Jun 10, 2021 · कुण्डलिया
Reading time: 15 minutes

48 कुंडलियाँ अक्टूबर 2020

[1/10/2020, 11:05 AM] Ravi Prakash: #
#तरुवर (#कुंडलिया)
■■■■■■■■■■■■■■■■■
नीला नभ पर्वत महा ,तरुवर तुम्हें प्रणाम
झीलें झरने बह रहीं , सरिताएँ अभिराम
सरिताएँ अभिराम ,जगत का रूप सुहाना
तारे चंदा सूर्य , रोज गाते हैं गाना
कहते रवि कविराय ,फूल का रँग चटकीला
पीला हरा सफेद , लाल नारंगी नीला
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
तरुवर= उत्तम या बड़ा वृक्ष ,पेड़
[1/10/2020, 2:37 PM] Ravi Prakash: *नारी (कुंडलिया)*
◆◆◆◆◆◆◆◆
नारी को नर से मिला ,कभी प्रेम – वरदान
कभी मिला अभिशाप भी ,वहशी सिर्फ निशान
वहशी सिर्फ निशान ,वासना जब चढ़ जाती
बनता पुरुष पिशाच ,देख उसको घिन आती
कहते रवि कविराय , वेदना समझो भारी
नर के रहती बीच , कीच को सहती नारी
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[1/10/2020, 2:46 PM] Ravi Prakash: *वृद्ध (कुंडलिया)*
■■■■■■■
रहते हैं बूढ़े जहाँ ,घर के शिखर – समान
चरण सभी जन पूजते , देते हैं सम्मान
देते हैं सम्मान , बहू बेटे गुण गाते
पहले भोजन वृद्ध ,बाद में युवजन खाते
कहते रवि कविराय ,मोदमय झरने बहते
जहाँ वृद्ध आशीष , हर्ष से देकर रहते
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[2/10/2020, 8:51 AM] Ravi Prakash: *#दो अक्टूबर (#कुंडलिया)*
■■■■■■■■■■■■■■■■■
दो अक्टूबर को हुए , दो थे हिंद सपूत
लाल बहादुर सर्वप्रिय , गाँधी लाल अकूत
गाँधी लाल अकूत, सादगी – सीख सिखाई
चरखा था हथियार , मुक्ति भारत ने पाई
कहते रवि कविराय , किया था जीना दूभर
गोरे दिए पछाड़ ,धन्य तुम दो अक्टूबर
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 9997615451_
[2/10/2020, 12:47 PM] Ravi Prakash:
*#नीरवता (#कुंडलिया)*
■■■■■■■■■■■■■■■■■
तोड़ी नीरवता दिया ,मुखर क्रांति स्वर ओज
खादी चरखा शस्त्र थे ,गाँधी – पथ की खोज
गाँधी- पथ की खोज ,विनय – आंदोलन लाए
असहयोग के साथ ,आम-जन मिलकर आए
कहते रवि कविराय ,श्रंखला जन की जोड़ी
बापू पुण्य प्रणाम , गुलामी तुम ने तोड़ी
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*रचयिता : रवि प्रकाश , बाजार सर्राफा*
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
नीरवता = खामोशी, सन्नाटा ,मौन
[3/10/2020, 11:41 AM] Ravi Prakash: _
*नीलांबर (कुंडलिया)*
■■■■■■■■■■■■■■■■■■
आया ओढ़े दूर तक , नीलांबर आकाश
बोला मैं ही मुक्त हूँ ,बँधा न कोई पाश
बँधा न कोई पाश ,समय कब मुझे सताता
सीमा – रहित अनंत ,काल से मेरा नाता
कहते रवि कविराय ,पकड़ कब कोई पाया
सदा रहा स्वच्छंद ,हाथ में नभ कब आया
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
रचयिता :रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
नीलांबर = नीला वस्त्र ,शनि ग्रह , बलदेव
[3/10/2020, 4:00 PM] Ravi Prakash: *अफसर पुलिस उदास (कुंडलिया)*
■■■■■■■■■■■■■■■
नारी बेचारी हुई , कामुक पुरुष जमात
दिन में इज्जत लुट रही ,नहीं सुरक्षित रात
नहीं सुरक्षित रात , बात शहरों – गाँवों की
