Jun 10, 2021 · कुण्डलिया
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58 कुंडलियाँ नवंबर 2020

[1/11/2020, 3:14 PM] Ravi Prakash: *वैभव (कुंडलिया)*
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वैभव दो हमको प्रभो ,ऐसा छप्पर – फाड़
झंडे हम संसार में , अपने जाएँ गाड़़
अपने जाएँ गाड़ , परम सुखमय दिन आएँ
हमको दो वह तेज , देवता तक थर्राएँ
कहते रवि कविराय ,जेब में आए निधि-नव
अष्ट – सिद्धि हों द्वार ,इस तरह छाए वैभव
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश )
मोबाइल 99976 15451
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वैभव = संपदा , शक्ति , समृद्धि
[2/11/2020, 1:35 PM] Ravi Prakash: *ज्योत्स्ना (कुंडलिया)*
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छाती नभ में ज्योत्स्ना , चंदा की सौगात
गोरा दूल्हा हँस रहा , तारों की बारात
तारों की बारात , दिखा आकाश निराला
गोल – मटोला चाँद , रूप अद्भुत मतवाला
कहते रवि कविराय ,मरण की तिथि फिर आती
रुदन करता व्योम , अमावस्या है छाती
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 999 761 5451
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ज्योत्स्ना = चाँदनी , दुर्गा , सौंफ
[3/11/2020, 8:38 AM] Ravi Prakash: *आतिशबाजी (कुंडलिया)*
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आतिशबाजी से हुआ , पर्यावरण अशुद्ध
अब इसके प्रतिबंध पर ,सोचें लोग प्रबुद्ध
सोचें लोग प्रबुद्ध , श्रंखला रोज बनाएँ
मिलकर करें विचार , बुरा इसको ठहराएँ
कहते रवि कविराय ,करें जन-जन को राजी
बन जाए कानून , बंद हो आतिशबाजी
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[3/11/2020, 8:52 AM] Ravi Prakash: *फुटपाथ (कुंडलिया)*
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बनती हैं सड़कें नई , बनते कब फुटपाथ
इनके रुदन को सुनो , इनका भी दो साथ
इनका भी दो साथ , चलें कैसे नर – नारी
नई सड़क पर वाह , ठाठ से चली सवारी
कहते रवि कविराय , धूल – मिट्टी में सनती
पैदल जन असहाय ,सड़क उनकी कब बनती
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[3/11/2020, 10:19 AM] Ravi Prakash: __
*अर्धनारीश्वर (कुंडलिया)*
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मन से प्रिय – प्रियतम मिले ,दोनों एकाकार
राधा के मन में बसे , सुंदर श्याम कुमार
सुंदर श्याम कुमार ,कृष्ण को भाती राधा
बाहर से तन एक ,श्वास हर आधा-आधा
कहते रवि कविराय ,समर्पण अपनेपन से
दुर्लभ है यह प्रेम ,हुआ द्वापर में मन से
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[3/11/2020, 10:44 AM] Ravi Prakash: *प्रणय ( कुंडलिया )*
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अंतर में बनकर प्रणय ,आया सौ – सौ बार
बिना कहे फिर भी रहा ,कुछ पाया साकार
कुछ पाया साकार ,प्यार से जीवन पलता
यह मधुमय संबंध ,दीप – सा जैसे जलता
कहते रवि कविराय ,प्रणय है जादू – मंतर
जग जाता है भाग्य ,जगा यह जिसके अंतर
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
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प्रणय = प्रेम ,प्यार ,अनुराग
[3/11/2020, 10:20 PM] Ravi Prakash: *करवा चौथ और जलेबी (कुंडलिया)*
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खाओ प्रियतम रसभरी ,मधुर जलेबी आज
कल को होगी हर तरफ ,करवा चौथ सुराज
करवा चौथ सुराज ,प्रेम से मिलकर खाएँ
खुद खाएँ दो कौर,चार प्रिय को पहुँचाएँ
कहते रवि कविराय ,रीति मधुमयी निभाओ
गरम जलेबी आज ,खरीदो घर पर खाओ
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
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करवाचौथ की पूर्व रात्रि पर जलेबी खाने की परंपरा पर आधारित कुंडलिया
[4/11/2020, 12:53 PM] Ravi Prakash: *करवा चौथ (कुंडलिया)*
★★★★★★★★★★★★★★
अपना भाग्य सराहिए , पाया हिंदुस्तान
मनता करवा चौथ है ,पत्नी नेक महान
पत्नी नेक महान ,सात जन्मों की आदी
एक जन्म में एक ,सिर्फ भारत में शादी
कहते रवि कविराय ,विदेशों में यह सपना
शादी रोज तलाक ,रोज पति बदलें अपना
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
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*मोबाइल 99976 15451*
[5/11/2020, 3:01 PM] Ravi Prakash: *पंखी (कुंडलिया)*
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पाया जीवन दो घड़ी ,फिर अर्पित बलिदान
पंखी से ज्यादा कहो ,होगा कौन महान
होगा कौन महान ,प्रेम का मधुर चितेरा
हुआ आग में राख ,लगाते लौ का घेरा
कहते रवि कविराय ,प्यार का गीत सुनाया
तुम हो पंखी धन्य ,न कोई तुम – सा पाया
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उ.प्र.)
