोड़ ,विदा हो चला बटोही

*बटोही* = यात्री ,पथिक ,रास्ते पर चलने वाला
*निर्मोही* = जिसको कोई मोह न हो

*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[24/02, 11:43 AM] Ravi Prakash: *एकाकी (कुंडलिया)*
🟡☘️🌸🟡☘️🌸🟡
एकाकी आया मनुज , एकाकी प्रस्थान
आया है किस लोक से ,अगला पथ अनजान
अगला पथ अनजान ,धरा पर खेला – खाया
यहीं मिले सौ मित्र , बंधु – बांधव को पाया
कहते रवि कविराय ,रंग रहते कब बाकी
अंतकाल का दौर , आदमी फिर एकाकी
■■■■■■■■■■■■■■■■■■
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश )
मोबाइल 99976 15451
[24/02, 12:48 PM] Ravi Prakash: *घर में दो लाचार (कुंडलिया)*
☘️🍂☘️🍂☘️🍂☘️🍂☘️
बेटे जाकर बस गए ,घर से दूर अपार
अब बूढ़े माँ-बाप हैं ,घर में दो लाचार
घर में दो लाचार ,साँस बाकी हैं गिनते
हारे थके निढ़ाल ,देखते खुशियाँ छिनते
कहते रवि कविराय ,उठे बैठे या लेटे
गुमसुम हो दिन-रात , याद करते हैं बेटे

*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[25/02, 11:04 AM] Ravi Prakash: *मर्त्य ( कुंडलिया )*
🍃🍁🍃🍁🟡🟡🍁🍃🍁🍃
रोजाना आता रहा , सिर्फ बीच में बाल
डँसने को तैयार था ,वरना हर दिन काल
वरना हर दिन काल ,गलतियाँ होतीं भारी
प्रभु की कृपा अपार ,मर्त्य-मानव आभारी
कहते रवि कविराय ,काल को सबको खाना
रखो हमेशा याद , मृत्यु का सच रोजाना

*मर्त्य* = मानव ,शरीर ,मरणशील

*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[25/02, 8:38 PM] Ravi Prakash: *सत्य (कुंडलिया)*
🟨🟥🟨🟥🔵🟡🟥🟨🟥🟨
सहना सीखो कष्ट को , खाना रोटी – दाल
जो जीवन दुख में जिया ,उसने किया कमाल
उसने किया कमाल , उच्च मूल्यों को जीता
सच का यही इनाम , जिंदगी – भर विष पीता
कहते रवि कविराय , बीच भँवरों में रहना
पड़ी वक्त की मार , थपेड़े सच को सहना
🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[26/02, 10:31 AM] Ravi Prakash: *आया फागुन (कुंडलिया)*
🟡🟨🟡🍃🍂🍃🟡🟨🟡
आया फागुन स्वागतम ,अभिनंदन ऋतुराज
अंतरिक्ष से आ रही , बंसी की आवाज
बंसी की आवाज , साँस में मस्ती छाती
गई शीत की रात , पवन चलती मुस्काती
कहते रवि कविराय , गीत पेड़ों ने गाया
फूलों का मकरंद , चूसने भौंरा आया
🍁🍁🍁🍁🌺🌺🌺🌺🌺🌺
*बंसी* = बाँसुरी
*मकरंद* = फूलों का रस
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[26/02, 10:57 AM] Ravi Prakash: *लाठी बे-आवाज (कुंडलिया)*
🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃
लाठी होती सर्वदा , प्रभु की बे-आवाज
दोषी को देती सजा ,गिरती उस पर गाज
गिरती उस पर गाज ,पटककर मारा करते
जैसे जिसके पाप , दुष्ट वैसे ही भरते
कहते रवि कविराय ,घटाते हैं कद – काठी
राजा बनते रंक , न चल पाते बिना लाठी

