Jun 10, 2021 · कुण्डलिया
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60 कुंडलियाँ सितंबर 2020

[1/9/2020, 9:32 AM] Ravi Prakash: *सौ लोगों की भीड़ (कुंडलिया)*
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सौ लोगों की मिल गई ,अनुमति अच्छी बात
शव – यात्रा में जाइए ,शादी – ब्याह बरात
शादी – ब्याह बरात , बैंड – बाजा बजवाएँ
फिर से शादी -भोज ,रोज फिर से सजवाएँ
कहते रवि कविराय , मगर चिंता रोगों की
खतरे का एलार्म , भीड़ है सौ लोगों की
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[1/9/2020, 1:39 PM] Ravi Prakash: _
*हरे रामा हरे कृष्णा (कुंडलिया)*
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चलता देखा देश ने ,था हिप्पी अभियान
मार रहे थे दम सभी ,नशा बना था शान
नशा बना था शान ,अरे क्या नर क्या नारी
सबको लत थी एक ,चिलम हाथों में प्यारी
कहते रवि कविराय ,इश्क ईश्वर से पलता
हरे राम का गीत ,खूब क्या दिन थे चलता
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर ( उत्तर प्रदेश )*
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[1/9/2020, 1:58 PM] Ravi Prakash: सांकल (कुंडलिया)
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सांकल देखो है खुली , दरवाजा मदहोश
रामराज्य लो आ गया ,लगता सब को जोश
लगता सब को जोश ,नहीं अब कोई चोरी
घर के अंदर चीज ,मिलेगी सबको कोरी
कहते रवि कविराय ,आज जो है था क्या कल
रही हमेशा बंद , घरों में सबके सांकल
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[2/9/2020, 1:13 PM] Ravi Prakash: *जेबों में है मास्क (कुंडलिया)*
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मुख पर बाँधे मास्क को ,चलते कितने लोग
कितने सचमुच मानते ,फैला कोई रोग
फैला कोई रोग , दूरियाँ दो गज रखते
कितने धोते हाथ ,स्वाद फिर कोई चखते
कहते रवि कविराय परिस्थितियाँ हैं दुष्कर
जेबों में है मास्क ,कहाँ है सब के मुख पर
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*रचयिता : रवि प्रकाश , बाजार सर्राफा*
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[4/9/2020, 3:36 PM] Ravi Prakash: *
*उर (कुंडलिया)*
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उर में किसके क्या बसा ,सोचो किसको ज्ञात
होठों से जब तक नहीं ,खुल कर आती बात
खुल कर आती बात ,आँख भी बोला करती
कंपन मतलब प्यार ,कभी बतलाता डरती
कहते रवि कविराय ,जिंदगी उनकी सुर में
जिनमें भेद न व्याप्त ,होंठ की बोली उर में
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
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[5/9/2020, 3:08 PM] Ravi Prakash: _
*समदर्शी( कुंडलिया )*
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किसको समदर्शी कहें ,किसकी अब औकात
जिसको देखो कर रहा ,अपने गुट की बात
अपने गुट की बात ,वाह – वाही नित करता
औरों का कह दोष ,जोश अपनों में भरता
कहते रवि कविराय ,रोल पूरा कर खिसको
नंबर सौ में साठ ,कहो यह अब दें किसको
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[6/9/2020, 9:12 AM] Ravi Prakash: *गुरु वंदना (कुंडलिया)*
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मिलता गुरु से ज्ञान है ,गुरुवर सूर्य – समान
जिसको जीवन में मिलें ,समझो पुण्य प्रधान
समझो पुण्य प्रधान ,दोष से रहित कराते
विकृतियाँ कर दूर , पूर्णता को ले आते
कहते रवि कविराय ,सुमन-सा जीवन खिलता
अहोभाग्य वरदान ,मान जग में फिर मिलता
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
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[6/9/2020, 1:42 PM] Ravi Prakash: *गजब इतिहास रचाया (हास्य कुंडलिया)*