तपती नारी रोज , जगह दुर्लभ छाँवों की
कहते रवि कविराय ,दुखी किस्मत की मारी
अफसर पुलिस उदास ,लाज कब रखते नारी
■■■■■■■■■■■■■■■■■■■
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[4/10/2020, 8:03 AM] Ravi Prakash: *उधेड़बुन (कुंडलिया)*
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
बुनते-बुनते बुन गए ,सपने कई हजार
उधड़े तो फिर रह गए ,सपने बस दो-चार
सपने बस दो-चार ,बुने फिर रंग सुनहरे
फीके पड़ते रंग , चार दिन में सब गहरे
कहते रवि कविराय ,समय बीता सिर धुनते
आया तनिक न हाथ ,उधड़ते फिर-फिर बुनते
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
*रचयिता : रवि प्रकाश , बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश )*
मोबाइल 99976 15451
[4/10/2020, 7:44 PM] Ravi Prakash:
अकिंचन : कुंडलिया
■■■■■■■■■■■
करिए कृपा कृपालु प्रभु ,जान अकिंचन दास
जग से कुछ चाहूँ नहीं ,तुम बिन रहूँ उदास
तुम बिन रहूँ उदास ,आमजन मैं अज्ञानी
मामूली इंसान ,सर्व सुख के तुम दानी
कहते रवि कविराय ,सत्य शिव सुंदर भरिए
सात्विक मन के भाव ,शुद्ध आजीवन करिए
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 997615451
“”””””””””””””””””””””””””””
अकिंचन = दरिद्र ,मामूली ,गुमनाम
[5/10/2020, 5:12 PM] Ravi Prakash:
सौरभ (कुंडलिया)
■■■■■■■■■■■■■■■■
झूमा मौसम कह उठा ,सौरभ सुमन बहार
मनभावन इस गंध से ,सुरभित है संसार
सुरभित है संसार , पेड़ पौधे हरियाली
हँसमुख श्वेत कपोत ,कोकिला है मतवाली
कहते रवि कविराय ,पवन ने नभ को चूमा
नदियाँ झरने झील ,देखकर पर्वत झूमा
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश )
मोबाइल 99976 15451
सौरभ= सुगंध ,महक
[6/10/2020, 11:40 AM] Ravi Prakash:
*मंदार (कुंडलिया)*
■■■■■■■■■■■■■■■
देखा किसने है कहाँ , होता है मंदार
वृक्ष कहाँ इस लोक का ,हुआ लोक के पार
हुआ लोक के पार ,फूल – फल कैसे आते
जाने कैसी शाख ,स्वप्न में सिर्फ सुहाते
कहते रवि कविराय ,स्वर्ग की सीमा – रेखा
गया कौन परलोक ,मृत्यु को किसने देखा
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
मंदार = स्वर्ग का एक वृक्ष , धतूरा ,हाथी
[7/10/2020, 5:03 PM] Ravi Prakash:
*अपलक [कुंडलिया]*
■■■■■■■■■■■■■■■■■■■
अपलक देखें साँवरे , तुझको मेरे नैन
राधा बोली अब रहा ,मन में तनिक न चैन
मन में तनिक न चैन ,रात-दिन याद सताती
मनमोहन तुम मौन ,बाँसुरी तुम को भाती
कहते रवि कविराय ,उदय से सूर्य अस्त तक
राधा देखे श्याम ,बाबरी होकर अपलक
••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश )
मोबाइल 99976 15451
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
अपलक=बिना पलक झपकाए , एकटक, निर्निमेष
[9/10/2020, 5:00 PM] Ravi Prakash:
#उद्भ्रांत (#कुंडलिया )
■■■■■■■■■■■■■■■■
देखा धरती ने गगन , बोली मैं उद्भ्रांत
मुझमें कितनी व्यग्रता ,तू है कितना शांत
तू है कितना शांत ,राज यह जरा बताना
तुझसे लूँ कुछ सीख ,दीखता तू मस्ताना
कहते रवि कविराय ,दिखाया नभ ने लेखा
खालीपन था राज ,धरा का नभ ने देखा
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