मोबाइल 9997615451
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पंखी = पक्षी , उड़ने वाला छोटा कीड़ा या पतिंगा
[6/11/2020, 12:32 PM] Ravi Prakash: *जिजीविषा (कुंडलिया)*
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भरता भाव जिजीविषा ,साहस का संयोग
कहता रोगी मत करो , बारूदी उपभोग
बारूदी उपभोग , नहीं हो आतिशबाजी
पर्यावरण – सुधार ,हेतु सब हों अब राजी
कहते रवि कविराय ,वायु को दूषित करता
आतिशबाजी जहर ,साँस में भीतर भरता
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
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जिजीविषा = जीने की इच्छा या उत्कट कामना , जीवटता
[7/11/2020, 8:07 AM] Ravi Prakash: *समय है बहता पानी (कुंडलिया)*
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राजा – रानी का हुआ ,इतिहासों में दौर
उनके जैसा कौन था ,जग में कोई और
जग में कोई और , हुए नेता अभिनेता
हुए सेठ गुणवान ,काल सबको खा लेता
कहते रवि कविराय ,समय है बहता पानी
ठहरे कब जन आम ,रहे कब राजा – रानी
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[7/11/2020, 11:35 AM] Ravi Prakash: *अस्फुट (कुंडलिया)*
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बोली ऐसी बोलिए , अस्फुट रहे न बात
खुलकर सीधा कर सके ,वक्षस्थल पर घात
वक्षस्थल पर घात ,काम को करने वाली
शब्दों की बौछार ,खोखली मत हो खाली
कहते रवि कविराय , अकेले हो या टोली
रखो वीरता-भाव , ठिठोली करे न बोली
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रचयिता रवि प्रकाश बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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अस्फुट = अस्पष्ट , अप्रकट ,जो खिला न हो
[8/11/2020, 10:38 AM] Ravi Prakash: *अहोई अष्टमी (कुंडलिया)*
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तारे – जैसी हो सदा , नभ में ऊँची शान
बच्चे महिमावान हों , माँ का यह अरमान
माँ का यह अरमान , अहोई आठे आती
रखती मांँ उपवास ,अन्न का कण कब खाती
कहते रवि कविराय , पुत्र – पुत्री हैं प्यारे
माँ कहती हे लाल ! ,आँख के हो तुम तारे
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[8/11/2020, 1:45 PM] Ravi Prakash: *ई रिक्शा पर प्रतिबंध (कुंडलिया)*
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मारी बेचारी गई , ई – रिक्शा बेमौत
सड़कों पर बाइक खड़ी ,बनकर उसकी सौत
बनकर उसकी सौत ,अभागी रिक्शा रोती
आम नागरिक रोज ,वृद्धजन यह ही ढोती
कहते रवि कविराय , तिपहिया बंद सवारी
जाने किसने हाय ,प्रशासन की मति मारी
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[8/11/2020, 2:21 PM] Ravi Prakash: *मल्लार ( कुंडलिया )*
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वर्षा ऋतु तो आ गई ,लेकिन सब बेकार
बारिश कब अब तक हुई ,कहें मेघ मल्लार
कहें मेघ मल्लार , राग मीरा जो गाती
तानसेन बेजोड़ , वाद्य से वर्षा आती
कहते रवि कविराय ,देख बादल मन हर्षा
धन्य – धन्य संगीत , गगन से लाती वर्षा
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
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मल्लार = वर्षा ऋतु में गाया जाने वाला एक राग ,मलार
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नोट : मल्लार अपेक्षाकृत ” *मल्हार”* नाम से अधिक लोकप्रिय है । उदाहरणार्थ : मेघ मल्हार ,राग मल्हार
[9/11/2020, 8:06 AM] Ravi Prakash: *विदेशी शब्द (कुंडलिया)*
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तुर्की अरबी फारसी , *गिरफ्तार* *दीवार*
*तकिया* *जादू* *फायदा* , *मुर्दा* *पैदावार*
*मुर्दा* *पैदावार* , *मुकदमा* *कुर्सी* *हमला*
*शादी* *तीर* *गवाह* , पुर्तगाली है *गमला*
कहते रवि कविराय ,शब्द अब अपना *कुर्की*
*कुली* *लाश* *कालीन* , *बहादुर* *चमचा* तुर्की