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दानी फोटो में दिखे , देते बिस्कुट एक
छह-छह हाथों ने किया ,महाकार्य यह नेक
महाकार्य यह नेक ,गजब इतिहास रचाया
पत्रकार को गिफ्ट ,धन्य सुर्खी में लाया
कहते रवि कविराय ,दान की यही कहानी
फोटोग्राफर साथ , देखिए चलते दानी
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[6/9/2020, 8:46 PM] Ravi Prakash: _
*विलास (कुंडलिया)*
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भोगी का जीवन रहा ,प्रतिदिन भोग-विलास
क्षुधा शांत होती कहाँ ,बढ़ती रहती आस
बढ़ती रहती आस ,आग में ज्यों घी जाए
भड़के बढ़कर आग ,चैन अंतर कब पाए
कहते रवि कविराय ,धन्य जो बनता योगी
उसको जो आनंद , भोगता कब है भोगी
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[7/9/2020, 11:41 AM] Ravi Prakash: *मित्र ( कुंडलिया )*
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रखिए मित्र सँभाल के ,ज्यों प्रभु का वरदान
किस्मत से मिलते सदा ,अच्छे मित्र महान
अच्छे मित्र महान , पिता माता गुरु जानो
शुभचिंतक अनमोल ,बुरा इनका मत मानो
कहते रवि कविराय ,खरी जो कहे परखिए
धडकन तन की जान ,सँभाले इनको रखिए
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[7/9/2020, 12:04 PM] Ravi Prakash: __
*क्लांत ( कुंडलिया )*
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पाते हैं मन को बुझा ,अक्सर पाते क्लांत
अच्छा तन को लग रहा ,ऐसे में एकांत
ऐसे में एकांत , मौन मन को बल देता
सद्भावों के साथ , सकारात्मकता लेता
कहते रवि कविराय ,पास जो अशुभ न लाते
भीतर है उत्साह ,क्लांत मन कभी न पाते
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[8/9/2020, 11:14 AM] Ravi Prakash: _
*दो बैलों की जोड़ी ( कुंडलिया )*
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जोड़ी है दो बैल की , अर्थशास्त्र संपूर्ण
मुश्किल का हर हल यही ,रामबाण यह चूर्ण
रामबाण यह चूर्ण , गाय है दुग्ध प्रदाता
ले किसान हल – बैल ,खेत पर अन्न उगाता
कहते रवि कविराय ,प्रशंसा है हर थोड़ी
सतयुग का आधार ,सुगढ़ बैलों की जोड़ी
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[8/9/2020, 12:32 PM] Ravi Prakash: *अग्रसेन को पूजिए ( कुंडलिया )*
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अग्रसेन को पूजिए , राजा हुए महान
जीव – दया संदेश था ,इनका रहा प्रधान
इनका रहा प्रधान , अठारह गोत्र बनाए
नगर – निवासी एक , छत्र के नीचे आए
कहते रवि कविराय ,न भूलो मधुर देन को
समरस सरस समाज , प्रदाता अग्रसेन को
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[8/9/2020, 2:47 PM] Ravi Prakash: _
*अलख(कुंडलिया)*
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ध्यानी ने पाया अगम ,दुर्लभ अलख स्वरूप
देखा उसको जो सुनो , है भूपों का भूप
है भूपों का भूप ,नहीं धन से जन पाते
पाते कब विद्वान , मंत्र – श्लोकों से आते
कहते रवि कविराय ,हुए असफल सब ज्ञानी
मिलते गहरे डूब , ध्यान में जाकर ध्यानी
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[9/9/2020, 11:02 AM] Ravi Prakash: *घर-घर आज मरीज (कुंडलिया )*
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बीमारी फैली हुई , घर-घर आज मरीज
कुछ अकड़ू हैं कह रहे ,उससे तू क्या चीज
उससे तू क्या चीज ,हमारा क्या कर लेगी
आता सिर्फ बुखार ,एक झटका भर देगी
कहते रवि कविराय ,बुआ उनकी पर हारी
बेचारी कमजोर , उसे खाई बीमारी
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[9/9/2020, 11:12 AM] Ravi Prakash: _
*बोलिए जय हो हिंदी (कुंडलिया)*
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हिंदी में करिए सदा ,रोजाना के काम
सोचें इसमें ही सदा ,लिखने में आराम
लिखने में आराम ,मातृभाषा मन भाती
