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5..सुन प्रीतम की बात…कुंडलिया

Radhey shyam Pritam

Radhey shyam Pritam

कुण्डलिया

October 7, 2017

सुन प्रीतम की बात..कुंडलिया छंद
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हनीप्रीत की यारियां,बाबा का लोक रे।
डूबा आनंद भैया,जेल बना शोक रे।।
जेल बना शोक रे,दीजिए रे सफ़ाइयाँ।
कौन मानेगा वच,की जन से रुसवाइयाँ।
सुन प्रीतम की बात,मौजें पल की हैंं मीत।
बुराई छिप न सके,सोचिए तुम हनीप्रीत।
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2.कुंडलिया
**************************** राम नाम बदनाम कर,जेल रह बाबा जी।
बासी सब्जी खिलाकर,बंद ज्यों ढाबा जी।।
बंद ज्यों ढाबा जी,सच में राम नाम रटो।
कुछ सज़ा माफ़ होय,अच्छे कर्मों पर डटो।
सुन प्रीतम की बात,अच्छाई का है दाम।
शक्ति मिलेगी बहुत,जेल में रट भले राम।
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3..कुंडलिया
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तुम अपराध कर ख़ुश हो,परिणाम सोचे बिन।
विधाता ले बदला रे,अपराध को गिन-गिन।।
अपराध को गिन-गिन,कैसे बचोगे भैया।
एकदिन डूबेगी, यकीन से यार नैया।
सुन प्रीतम की बात,बुराइयाँ न होती गुम।
तुम भूल जाओ रे,प्रभु को याद रहते तुम।
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4..कुंडलिया
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काम छोटा बड़ा नहीं, मनुष्य की सोच है।
काम की पूजा होती,निम्न सोच लोच है।।
निम्न सोच लोच है,सोच बदल ऊपर उठो।
मानवता यश मिले,इससे तुम रे न रूठो।
सुन प्रीतम की बात,काम करे गूँजे नाम।
वरना ओझिल रहे,शामिल दाम और काम।
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5.कुंडलिया
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पति वय बैटरी रिचार्ज़ज़,दिन करवा चौथ।
पत्नी को ख़ुश कीजिए,न दिखाना तुम थौथ।।
न दिखाना तुम थौथ,संगिनी बिन क्या भैया।
पत्नी नाराज़ तो,दिल शक़ून खोय सैंया।
सुन प्रीतम की बात,व्रत में पत्नी प्रेम अति।
दुवा करती प्रभु से, लंबी उम्र पाए पति।
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6.कुंडलिया
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सावन की फुहार-सरिस,चाँद के दीद-सम।
तेरे प्यार का मिलना,प्रिय दिल उम्मीद-सम।।
प्रिय दिल उम्मीद-सम,सनम मेरी आत्मा हो।
तुम मिलो हँसू रूठो,ज़िंदगी का खात्मा हो।
सुन प्रीतम की बात,तुम हो यार मनभावन।
देख दिल ख़ुश होता,ज्यों आया मास सावन।
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7.कुंडलिया
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सुख शांति मिलते जहाँ,वहीं स्वर्ग है यार।
तनावग्रस्त जीवन तो,प्रथम नरक का द्वार।।
प्रथम नरक का द्वार,प्रेम भरे गीत गाओ ।
हाथ से हाथ यार,रे दिल से दिल मिलाओ।
सुन प्रीतम की बात,प्यार निकले खोलो मुख।
तभी आए घर में ,भागकर भैया रे सुख।
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राधेयश्याम
बंगालिया
“प्रीतम”
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