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_रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा_
_रामपुर (उत्तर प्रदेश)_
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*फारसी शब्द* =
गिरफ्तार ,दीवार ,जादू ,मुर्दा ,पैदावार ,शादी, गवाह ,तीर

*अरबी शब्द* =
तकिया ,फायदा ,मुकदमा ,कुर्सी ,हमला

*तुर्की शब्द* =
कुर्की ,कुली ,कालीन ,बहादुर ,चमचा,लाश

*पुर्तगाली शब्द* =
गमला
[9/11/2020, 12:53 PM] Ravi Prakash: *अदम्य (कुंडलिया)*
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पूजा उनकी कीजिए ,जिनमें शौर्य अदम्य
सत्ता से टकरा गए ,यह था दोष अ-क्षम्य
यह था दोष अ-क्षम्य ,वीर प्राणों पर खेले
हुई जेल में कैद , पुलिस बर्बरता झेले
कहते रवि कविराय ,नहीं है उन-सा दूजा
सच की जो आवाज ,सत्य की करते पूजा
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अदम्य = जिसका दमन न हो सके ,प्रचंड
[10/11/2020, 10:54 AM] Ravi Prakash: *विभा (कुंडलिया)*
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दीवाली का अर्थ है ,दीपक की जयकार
धन्य विभा उसकी हुई ,मिट्टी का आभार
मिट्टी का आभार , चंद्र से टक्कर लेता
हरा अमावस घोर ,ज्योति से भर-भर देता
कहते रवि कविराय ,बड़े जब होते खाली
पंक्तिबद्ध हो दीप , मना लेते दीवाली
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विभा = किरण , शोभा
[11/11/2020, 11:02 AM] Ravi Prakash: *अभिभूत (कुंडलिया)*
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बलशाली हनुमान थे , भक्त राम के दूत
वर्णन हनुमत का चरित ,कर देता अभिभूत
कर देता अभिभूत ,सिया का पता लगाया
पवन – पुत्र का शौर्य ,लाँघ सागर को पाया
कहते रवि कविराय ,लौटकर मनी दिवाली
धन्य – धन्य हनुमान ,श्रेय तुमको बलशाली
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अभिभूत = मुग्ध , भावविभोर , पराजित
[11/11/2020, 1:33 PM] Ravi Prakash: *सुनें आठ के पार (कुंडलिया)*
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असली धन है स्वास्थ्य ही ,सब सुख का आधार
धनतेरस का अर्थ यह , सुनें साठ के पार
सुनें साठ के पार , भोज में संयम लाएँ
नित अनुलोम – विलोम ,श्वास के गुर अपनाएँ
कहते रवि कविराय ,ठीक यदि हड्डी – पसली
समझो हो धनवान ,देह धन होती असली
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[12/11/2020, 3:47 PM] Ravi Prakash: *मेला (कुंडलिया)*
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मेले से कब रह सकी ,भीड़भाड़ अनिबद्ध
मतलब मेले का यही ,भीड़ें हों सन्नद्ध
भीड़ें हों सन्नद्ध , भीड़ का रेलमपेला
कोई खाता चाट ,खेल कोई है खेला
कहते रवि कविराय ,नहीं है लोग अकेले
संग मित्र परिवार ,भले लगते हैं मेले
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रचयिता :रवि प्रकाश ‘बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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नया शब्द : अनिबद्ध
अनिबद्ध = जो संबद्ध न हो ,असंबद्ध
[12/11/2020, 5:26 PM] Ravi Prakash: *माटी करे पुकार (कुंडलिया)*
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घूमा चाक कुम्हार का ,माटी करे पुकार
मालिक मेरे ओ सखा ,दे मुझको आकार
दे मुझको आकार ,दीप में ढल – ढल जाऊँ
घी – बाती के संग ,उजाला फिर फैलाऊँ
कहते रवि कविराय ,आयु दो दिन बस झूमा
करने जग उजियार ,दिवस दो दीपक घूमा
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*रचयिता : रवि प्रकाश , बाजार सर्राफा*
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[13/11/2020, 12:25 PM] Ravi Prakash: *त्राण (कुंडलिया)*
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मारा नरकासुर गया ,मिला जगत को त्राण
नारी के हाथों मरा ,नरकासुर खा बाण
नरकासुर खा बाण , दीप जो द्वार जलाते
यम को देते दान ,अभय जीवन में लाते