*गाज* = वज्र ,बिजली ,बिजली गिरना

*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[26/02, 11:06 AM] Ravi Prakash: *सत्य (कुंडलिया)*
🟡🟡🔵🔴🟢🔵🔴🟢🔵🟡🟡
सहना सीखो कष्ट को , खाना रोटी – दाल
जो जीवन दुख में जिया ,उसने किया कमाल
उसने किया कमाल , उच्च मूल्यों को जीता
सच का यही इनाम ,जिंदगी – भर विष पीता
कहते रवि कविराय ,आत्म – गौरव है गहना
स्वाभिमान में मस्त , हमेशा दुर्दिन सहना
🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[26/02, 3:37 PM] Ravi Prakash: *वीर सावरकर (कुंडलिया)*
🟡🌸☘️🌸☘️🍂🍃🍂🟡
भारत माता का तनय ,आजादी का वीर
कूदा सिंधु जहाज से ,नभ की छाती चीर
नभ की छाती चीर ,गया जो काला पानी
दो जन्मों का दंड ,जेल में गली जवानी
कहते रवि कविराय ,राष्ट्र दो पुष्प चढ़ाता
सावरकर पर गर्व , कर रही भारत माता
*तनय* = पुत्र
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
*स्वातंत्र्य वीर विनायक दामोदर सावरकर* 28 मई 1883 *-* 26 फरवरी 1966// 1857 के गदर को पहली बार स्वतंत्रता संग्राम कहकर पुकारा /1908 में द इंडियन वार ऑफ इंडिपेंडेंस लिखी //8 जुलाई 1910 को गिरफ्तार होकर लंदन से भारत आ रहे थे ,मार्ग में पानी के जहाज से समुद्र में कूद पड़े , तट पर पहुंचे ,पुनः गिरफ्तार ,दो आजन्म कारावास की सजा मिली // काला पानी में कोल्हू में बैल की तरह जुते//जेल में दीवारों पर कोयले से राष्ट्रभक्ति की कविताएँ लिखने वाले संसार के संभवत: एकमात्र कवि
[27/02, 9:59 AM] Ravi Prakash: आजकाशब्द पर 28 अगस्त 2020 से प्रतिदिन कुंडलिया लिखते हुए छह महीने हो गए । अमर उजाला फेसबुक पेज की अनूठी योजना को हृदय से धन्यवाद ,जिसके कारण नए-नए शब्दों से परिचय हो रहा है और लिखने की प्रेरणा भी मिल रही है।
प्रस्तुत है आज प्रदत्त शब्द कुफल पर एक कुंडलिया
*कुफल (कुंडलिया)*
🍂🍃🍂🍃🟣🟢🟡🔵🔴
चढ़ता रंग सदैव ही , जिसका जैसा संग
गाते चंदन की महक , मित्र-लोक के अंग
मित्र-लोक के अंग ,कुफल कालिख दे जाता
दुर्जन देता दाग , पास में जो भी आता
कहते रवि कविराय ,देख शशि सागर बढ़ता
होता यद्यपि दूर , असर फिर भी है चढ़ता
🍁☘️🍁☘️🍁☘️🍁☘️🍁☘️
*कुफल* = बुरा फल या परिणाम
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[27/02, 12:19 PM] Ravi Prakash: *संत रविदास (कुंडलिया)*
☘️🍁☘️🍁🌻🌻🍁☘️🍁☘️
गाते प्रभु के नाम को , करते – करते काम
पाया प्रभु का उच्च पद ,दुर्लभ मधु-अभिराम
दुर्लभ मधु – अभिराम , संत रविदास कहाए
मीरा के गुरु आप , भक्ति में सदा नहाए
कहते रवि कविराय , पात्र में गंगा पाते
रहते हुए गृहस्थ , रोज गुण प्रभु के गाते
🟡🟡🟡🟡🟡🟡🟡🟡🟡🟡
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल_ 99976 15451
[27/02, 1:44 PM] Ravi Prakash: *चंद्रशेखर आजाद (कुंडलिया)*
🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂
आजादी के युद्ध में , अग्रगण्य आजाद
हाथों में पिस्तौल थी ,जिनकी अनुपम याद
जिनकी अनुपम याद ,क्रांतिपथ. के अनुयाई
भारत माता हेतु , जिंदगी भेंट चढ़ाई
कहते रवि कविराय , युद्धपथ के उन्मादी
धन्य – धन्य बलिदान ,रक्त का फल आजादी
“”””””””””””””””””””””””””””””””‘”””””””””””””
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
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*चंद्रशेखर आजाद* *( 23 जुलाई 1906 – 27 फरवरी 1931)*
फरवरी 1922 में चौरा-चौरी हिंसक कांड के कारण गाँधी जी द्वारा असहयोग आंदोलन बंद करने के फलस्वरूप जिनका अहिंसा-मार्ग से मोहभंग हुआ, चंद्रशेखर आजाद उनमें से एक थे ।
तत्पश्चात आपने क्रांति-पथ का अनुसरण किया । 9 अगस्त 1925 को सरकारी खजाना लूटने की गतिविधि में शामिल होकर काकोरी कांड को अंजाम दिया ।
1927 में हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन का गठन किया तथा क्रांति के मार्ग से भारत की स्वतंत्रता प्राप्ति को जीवन का ध्येय बनाया।
लाला लाजपत राय की मौत का बदला लेने के लिए 17 दिसंबर 1928 को लाहौर में पुलिस अधीक्षक सांडर्स के कार्यालय पर पहुँचकर भगत सिंह तथा राजगुरु के साथ मिलकर उसकी हत्या की योजना बनाई । पहली गोली सांडर्स पर राजगुरु ने दागी। उसके बाद भगत सिंह ने सांडर्स पर कुछ गोलियाँ और चलाईं । जब सांडर्स के अंगरक्षक ने पीछा करने का प्रयत्न किया तो चंद्रशेखर आजाद ने उसे गोली मारकर ढेर कर दिया ।
पता नहीं कैसे अंग्रेजों को खबर लग गई कि प्रयागराज के एल्फ्रेड पार्क में चंद्रशेखर आजाद अपने साथियों से विचार-विमर्श कर रहे हैं । पुलिस ने उन्हें घेर लिया। बचने का कोई रास्ता न पाकर चंद्रशेखर आजाद ने अपनी ही पिस्तौल से अपने जीवन का अंत कर दिया । उस समय उनकी आयु केवल 24 वर्ष की थी।
[27/02, 7:37 PM] Ravi Prakash: *ईश की लीला (कुंडलिया)*
🍃🍃🍂🍃🍂🍃🍃
कोई विपदा क्या बड़ी ,बड़ा जगत का खेल
व्यूह रचा भगवान का , चाहे जैसा झेल
चाहे जैसा झेल , कृष्ण हैं लीलाधारी
सारे घटना – चक्र , ईश की लीला प्यारी
कहते रवि कविराय , साँस चहकी या रोई
सब हैं एक समान , फर्क इनमें कब कोई