*रचयिता : रवि प्रकाश , बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
उद्भ्रांत= घूमता हुआ,चकित,विह्वल ,विकल
[10/10/2020, 12:04 PM] Ravi Prakash:
*कुड़माई (कुंडलिया)*
■■■■■■■■■■■■■■■■
कुड़माई का अर्थ है , सपने कई हजार
इसमें दिल से दिल मिले ,दिल का यह त्यौहार
दिल का यह त्यौहार ,जुड़ा जीवन का नाता
अब जिस से संबंध ,साथ उससे ही भाता
कहते रवि कविराय ,बसंती ऋतु ज्यों छाई
लग जाते हैं पंख , हुई जिनकी कुड़माई
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
रचयिता : रवि प्रकाश , बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
कुड़माई= सगाई , शादी से पूर्व की जाने वाली रस्म
[10/10/2020, 4:39 PM] Ravi Prakash: *एक है सोना मिट्टी (कुंडलिया)*
■■■■■■■■■■■■■■
मिट्टी या सोना कहो ,ज्ञानी जानें सार
दोनों के भीतर बसी , मात्राएँ हैं चार
मात्राएँ हैं चार , अर्थ मिट्टी या सोना
छंद-शास्त्र अनुसार ,भार में फर्क न होना
कहते रवि कविराय ,वस्तु काली या चिट्टी
नश्वर जग निस्सार ,एक है सोना – मिट्टी
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[11/10/2020, 10:38 AM] Ravi Prakash:
संसृति ( कुंडलिया )
■■■■■■■■■■■■■■■■
जाने कब से चल रही ,संसृति माने कौन
बीते कितने युग हुए ,विगत आज भी मौन
विगत आज भी मौन ,मृत्यु के मुख में जाते
चंद्रलोक कुछ वर्ष ,लौटकर फिर हैं आते
कहते रवि कविराय ,बात सच सोलह आने
आत्मा में अमरत्व ,सिद्ध बस केवल जाने
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
रचयिता : रवि प्रकाश, बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
संसृति = प्रवाह , संसार में बार-बार जन्म लेने की परंपरा
[12/10/2020, 10:19 AM] Ravi Prakash:
*परिधि (कुंडलिया )*
■■■■■■■■■■■■■■■■
सिमटी परिधि समाज की ,हुई जाति पहचान
सबने आज समाज बस ,लिया जाति को मान
लिया जाति को मान , बंधुता – भाव घटाया
अपना – अपनी जाति , गैर का हुआ पराया
कहते रवि कविराय ,जाति की चिमटा- चिमटा
छाँट रहे दिन-रात ,सोच इस पर ही सिमटी
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
परिधि =बाहरी सीमा ,गोल घेरा, वृत्त की रेखा
[12/10/2020, 12:27 PM] Ravi Prakash: *अग्रोहा ( कुंडलिया )*
■■■■■■■■■■■■■■■■■
अग्रोहा अधिराज श्री ,अग्रसेन शुभ नाम
समरसता में जन रचे ,अतुलनीय था काम
अतुलनीय था काम ,अठारह गोत्र रचाए
भेदभाव से मुक्त , गीत समता के गाए
कहते रवि कविराय ,मानता है जग लोहा
वैसा बसा न एक ,लोक जैसा अग्रोहा
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[13/10/2020, 9:35 AM] Ravi Prakash: *छुट्टी का नकदीकरण ( कुंडलिया )*
■■■■■■■■■■■■■■
छुट्टी का नकदीकरण ,सुंदर समझो काम
छुट जाएगा इस तरह ,सरकारी आराम
सरकारी आराम , व्यर्थ की छुट्टी लेते
फर्जी कार्य – प्रमाण ,सहारे मिथ्या देते
कहते रवि कविराय ,चलो हो जाए कुट्टी
छुट्टी की सरकार ,ठीक है कर दो छुट्टी
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*रचयिता : रवि प्रकाश , बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