कहते रवि कविराय , अँधेरा देखो हारा
दीपक ने घनघोर ,अमावस तम को मारा
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_त्राण = रक्षा ,मुक्ति ,शरण ,आश्रय ,कवच_
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[14/11/2020, 8:56 AM] Ravi Prakash: *जलते दीपक कह रहे (कुंडलिया)*
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जलते दीपक कह रहे ,हम में क्या अनमोल
हँसकर केवल बोलते , सबसे हैं दो बोल
सबसे हैं दो बोल ,कलुष मन में कब रखते
देते हैं उजियार , अँधेरा मुख से चखते
कहते रवि कविराय ,स्वप्न आँखों में पलते
भरे नेह से दीप ,जगत के हित जब जलते
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[14/11/2020, 11:49 AM] Ravi Prakash: *मात्सर्य (कुंडलिया)*
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खाता रहता देह को , घुन जैसा मात्सर्य
रोग बुरा देता मरण , इसका नित सहचर्य
इसका नित सहचर्य ,आग में तन है जलता
जिसमें भी यह दोष ,फूलता है कब फलता
कहते रवि कविराय ,देख मन क्यों ललचाता
कुढ़ता व्यर्थ मनुष्य ,भाग्य जिसका जो खाता
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मात्सर्य = मत्सर , ईर्ष्या ,डाह
[15/11/2020, 11:02 AM] Ravi Prakash: *रिक्शा : स्त्रीलिंग या पुल्लिंग (कुंडलिया)*
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पहले रिक्शा *क्वीन* थी ,अब कहलाई *किंग*
*नारी* से लो हो गई ,बेचारी *पुल्लिंग*
बेचारी पुल्लिंग ,कहें क्या *रिक्शा आता*
*प्यारी* को अब छोड़ ,कहा *प्यारा* कब जाता ?
कहते रवि कविराय ,व्याकरण कुछ भी कह ले
रिक्शा है *लेडीज* , सदा से जैसे पहले
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क्वीन = रानी
किंग = राजा
लेडीज = महिला
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*नोट:* हम व्यवहार में रिक्शा को स्त्रीलिंग समझते थे ।
रिक्शा आ *रही* है
रिक्शा *खड़ी* है
रिक्शा *जाएगी*
रिक्शा पतली गली में नहीं जा *पाएगी*
आदि -आदि
फिर एक विद्वान महोदय ने बताया कि आप पर क्षेत्रीयता का प्रभाव है , दरअसल रिक्शा पुल्लिंग है।
हमने उनकी बात को स्वीकार किया लेकिन फिर भी रिक्शा का लेडीज से जेंट्स में बदल जाना दुखी करता रहा और एक कुंडलिया रच ली।
[15/11/2020, 1:44 PM] Ravi Prakash: उच्छ््वास (कुंडलिया)
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मरता तन जब आखिरी ,लेता है उच्छ््वास
उसको भी शायद हुआ ,मरने का आभास
मरने का आभास ,कष्ट से प्राण निकलते
जीवन के सब चित्र ,तेज गति से ज्यों चलते
कहते रवि कविराय ,विधाता मन की करता
भला-बुरा हर व्यक्ति ,काल के हाथों मरता
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उच्छ््वास = गहरी साँस , ग्रंथ का कोई अध्याय
[15/11/2020, 3:32 PM] Ravi Prakash: *सत्य राम का नाम (कुंडलिया)*
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गिनती की साँसें मिलीं ,फिर है पूर्ण विराम
फिर अर्थी जलती-चिता ,सत्य राम का नाम
सत्य राम का नाम ,राख मटकी भर आती
किसके कैसे काम ,सिर्फ गाथा रह जाती
कहते रवि कविराय ,ईश से यह ही विनती
भूलें होंगी साथ , नाथ मत करना गिनती
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[16/11/2020, 9:46 AM] Ravi Prakash: *मीना नकवी जी नमन ( कुंडलिया )*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
मीना नकवी जी नमन , सौ-सौ बार प्रणाम
गजलें जितनी भी लिखीं ,सभी दर्द के नाम
सभी दर्द के नाम , हमेशा पीड़ा गाई
अंतर्मन में फाँस , अश्रु रूदन तन्हाई
कहते रवि कविराय , सादगी में नित जीना
सदा रहेगा याद , नाम अति पावन मीना
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[16/11/2020, 12:23 PM] Ravi Prakash: *भैया दूज 【कुंडलिया】*
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अपने भारत देश में , पर्वों की भरमार
सदृश भैया दूज के , होता कब त्यौहार