इसमें मन की बात ,कही सुविधा से जाती
कहते रवि कविराय ,हिंद की गौरव बिंदी
बनिए हिंदी भक्त ,बोलिए जय हो हिंदी
∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆
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[9/9/2020, 1:08 PM] Ravi Prakash: _
*पट (कुंडलिया)*
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पाने की विधि है सरल ,अंतर के पट खोल
खुद में यदि तू खो गया ,जाएँगे प्रभु डोल
जाएँगे प्रभु डोल , लोभ सब मोह हटाता
मन में तनिक न मैल ,ईश को वह ही पाता
कहते रवि कविराय ,कहाँ सुधबुध खाने की
हुआ समर्पित भक्त ,प्यास बस प्रभु पाने की
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[10/9/2020, 1:24 PM] Ravi Prakash: _
*धीर (कुंडलिया)*
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रखते हिम्मत हैं सदा ,कहिए उनको धीर
उनमें दैवी संपदा , उनको मानो वीर
उनको मानो वीर ,नहीं विचलित जो होते
खोते नहीं विवेक , दीखते कभी न रोते
कहते रवि कविराय,उच्च भावों को चखते
दुर्लभ जग में धीर ,धैर्य जो मन में रखते
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
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[10/9/2020, 3:47 PM] Ravi Prakash: *कंगना रानौत ( कुंडलिया )*
★★★★★★★★★★
टकराई आगे बढ़ी , खड़ी सामने मौत
झुकी नहीं पर दृढ़ रही ,यह कंगना रानौत
यह कंगना रानौत ,सत्य की यह अनुगामी
भारत की आवाज ,दीखती है आगामी
कहते रवि कविराय ,स्वयं में लक्ष्मीबाई
लगता सिंह – सवार , शत्रु से है टकराई
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा रामपुर उत्तर प्रदेश मोबाइल 99976 15451
[11/9/2020, 1:22 PM] Ravi Prakash: _
*गिरिजा (कुंडलिया)*
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चाही वस्तु सदा मिली ,जिसके यत्न विशेष
जिसके मन में प्रिय बसा ,अंतर में कब द्वेष
अंतर में कब द्वेष , राह सच्ची अपनाई
सतत साधना साध ,सिद्धि मंजिल फिर आई
कहते रवि कविराय ,धन्य शिव-पथ की राही
गिरिजा धन्य प्रणाम ,प्राप्ति तुमको मनचाही
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*रचयिता : _रवि प्रकाश , बाजार सर्राफा*
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[12/9/2020, 8:03 AM] Ravi Prakash: *आत्महत्या दुखदाई( कुंडलिया )*
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दुखदाई कितना बने , जीवन यह संसार
करें आत्महत्या नहीं , यह है एक विकार
यह है एक विकार ,परिस्थितियों से लड़िए
हारे मन की सोच , बुरी मत इसमें पड़िए
कहते रवि कविराय ,समझ जिस में भी आई
बोला क्षुद्र विचार , आत्महत्या दुखदाई
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*रचयिता :रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
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[12/9/2020, 11:59 AM] Ravi Prak_
*अभिनव (कुंडलिया)*
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चलता रहता क्रम सदा ,क्या अभिनव -प्राचीन
खोया – पाया व्यर्थ है ,क्या खुश क्या गमगीन
क्या खुश क्या गमगीन ,समय सब नाच नचाता
आता है जो आज ,लौटकर कल को जाता
कहते रवि कविराय ,कभी क्रम यह ही खलता
मन कहता मत सोच ,जगत में यह ही चलता
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[12/9/2020, 3:39 PM] Ravi Prakash: *परमानंद (कुंडलिया)*
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सबसे ज्यादा कीमती , होता परमानंद
जो खुद में होते मगन ,पाते इसको चंद
पाते इसको चंद ,नहीं धन के गुण गाते
उनको कहाँ नसीब ,क्षुद्र यश में फँस जाते
कहते रवि कविराय ,खोजती धरती कब से
कहाँ छुपा है संत ,पूछती रहती सबसे