मोबाइल 99976 15451
[13/10/2020, 10:40 AM] Ravi Prakash: **
*ओट (कुंडलिया)*
★★★★★★★★★★★★★★★
सच्चे रहने की कला ,पाते कुछ ही जान
वरना छलने का हुनर ,अधुनातन है ज्ञान
अधुनातन है ज्ञान ,ओट में देखो रहते
जैसे गाढ़ा द्रव्य ,सजग हो – होकर बहते
कहते रवि कविराय ,देख लो जग में बच्चे
इनमें कहाँ फरेब , सिर्फ यह दिल के सच्चे
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
ओट= छिपने की आड़ ,छुपकर वार करना , शरण स्थल
[14/10/2020, 1:37 PM] Ravi Prakash:
*ओझल (कुंडलिया)*
■■■■■■■■■■■■■■■■■■
होता ओझल जा रहा ,देखा हुआ अतीत
समय सत्य कब लग रहा ,जो था साथ व्यतीत
जो था साथ व्यतीत ,फ्रेम में फोटो जड़ते
दूर लोक के लोग , जान ऐसे वह पड़ते
कहते रवि कविराय ,हृदय अक्सर है रोता
रहता कब कुछ पास ,दृष्टि से ओझल होता
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””‘
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
मोबाइल 99976 15451
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
ओझल = दृष्टि की सीमा से बाहर ,छिपा हुआ , गायब
[14/10/2020, 2:33 PM] Ravi Prakash: *नोटों का भंडार (कुंडलिया)*
■■■■■■■■■■■■■■■■■■
अच्छे जग में वह रहे ,जिनकी कोठी कार
रिश्वत खाकर घर भरा ,नोटों का भंडार
नोटों का भंडार , शान से जीवन जीते
मेवा मिश्रित दूध ,ठाठ से नियमित पीते
कहते रवि कविराय ,फटे हैं उनके कच्छे
जिनके उच्च विचार ,मूल्य जो ढोते अच्छे
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[15/10/2020, 10:33 AM] Ravi Prakash: __
*कसक (कुंडलिया)*
■■■■■■■■■■■■■■■■■
मन में सबके ही रही ,कोई कसक अनाम
देती रहती दर्द जो ,दुखद सदा परिणाम
दुखद सदा परिणाम ,विगत जब याद सताता
हृदय चीखकर घोर , वेदना से भर जाता
कहते रवि कविराय , पूर्णता चाहे तन में
रहती कसक सदैव ,कौंधती लेकिन मन में
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
कसक =दुखद अनुभव के स्मरण से होने वाली पीड़ा , टीस , खटक , पुराना द्वेष
[15/10/2020, 12:21 PM] Ravi Prakash: *चमचागिरी महान (कुंडलिया)*
■■■■■■■■■■■■■■■■■■
मक्खन मलिए मन लगा ,चमचागिरी महान
मक्खन मलना फायदा ,नहीं मला नुक्सान
नहीं मला नुकसान , बड़ा ऊँचा पद पाता
खुलते निधि के द्वार ,स्वर्ण भर-भर कर लाता
कहते रवि कविराय,सुनो मक्खन असली धन
दिन को दूनी रात , चौगुनी करता मक्खन
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[15/10/2020, 12:30 PM] Ravi Prakash: *बाँटे शीर्ष महापुरुष( कुंडलिया )*
■■■■■■■■■■■■■■■■
बाँटे शीर्ष महापुरुष ,जाति – सभा अनुसार
महापुरुष पर हो गया ,इनका ही अधिकार
इनका ही अधिकार ,महा – जन रहते रोते
जाति – सभा के लोग ,चित्र को इनके ढोते
कहते रवि कविराय ,जातियों ने जन छाँटे
देखी पहले जाति ,बाद में उनको बाँटे
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*रचयिता : रवि प्रकाश , बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 999761 5451_
[16/10/2020, 10:43 AM] Ravi Prakash: __
*कपाल (कुंडलिया)*
■■■■■■■■■■■■■■■■■
करता रहता सर्वदा , सबका काम *कपाल*