होता कब त्यौहार , बहन – भाई का नाता
कर आपस में याद ,नीर नयनों में आता
कहते रवि कविराय ,सुखद बचपन के सपने
निभा रहे संबंध , जहाँ भी होते अपने
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रचयिता : रवि प्रकाश , बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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सदृश = समान , एक जैसा
[16/11/2020, 3:13 PM] Ravi Prakash: *अनिश्चित (कुंडलिया)*
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कल का किसको क्या पता ,दिन होगा या रात
मैत्री होगी भाग्य में ,या फिर होगा घात
या फिर होगा घात ,चाँद सूरज सब तारे
चमकेंगे या डूब , डूब जाएँगे सारे
कहते रवि कविराय ,पता क्या किसको कल का
जिओ आज का दौर ,अनिश्चित है सब कल का
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
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[18/11/2020, 10:53 AM] Ravi Prakash: *आतिशबाजी (कुंडलिया)*
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आतिशबाजी है बुरी ,लगती धन में आग
जलते बच्चे हैं बड़े , होता खूनी फाग
होता खूनी फाग , हादसे सौ – सौ होते
कुछ खोते हैं प्राण , निकट संबंधी रोते
रहते रवि कविराय ,करो अब सबको राजी
बर्बादी का काम , त्याज्य है आतिशबाजी
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
मोबाइल 99976 15451
[18/11/2020, 11:35 AM] Ravi Prakash: *जिंदगी (कुंडलिया)*
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रुकती कब है जिंदगी , चलती है अविराम
अविरत जीवन – पथ , सदा संघर्षों के नाम
संघर्षों के नाम , समस्या प्रतिदिन आती
आई निबटी एक , दूसरी फिर आ जाती
कहते रवि कविराय , कमर चाहे है झुकती
जब तक अंतिम साँस ,आस कब मन की रुकती
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रचयिता : रविप्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
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अविरत = विराम का अभाव ,नैरंतर्य , निरंतरता
[19/11/2020, 10:53 AM] Ravi Prakash: *याद (कुंडलिया)*
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जैसे हो सौदामिनी , आई कोई याद
आँखों में दीखी चमक ,मानो बरसों बाद
मानो बरसों बाद , पुरानी सारी बातें
गुजरे दिन थे साथ ,हजारों गुजरी रातें
कहते रवि कविराय ,मोड़ आते हैं कैसे
धुँधला हुआ अतीत ,एक सपना हो जैसे
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
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सौदामिनी = बादलों में चमकने वाली बिजली ,
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[19/11/2020, 11:34 AM] Ravi Prakash: *पहाड़ (कुंडलिया)*
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छूता है नभ को सदा , पर्वत तुंग स्वरूप
नदियाँ झरने झील हैं ,प्रभु का रूप अनूप
प्रभु का रूप अनूप ,कहीं दिखती है खाई
हिम आच्छादित दृश्य ,देखकर मति चकराई
कहते रवि कविराय ,कहाँ किसका है बूता
ईश्वर रचनाकार , तूलिका वह ही छूता
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*रचयिता ःरवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
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तुंग = पर्वत , प्रचंड , मुख्य
[19/11/2020, 12:40 PM] Ravi Prakash: *लक्ष्मीबाई (कुंडलिया)*
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लक्ष्मीबाई वीरता , साहस का था नाम
छेड़ा भारत के लिए , आजादी – संग्राम
आजादी-संग्राम ,युद्ध की निपुण खिलाड़ी
नहीं झुकाया शीश ,ध्वजा झाँसी की गाड़ी
कहते रवि कविराय ,वीरगति यद्यपि पाई
युगों – युगों तक याद , रहेंगी लक्ष्मीबाई
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
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[20/11/2020, 1:29 PM] Ravi Prakash: *दूज का चाँद (कुंडलिया)*