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रचयिता : रवि प्रकाश,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[13/9/2020, 12:21 PM] Ravi Prakash_
*लोचन (कुंडलिया)*
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हँसते हैं रोते कभी , दो लोचन अभिराम
खुले सुबह समझो हुई ,हुए बंद तो शाम
हुए बंद तो शाम , बात करते इतराते
कभी प्रशंसा-भाव ,नजर से कभी गिराते
कहते रवि कविराय ,रसिक इन में ही फँसते
कुछ होते बेहाल ,जिंदगी भर कुछ हँसते
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*रचयिता :रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा* *रामपुर( उत्तर प्रदेश )*
*मोबाइल 999761 5451*
[13/9/2020, 9:37 PM] Ravi Prakash: *अभिमानी ( कुंडलिया )*
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अभिमानी सब जग दिखा ,इतराते सब लोग
पद पैसे का कर रहे , ऐंठ – ऐंठ उपयोग
ऐंठ – ऐंठ उपयोग ,स्वयं को बड़ा बताते
यह महानता थोप , महापुरुषों में आते
कहते रवि कविराय ,विनय की सीख न मानी
करते खुद तारीफ ,क्षुद्र मानव अभिमानी
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
रामपुर (उत्तर प्रदेश )
मोबाइल 99976 15451
[14/9/2020, 2:17 PM] Ravi Prakash:
*उजास (कुंडलिया)*
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जीती हिंदी तो हुआ , जैसे एक उजास
भारत को मानो मिली ,भावी-युग की आस
भावी यग की आस ,धन्य चौदह तिथि आई
धन्य सितंबर माह , पुनः आजादी पाई
कहते रवि. कविराय ,घूँट विष के पर पीती
असली रण है शेष ,युद्ध पूरा .कब जीती
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
मोबाइल 9997615451
[14/9/2020, 3:22 PM] Ravi Prakash: *हैप्पी हिंदी (कुंडलिया)*
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आए अंग्रेजी पढ़े , श्री अंग्रेज कुमार
बोले क्या है आज हीे , हैप्पी हिंदी यार
हैप्पी हिंदी यार , केक हिंदी का काटें
हल्लागुल्ला मौज ,मस्तियाँ खुद से बाँटें
कहते रवि कविराय बर्थ डे जग में छाए
चौदह तिथि हर साल ,माह में हर दिन आए
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश )
मोबाइल 99976 15451
[15/9/2020, 2:07 PM] Ravi Prakash: _
*रोते बूढ़े ( कुंडलिया )*
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रोते बूढ़े कर रहे , यौवन के दिन याद
हुए रिटायर हो गए , खाली उसके बाद
खाली उसके बाद ,कमर फिर झुकती जाती
करें हाथ कम काम ,उपेक्षा सदा सताती
कहते रवि कविराय , देह का बोझा ढोते
तकिए गीले रोज , कभी दिन ही में रोते
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
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[15/9/2020, 2:38 PM] Ravi Prakash:
*तारक (कुंडलिया)*
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कितना सुंदर लग रहा , यह तारक आकाश
जैसे रुनझुन घंटियाँ , डाले कोई पाश
डाले कोई पाश , चाँद सँग ज्यों बाराती
शहनाई की गूँज , कान में मद्धिम आती
कहते रवि कविराय ,दृश्य देखो यह जितना
रहता मन अतृप्त , कहेगा सुंदर कितना
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[15/9/2020, 5:02 PM] Ravi Prakash: *रानी अंग्रेजी (कुंडलिया)*
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रानी अंग्रेजी बनी , करती अब भी राज
इसके पीछे जा रहा , पूरा आज समाज
पूरा आज समाज , देश में यह ही छाई
नौकरियाँ व्यवसाय ,वकालत उच्च-पढ़ाई
कहते रवि कविराय ,घोर अकड़ू अभिमानी
देश हुआ आजाद ,विदेशी अब भी रानी
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*रचयिता , रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर 【उत्तर प्रदेश】*
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[16/9/2020, 8:19 PM] Ravi Prakash
*असार (कुंडलिया)*
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खोया-पाया अर्थ क्या ,यह जग एक असार