*रचयिता : रविप्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[27/02, 7:45 PM] Ravi Prakash: *फटमारा (कुंडलिया)*
☘️🍁☘️🍁☘️🍁☘️🍁☘️
फटमारा – सा ही रहा ,सब का अंतिम दौर
नवयौवन का और था ,वृद्ध आयु का और
वृद्ध आयु का और , सभी को रोक सताते
कुछ घर से लाचार , दुखी धन से हो जाते
कहते रवि कविराय ,एक-सा यह जग सारा
कोई मुट्ठी बंद , खुला कोई फटमारा
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*फटमारा* = कृषकाय ,दुखी ,उपेक्षित
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[28/02, 10:00 AM] Ravi Prakash: *विलाप (कुंडलिया)*
🍁🍃🍁🍃🍁🍃🍁🍃🍁🍃
पाए जाते छोर दो , हर्षोल्लास – विलाप
इन दो का ही कर रहा ,बिना रुके जग जाप
बिना रुके जग जाप , विधाता कभी रुलाता
कभी दे रहा मोद , मौज इंसान मनाता
कहते रवि कविराय , रात – दिन जैसे आए
जन्म-मृत्यु का चक्र , मनुज ने दोनों पाए
°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°
*विलाप* = किसी की मृत्यु पर होने वाला
शोक या दुख ,प्रकट किया जाने वाला दुख
*मोद* =खुशी
°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[28/02, 10:53 AM] Ravi Prakash: *तैराक (कुंडलिया)*
🌷🌷🌺🍂🌻🍂🌺🌷🌷
गहरा है तो क्या हुआ ,सागर भले अपार
जिसको आता तैरना ,करता क्षण में पार
करता क्षण में पार , न गहराई से डरता
लेकर हरि का नाम , सिंधु में रहा उतरता
कहते रवि कविराय ,जीत का झंडा फहरा
मुस्काया तैराक , समंदर रोया गहरा
☘️🌸☘️🌸🟡☘️🌸☘️🌸
*रचयिता : रवि प्रकाश ,* बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451

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