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आओ उनको दें नमन ,जो किसलय के दूत
जिनको देखा तो कहा ,जग ने अरे सपूत
जग ने अरे. सपूत , दूज के चाँद कहाते
छोटा है आकार , किंतु जो रहे सुहाते
कहते रवि कविराय ,देखने छत पर जाओ
दर्शन से है पुण्य ,देख नव – अंकुर आओ
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
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किसलय = कोंपल , नव पल्लव , अंकुर
[20/11/2020, 3:38 PM] Ravi Prakash: *नदियाँ पेड़ पहाड़ (कुंडलिया)*
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सबसे ज्यादा कीमती ,.नदियाँ पेड़ पहाड़
जिस युग में यह शुद्ध हैं ,देता झंडे गाड़
देता झंडे गाड़ , कलुष कलयुग में आया
दूषित है जलवायु , साँस में कष्ट समाया
कहते रवि कविराय ,बात भूले यह कब से
प्रकृति रखो अब साफ ,कहेंगे अब से सबसे
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रचयिता : रवि प्रकाश , बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 9997 615451
[21/11/2020, 1:51 PM] Ravi Prakash: *भारतवर्ष महान ( कुंडलिया )*
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अपना अनुपम देश है , भारतवर्ष महान
हिम आच्छादित तुंग हैं ,नदियाँ इसकी शान
नदियाँ इसकी शान , झूमती है हरियाली
कोयल भरकर तान ,कूकती डाली – डाली
कहते रवि कविराय ,देश लगता है सपना
दुनिया में सिरमौर ,हिंद का वैभव अपना
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
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अनुपम = अनूठा ,बेजोड़ ,अतुलनीय
[22/11/2020, 8:56 PM] Ravi Prakash: *नदी और समुद्र (कुंडलिया)*
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बोला नदिया से .उदधि ,देखो मेरी शान
गहराई मुझ में भरी , यह मेरी पहचान
यह मेरी पहचान ,सुना नदिया मुस्काई
बोली बीती उम्र ,बुद्धि अब तक कब आई
कहते रवि कविराय ,राज नदिया ने खोला
जिसमें भरी मिठास , बड़ा जो मीठा बोला
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*रचयिता : रवि प्रकाश , बाजार सर्राफा*
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उदधि = समुद्र
[23/11/2020, 11:19 AM] Ravi Prakash: *यह संसार असार 【कुंडलिया】*
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गाड़ी बँगला कोठियाँ , भरा स्वर्ण – भंडार
समझो मिट्टी यह जगत ,यह संसार असार
यह संसार असार ,वस्तुएँ आती – जातीं
बदले केवल रूप ,बदलते मालिक पातीं
कहते रवि कविराय ,सूट पहनो या साड़ी
कफन डालकर एक ,देह ले जाती गाड़ी
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
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*असार =* सारहीन ,व्यर्थ ,मिथ्या , माया
[24/11/2020, 11:34 AM] Ravi Prakash: *नायिका वह सुकुमारी (कुंडलिया)*
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मटकी लेकर चल पड़ी ,मन में प्रिय नीलाभ
रोम – रोम हर्षा रहा , मुखमंडल अमिताभ
मुखमंडल अमिताभ ,लगी मटकी कब भारी
चलती गति से तेज ,नायिका वह सुकुमारी
कहते रवि कविराय ,बात बस इतनी खटकी
होते पहिए चार , दौड़ती लेकर मटकी
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*नीलाभ =* जिसमें नीले रंग की आभा या झलक हो
*अमिताभ =* अति कांति युक्त , अत्यंत तेजस्वी
[24/11/2020, 3:57 PM] Ravi Prakash: *बलिदान (कुंडलिया)*
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काटा जिसने शीश को ,पापी औरँगजेब
दुनिया का सबसे बड़ा ,यह था एक फरेब
यह था एक फरेब , मजहबी कट्टरवादी
फैलाने निज – धर्म , क्रूरता पूर्वक आदी
कहते रवि कविराय ,हिंद का भीषण घाटा
तेग बहादुर शीश , तेग ने जिस दिन काटा
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“””””””””””””””””””●●●●●●●●●●●

“””””””””,””””””””””””””””””””””””””’
*फरेब* *=* छल , धोखा
*तेग =* तलवार