नश्वर इसकी वस्तुएँ , नाशवान संसार
नाशवान संसार , जन्म लेते जन मरते
मूरख धन से लोभ , संपदा घर में भरते
कहते रवि कविराय ,समझ इतना बस आया
चिंतन इसका व्यर्थ ,कौन क्या खोया -पाया
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[17/9/2020, 9:23 AM] Ravi Prakash: *मोदी (कुंडलिया)*
🌸🌻🍁🌸🌻🍁🌸🌻🍁
मोदी भारत को मिले ,दी भारत को शान
एक सूत्र में गुँथ गया ,अपना हिंदुस्तान
अपना हिंदुस्तान ,स्वच्छता आदत भर दी
काशमीर की दूर ,समस्या जड़ से कर दी
कहते रवि कविराय ,धन्य वह माँ की गोदी
वंदन हीराबेन , तुम्हारा हीरा मोदी
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
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[18/9/2020, 11:36 AM] Ravi Prakash: *काका हाथरसी (कुंडलिया)*
★★★★★★★★★★★
काका हाथरसी हुए ,कविवर हास्य – प्रधान
हँसते – हँसते हो गए , पल में अंतर्ध्यान
पल में अंतर्ध्यान , हँसाने जग में आए
काका यद्यपि नाम , बड़ी दाढ़ी पर पाए
कहते रवि कविराय ,खींचते बढ़िया खाका
कुंडलिया का चित्र ,आपका अनुपम काका
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर( उत्तर प्रदेश )*
*मोबाइल 99976 15451*
[18/9/2020, 12:10 PM] Ravi Prakash:
_दीप्त (कुंडलिया )_
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जिनका मन निर्मल हुआ,मुख पर मधु- मुस्कान
वाह – वाह क्या देखिए , अंतर्मन की शान
अंतर्मन की शान , दीप्त मुखमंडल पाते
कब तारक-आकाश ,चमक उनकी – सी लाते
कहते रवि कविराय ,स्वर्ण को समझें तिनका
मन में तनिक न लोभ ,दिव्यमय जीवन जिनका
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रचयिता ,रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश )
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[19/9/2020, 2:11 PM] Ravi Prakash: *दो हास्य कुंडलियाँ*
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( *1* )
*बोलो क्या है नाम में [कुंडलिया]*
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बोलो क्या है नाम में , बेढ़ंगे हैं नाम
लक्ष्मीचँद जी कर रहे ,मजदूरों का काम
मजदूरों का काम ,वीर जी सींक – सलाई
कमलनयन की आँख ,देखिए है मुरझाई
कहते रवि कविराय ,तिजोरी जाकर खोलो
अरबपती श्रीमान ,फकीरा की जय बोलो
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( *2* )
*सरस्वती से बैर (कुंडलिया)*
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लाला लक्ष्मीचंद को , खलती यह ही बात
पढ़े -लिखों के बीच में ,मिलती कब औकात
मिलती कब औकात ,अँगूठा – छाप कहाते
नोटों की भरमार ,किंतु गिनना कब आते
कहते रवि कविराय ,अक्ल पर लटका ताला
सरस्वती से बैर , जन्म से रखते लाला
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
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[19/9/2020, 4:28 PM] Ravi Prakash: *मृत्यु महान (कुंडलिया)*
★★★★★★★★★
धरती को जीवन मिला ,पाकर मृत्यु महान
अगर न होती मृत्यु तो ,बनती दुख की खान
बनती दुख की खान ,बुढ़ापा रोज सताता
आपाधापी लोभ , आतताई बन आता
कहते रवि कविराय , जिंदगी आहें भरती
उसको चिर विश्राम ,कहाँ देती फिर धरती
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
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[19/9/2020, 9:53 PM] Ravi Prakash:
*उदधि (कुंडलिया)*
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चलती लहरें कर रहीं ,अठखेली चहुँ ओर
दूर उदधि फैला हुआ ,दिखता कहीं न छोर
दिखता कहीं न छोर ,अंत कब किसको दीखा
खुद में मानो मस्त ,एक दृढ़ – प्रज्ञ सरीखा
कहते रवि कविराय ,नहीं सत्ता है ढलती
पानी का जयघोष ,लहर रह-रहकर चलती
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर( उत्तर प्रदेश )
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[20/9/2020, 12:07 PM] Ravi Prakash:
गोपन ( कुंडलिया )
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किसके मन के कब पढ़े ,किसने गोपन भाव
दो पैरों को रख रहा ,मानव दो – दो नाव
मानव दो-दो नाव ,असल मुखड़ा कब दीखा
चतुराई के साथ , जिंदगी जीना सीखा
कहते रवि कविराय,काम निकला तो खिसके
बहुरुपिए हैं लोग ,कौन हैं बोलो किसके
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रचयिता : रवि प्रकाश , बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[21/9/2020, 10:24 AM] Ravi Prakash:
*मंसूख (कुंडलिया)*
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भूखे को रोटी बड़ी ,सबसे बढ़कर भूख
भूख बढ़ी तो हो गई ,लोक – लाज मंसूख
लोक-लाज मंसूख , पेट की आग बड़ी है
इसका अर्थ सपाट ,शत्रु की सैन्य खड़ी है
कहते रवि कविराय ,वचन धर्मों के रूखे
केवल उन के योग्य ,नहीं जो जन हैं भूखे
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
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मंसूख= जो रद्द कर दिया गया हो
[21/9/2020, 3:12 PM] Ravi Prakash: *साइकिल (कुंडलिया)*
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बाइक से होती भली ,एक साथ दो काम
चले बिना पेट्रोल के ,सस्ता इसका दाम
सस्ता इसका दाम ,खूब कसरत करवाती
करो साइकिल – सैर ,नहीं बीमारी आती
कहते रवि कविराय,साइकिल कर दो “लाइक”
कहो साइकिल हाय ,बाय तुमको है बाइक
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[22/9/2020, 11:38 AM] Ravi Prakash: *वाह-वाह श्री मास्क जी (कुंडलिया)*
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मुखडे सुंदर छुप गए ,ऐसा किया कमाल
वाह-वाह श्री मास्क जी ,सब तुम से बेहाल
सब तुम से बेहाल , होंठ सूखे या गीले
किसने जाना गाल , लाल हैं या हैं पीले
कहते रवि कविराय ,आजकल सब के दुखड़े
दिखते केवल वस्त्र ,नहीं दिख पाते मुखड़े
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[22/9/2020, 12:25 PM] Ravi Prakash: *ढोते बोझा देह का (कुंडलिया)*
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ढोते बोझा देह का ,खुद ही सौ-सौ साल
चाहे अच्छी देह है , या फिर खस्ताहाल
या फिर खस्ताहाल ,रोग से तन जब सड़ता
सबको खुद ही बोझ ,देह का ढोना पड़ता
कहते रवि कविराय , भतीजे बेटे पोते
अर्थी पर रख देह , बाद मरने के ढोते
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[22/9/2020, 1:53 PM] Ravi Prakash
*मत्सर (कुंडलिया)*
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बेचारे वह क्या करें ,मद मत्सर की खान
जिनकी ऊँची नाक है ,भरा हुआ अभिमान
भरा हुआ अभिमान ,सदा कुढ़ते गुस्साते
जिनमें धन-संतोष ,पास कब हरगिज आते
कहते रवि कविराय ,जंग जीवन की हारे
कब दीखे यह नम्र , ऐंठते बस बेचारे
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[22/9/2020, 5:25 PM] Ravi Prakash: #
*_एक बच्चा कानून (कुंडलिया)_*
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बच्चा एक अगर हुआ ,मदद करे सरकार
उसके बाद न चाहिए ,होना कुछ अधिकार
होना कुछ अधिकार ,बोझ क्यों लोग उठाएँ
कमा रहे हैं चार , और छह बैठे खाएँ
कहते रवि कविराय ,विधेयक लाओ सच्चा
मुफ्त पलेगा एक ,आज से केवल बच्चा
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[23/9/2020, 9:27 AM] Ravi Prakash: *रिश्वत ( कुंडलिया )*
★★★★★★★★★★★★★★★
रिश्वत ऐसी चल रही ,इसके बिना न काम
जैसा जिसका काम है ,वैसा तय है दाम
वैसा तय है दाम ,घूस अफसर को भाती
इसके लिए बगैर ,प्रक्रिया कब बढ़ पाती
कहते रवि कविराय ,देश में फैली विषवत
सबसे घातक रोग ,आज का मानो रिश्वत