[25/11/2020, 10:55 AM] Ravi Prakash: *अनुस्वार और अनुनासिक (कुंडलिया)*
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लगता शुभ *अनु स्वार* तो , *चिंता* *गंदा* *गोंद*
वरना बन जाती *चिता* , *गदा* भाँजती *तोंद*
गदा भाँजती तोंद , चंद्र का बिंदु लगाओ
वरना होगा *हंस* , जगत में *हँसी* कराओ
कहते रवि कविराय ,व्याकरण सबको ठगता
भूले ज्ञानी लोग , चंद्रमा कैसे लगता
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[25/11/2020, 3:44 PM] Ravi Prakash: *अधूरी देह (कुंडलिया)*
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बच्चे का बचपन गया ,होता एक वयस्क
सहसा पाता एक दिन ,खुद को अन्यमनस्क
खुद को अन्यमनस्क , अधूरी देह सताती
चितवन कोई चैन , जिंदगी से ले जाती
कहते रवि कविराय ,नियम जग के सब सच्चे
होते लोग जवान , सदा रहते कब बच्चे
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अन्यमनस्क = अनमना ,जिसका चित्त कहीं और हो
[25/11/2020, 4:28 PM] Ravi Prakash: *पंडित राधेश्याम कथावाचक (कुंडलिया)*
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रामायण का बन चुके ,मतलब राधेश्याम
किया बरेली का सकल ,जग में ऊँचा नाम
जग में ऊँचा नाम ,खड़ी बोली में गाई
तुलसी के समरूप ,लोकप्रियता है पाई
कहते रवि कविराय ,लोग करते पारायण
श्रीयुत राधेश्याम , कथावाचक रामायण
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*पारायण =* किसी ग्रंथ का आदि से अंत तक नियमित पाठ
पंडित राधेश्याम कथावाचक की रामायण अत्यंत लोकप्रिय रही। 25 नवंबर 1890 को बरेली में जन्म हुआ । राधेश्याम रामायण के प्रारंभिक संस्करण पर उर्दू का प्रभाव है लेकिन बाद में यह इससे मुक्त होती चली गई । उदाहरणार्थ “अशोक वाटिका” खंड में एक स्थान पर शुरू में लिखा था:-
*इत्तिफाकिया नजर से गुजरा एक मुकाम*
इसके स्थान पर बाद के संस्करण में शब्दों में परिवर्तन करके यह लिखा गया :-
*अकस्मात देखा तभी एक मनोहर धाम*
[26/11/2020, 2:09 PM] Ravi Prakash: *तन जैसे बिन श्वास (कुंडलिया)*
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घूमा जग पाया नहीं ,परिमल – सा आभास
बड़ी-बड़ी बातें सुनीं ,तन जैसे बिन श्वास
तन जैसे बिन श्वास ,एक कृत्रिमता पाई
झूठी हर चमकार ,खोखली – सी परछाई
कहते रवि कविराय ,उच्च नभ किसने चूमा
बौना कद चहुँ ओर ,कौन शिखरों तक घूमा
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_परिमल = कुमकुम ,चंदन आदि के मलने/ रगड़ने से उत्पन्न सुगंध_
[26/11/2020, 4:21 PM] Ravi Prakash: *रुकता किसका काम (कुंडलिया)*
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आते – जाते लोग हैं ,जग की गति अविराम
किसके जाने से यहाँ ,रुकता किस का काम
रुकता किसका काम ,नहीं आती तरुणाई
नए – नए नित खेल ,यही जग की अच्छाई
कहते रवि कविराय ,विधाता नियम बनाते
पत्ते झड़ते वृद्ध , युवा नित नूतन आते
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[27/11/2020, 10:48 AM] Ravi Prakash: *नीड़ ( कुंडलिया )*
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मेले में ज्यों खो .गया ,ऐसी जग में भीड़
आपाधापी में बचा ,किसका अपना नीड़
किसका अपना नीड़ ,कहाँ दो पल टिक पाता
हुई सुबह तो काम ,रात गहरी घर आता
कहते रवि कविराय ,नहीं बच्चे सँग खेले
छूटा घर परिवार , भ्रमण तीर्थाटन मेले
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*नीड़ =* घोंसला ,आश्रय
[28/11/2020, 11:21 AM] Ravi Prakash: *मास्क (कुंडलिया)*
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मास्क लगाए ढंग से ,सौ में दस बस लोग
लापरवाही से बढ़ा , कोरोना का रोग
कोरोना का रोग , साठ जेबों में पटके
कुछ के बाँके मास्क ,जीभ जबड़ों में लटके
कहते रवि कविराय ,रोग ने रंग दिखाए
चेते पर कब लोग ,नहीं हैं मास्क लगाए
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[28/11/2020, 11:56 AM] Ravi Prakash: *गंगा (कुंडलिया)*