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[23/9/2020, 4:07 PM] Ravi Prakash: *पिटारी (कुंडलिया)*
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खुली पिटारी याद की , पितृपक्ष का दौर
जब तक थे माता-पिता ,अहा ! दौर था और
अहा ! दौर था और ,तनिक कब फिक्र सताती
चिंताओं का बोझ , पिताजी की थी थाती
कहते रवि कविराय , यही थी दौलत सारी
कर्तव्यों का बोध , भरी थी खुली पिटारी
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[24/9/2020, 12:14 PM] Ravi Prakash
#चंद्रिका (#कुंडलिया)
_______________________________
चंदा से बढ़ चंद्रिका , फैली चारों ओर
चंदा नभ में रह गया ,किरणों का बस शोर
किरणों का बस शोर ,सुयश ऐसे ही आता
पीछे रहता नाम ,काम जन-जन को भाता
कहते रवि कविराय ,चंद्र किरणों का फंदा
बाँधे धरती लोक , स्रोत मनभावन चंदा
_____________________________
रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर ( उत्तर प्रदेश )
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_____________________________
चंद्रिका = चंद्रमा का प्रकाश
[24/9/2020, 12:37 PM] Ravi Prakash: *सम्मान (हास्य कुंडलिया )*
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””’
खर्चा करके खुद किया ,अपना ही सम्मान
चमचे देखो गा रहे , प्रायोजित यशगान
प्रायोजित यशगान ,फूल कर कुप्पा होते
अपनी माला शॉल ,ओढ़कर खुद ही ढोते
कहते रवि कविराय ,जगत में यह ही चर्चा
एक अदद सम्मान ,चाय – पानी का खर्चा
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[24/9/2020, 2:24 PM] Ravi Prakash: *महामारी मजबूरी (कुंडलिया)*
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दूरी छह फिट की रखो ,आने मत दो पास
मास्क ढको आए नहीं ,तुम तक कोई श्वास
तुम तक कोई श्वास ,कहीं कुछ चीज न छूना
खतरे का एलार्म ,अर्थ है लगना चूना
कहते रवि कविराय , महामारी मजबूरी
समझदार इंसान , आजकल रखते दूरी
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[25/9/2020, 11:47 AM] Ravi Prakash
*रजनी (कुंडलिया)*
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आती रजनी सुख भरी ,इसमें शांति प्रधान
सोता इसकी गोद में ,जगत बिना व्यवधान
जगत बिना व्यवधान ,अँधेरा मन को भाता
पलकें होतीं बंद , सूर्य का शोर न आता
कहते रवि कविराय ,आँख कब है चुँधियाती
सघन कालिमा व्याप्त ,मधुर रजनी जब आती
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[26/9/2020, 11:00 AM] Ravi Prakash: #
*#बटमार (#कुंडलिया)*
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पाए जीवन में नहीं , किसने हैं बटमार
चिकने-चुपड़े कुछ लगे ,कुछ के मुख खूँखार
कुछ के मुख खूँखार ,लूटना सबका जारी
कुछ अंदर के लोग , काम था पहरेदारी
कहते रवि कविराय ,परख लो जो भी आए
भोली-भाली शक्ल ,कुटिल मन के भी पाए
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*लेखक : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
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[26/9/2020, 12:48 PM] Ravi Prakash: *खाते थे जो ड्रग्स ( कुंडलिया )*
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खाते थे जो ड्रग्स को ,आफत में है जान
सोच रहे खुल जाए न ,अपनी अब पहचान
अपनी अब पहचान ,नशे के आदी रोते
काट रहे हैं पाप ,बीज जो अब तक बोते
कहते रवि कविराय ,केस खुलते ही जाते
भेद खोलते मित्र , साथ में यह भी खाते
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
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[26/9/2020, 1:27 PM] Ravi Prakash: *हमेशा राक्षस मारा (कुंडलिया)*
“■■■■■■■■■■■■■
मारा हर राक्षस. गया , फैलाता आतंक
कुदरत खुद ही तोड़ती ,उसका भारी डंक
उसका भारी डंक ,महामारी कब ठहरी
सूर्य चंद्रमा वायु , मनुज के रक्षा प्रहरी
कहते रवि कविराय ,मरण जीवन से हारा
मिली मनुज को जीत ,हमेशा राक्षस मारा
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
*रचयिता : रवि प्रकाश , बाजार सर्राफा*
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[27/9/2020, 12:29 PM] Ravi Prakash: *
*छबीला (कुंडलिया)*
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छाया यौवन मद – भरा ,आँखों में चमकार
छैल छबीला दिख रहा ,लिए ह्रदय में प्यार
लिए हृदय में प्यार ,सिंधु का ज्वार उमड़ता
वाह – वाह उत्साह ,सदा ही दिखा घुमड़ता
कहते रवि कविराय ,रुप यों घिरकर आया
जैसे मस्त समीर ,मेघ हो नभ पर छाया
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[28/9/2020, 3:28 PM] Ravi Prakash: *
*कगार (कुंडलिया)*
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पाते मंजिल वह नहीं , बैठे मिले कगार
मंजिल मिलती है तभी ,जाते उठ उस पार
जाते उठ उस पार ,लक्ष्य के निकट न रुकना
अंतिम कदम विशेष ,नहीं तब तक है चुकना
कहते रवि कविराय ,विफल वह भी कहलाते
किया पार मँझधार ,पार लेकिन कब पाते
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[29/9/2020, 9:38 AM] Ravi Prakash: *ब्रह्म कमल (कुंडलिया)*
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मनभावन है देखिए , हेमकुंड साहेब
दुनिया में विकृति कई ,इसमें कहीं न ऐब
इसमें कहीं न ऐब ,ब्रह्म – पंकज है खिलता
अद्भुत दिव्य प्रसाद ,दर्शनों से ही मिलता
कहते रवि कविराय ,कुंड पर्वत अति पावन
कुदरत का अनमोल ,दृश्य देखो मनभावन
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[29/9/2020, 11:39 AM] Ravi Prakash: *_
*तमस (कुंडलिया)*
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आया सूरज चीर के ,तमस बड़ा घनघोर
आते ही धरती हुई , उजली चारों ओर
उजली चारों ओर , सात सूरज के घोड़े
इसका मतलब रंग , सात हैं थोड़े – थोड़े
कहते रवि कविराय ,मरी फिर जीती काया
चला चक्र हर रोज ,डूब कर फिर रवि आया
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[29/9/2020, 4:23 PM] Ravi Prakash: *फटा कुर्ता पजामा (हास्य बाल कुंडलिया)*
★★★★★★★★★★★★★★★
मामा घर रामू गया , बिना कहे इस बार
घर के बाहर मिल गया ,कुत्ता पर खूँखार
कुत्ता पर खूँखार ,जोर से भौंका झपटा
भागा रामू दौड़ ,पैर रह – रहकर रपटा
कहते रवि कविराय , फटा कुर्ता पाजामा
बोला कर दो माफ ,न फिर आऊँगा मामा
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[29/9/2020, 11:38 PM] Ravi Prakash: *सठियाना (कुंडलिया)*
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सठियाना खुलकर कहो ,षष्ठिपूर्ति का अर्थ
साठ वर्ष के हो गए , आगे जीवन व्यर्थ
आगे जीवन व्यर्थ ,रिटायर अब घर बैठो
शिथिल हो गए पाँव ,हाथ मत ज्यादा ऐंठो
कहते रवि कविराय ,बात सच सोलह आना
वर्षगाँठ यदि साठ ,अर्थ इसका सठियाना
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
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[30/9/2020, 1:24 PM] Ravi Prakash: _#
*#तुहिन 🙁 #कुंडलिया )*
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लटकाई थी खीर जो ,शरद पूर्णिमा रात
पड़ी तुहिन उस खीर में ,मधु – जैसी सौगात
मधु – जैसी सौगात ,स्वाद अब हुआ निराला
मानो अमृत घोल , स्वर्ग से प्रभु ने डाला
कहते रवि कविराय , प्रेम से सब ने खाई
छींके ऊपर टाँग , खीर जो थी लटकाई
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रचयिता: रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश )
मोबाइल 999761 5451
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
_तुहिन = ओस कण , ठंडक , हिम_

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