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गंगाजल अमृत कहो ,इसको कोटि प्रणाम
मुक्ति दिलाती यह नदी ,सत्य राम का नाम
सत्य राम का नाम ,जटा से शिव की आई
स्वर्गलोक की देन , भरी इसमें अच्छाई
कहते रवि कविराय ,हुआ रोगी तन चंगा
मन पवित्र अभिराम ,लगाओ डुबकी गंगा
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[28/11/2020, 12:36 PM] Ravi Prakash: *तूलिका (कुंडलिया)*
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अपनी – अपनी तूलिका ,अपने – अपने रंग
चित्र बनाने में जुटे , सब अपनों के संग
सब अपनों के संग ,कला सबने दिखलाई
कुछ का मध्यम कार्य ,प्रशंसा कुछ ने पाई
कहते रवि कविराय ,जिंदगी यूँ ही खपनी
किस्मत लेकर साथ ,चल रहे अपनी-अपनी
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*तूलिका =* लेखनी , कलम ,लिखने या चित्र बनाने की कूची
[28/11/2020, 8:03 PM] Ravi Prakash: *भागीरथी (कुंडलिया)*
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अद्भुत है भागीरथी , अनुपम इसका रूप
नदियों में इसकी छटा , रहती सदा अनूप
रहती सदा अनूप , मरण से मुक्ति – प्रदाता
तर जाता है जीव ,न जग में वापस आता
कहते रवि कविराय ,कृपा करना हे अच्युत
दो फिर से वरदान ,वही गरिमा फिर अद्भुत
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[28/11/2020, 9:56 PM] Ravi Prakash: *शादी के वह सेहरे (कुंडलिया)*
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शादी के वह सेहरे ,अब अतीत की याद
सदी गई जब बीसवीं ,हुए न उसके बाद
हुए न उसके बाद ,काव्य थे कविवर लिखते
मधुर स्वरों में पाठ ,लोग सुनते थे दिखते
कहते रवि कविराय , बताते दादा – दादी
बिना सेहरा – गीत , नहीं होती थी शादी
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[29/11/2020, 11:35 AM] Ravi Prakash: *सर्दी (कुंडलिया)*
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सर्दी में सूरज चढ़ा ,लेकिन मद्धिम ताप
नभ से किरणें गिर रहीं ,ठंडी होतीं आप
ठंडी होतीं आप ,समय का खेल निराला
गर्मी में था सूर्य ,आग का पिघला प्याला
कहते रवि कविराय ,उतरती मानो वर्दी
छिन जाती है ऐंठ ,सूर्य को खाती सर्दी
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“”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
*मद्धिम =* _धीमा ,मंद_
[29/11/2020, 12:46 PM] Ravi Prakash: *नहीं फेंके अब भोजन (कुंडलिया)*
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भोजन उतना लीजिए ,जितना खाएँ आप
छोड़ा थाली में अगर ,समझें यह है पाप
समझें यह है पाप , नहीं करिए बर्बादी
चाहे घर की दाल ,भोग – छप्पन की शादी
कहते रवि कविराय ,कदम से बनता योजन
कण-कण है अनमोल ,नहीं फेंके अब भोजन
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*योजन =* _अधिकांश विद्वानों के अनुसार 8 मील_
*कदम =* _पैरों से चलकर तय की गई लगभग 70 सेंटीमीटर की दूरी_
[30/11/2020, 11:31 AM] Ravi Prakash: *पर्वों का उत्साह (कुंडलिया)*
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बहती धरती पर नदी ,अंबर का जयघोष
डुबकी से वंचित रहे , करते हैं जन रोष
करते हैं जन रोष ,देव क्यों रोग निकाला
पर्वों का उत्साह , अब कहाँ पहले वाला
कहते रवि कविराय ,वाह ! क्या रौनक रहती
मेला लगता खूब ,भीड़ नदिया – सी बहती
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[30/11/2020, 2:10 PM] Ravi Prakash: *लेटर बॉक्स (कुंडलिया)*
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देखा बच्चों ने कहाँ ,जीवन का वह सत्र
लिखते थे यात्री पहुँच ,निजी कुशलता-पत्र
निजी कुशलता-पत्र ,बॉक्स-लेटर में डाला
डिब्बा गहरा लाल ,रोज खुलता था ताला
कहते रवि कविराय ,डाक थी जीवन-रेखा
बीते वर्ष तमाम , पत्र अब किसने देखा
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