कुछ को साधारण मिला ,कुछ को मिला कमाल
कुछ को मिला कमाल ,दूर की कौड़ी लाते
ऐसे चिंतनशील , सोच कब दूजे पाते
कहते रवि कविराय ,काल अपने पग धरता
अंतिम – क्रिया कपाल ,पुत्र रो-रोकर करता
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””””'”””””‘
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
कपाल =ललाट ,खोपड़ी
[16/10/2020, 1:02 PM] Ravi Prakash: *क्रांति (कुंडलिया)*
★★★★★★★★★★★★★★
भरिए वसुधा में महक ,सद्भावों का चाव
मन भीतर पावन रहे ,रिपु का रहे अभाव
रिपु का रहे अभाव ,सत्यता को अपनाएँ
जहाँ रहें हम गीत ,प्रीति शुचिता के गाएँ
कहते रवि कविराय ,क्रांति कण-कण में करिए
यही राह है मित्र ,बीज अंतर में भरिए
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””””‘”””
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[16/10/2020, 1:37 PM] Ravi Prakash: *सपने 【कुंडलिया】*
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
सपने जब तक पल रहे ,उत्साही इंसान
उम्र भले ही साठ हो ,तब तक कहो जवान
तब तक कहो जवान ,सीखना रोज जरूरी
नए सृजन से बंधु ,कभी रखना मत दूरी
कहते रवि कविराय ,दौर सब ही हैं अपने
यौवन की पहचान ,उम्र से ज्यादा सपने
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[17/10/2020, 1:14 PM] Ravi Prakash: _
*ओछा (कुंडलिया)*
■■■■■■■■■■■■■■■■■■
मिलिए उनसे जो नहीं ,करते ओछा काम
उच्च विचारों से जुड़ा ,जिनका हो बस नाम
जिनका हो बस नाम ,वचन हर तरह निभाएँ
सदा ठोस व्यवहार ,बात में जो दिखलाएँ
कहते रवि कविराय ,पास बैठा कर खिलिए
भीतर से गंभीर , धीर लोगों से मिलिए
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
ओछा= तुच्छ, हीन,हल्का , छिछोरा ,जिसमें गंभीरता न हो
[17/10/2020, 8:08 PM] Ravi Prakash: *अग्रसेन को पूजिए ( कुंडलिया )*
🍁🌺🍁🌺🍁🌺🍁🌺
अग्रसेन को पूजिए , राजा हुए महान
जीव – दया संदेश था ,इनका रहा प्रधान
इनका रहा प्रधान , अठारह गोत्र बनाए
नगर – निवासी एक , छत्र के नीचे आए
कहते रवि कविराय ,न भूलो मधुर देन को
समरस सरस समाज , प्रदाता अग्रसेन को
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*अग्रोहा ( कुंडलिया )*
■■■■■■■■■■■■■■■■■
अग्रोहा अधिराज श्री ,अग्रसेन शुभ नाम
समरसता में जन रचे ,अतुलनीय था काम
अतुलनीय था काम ,अठारह गोत्र रचाए
भेदभाव से मुक्त , गीत समता के गाए
कहते रवि कविराय ,मानता है जग लोहा
वैसा बसा न एक ,लोक जैसा अग्रोहा
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*राज्य अद्भुत अग्रोहा ( कुंडलिया )*
■■■■■■■■■■■■■■■
अग्रोहा फिर से मिले ,फिर से राजा अग्र
अग्रवाल भावुक हृदय ,भीतर से है व्यग्र
भीतर से है व्यग्र ,गोत्र फिर नए चलाओ
करो अठारह यज्ञ ,अहिंसा फिर से लाओ
कहते रवि कविराय ,मानता है जग लोहा
धन में समतावान ,राज्य अद्भुत अग्रोहा
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
[18/10/2020, 8:43 PM] Ravi Prakash: _
*भैरवी (कुंडलिया)*
■■■■■■■■■■■■■■■
वंदन हे माँ भैरवी , दुर्गा नाम प्रधान
बलशाली जग ने कहा ,चामुंडा यश गान
चामुंडा यश – गान , कीर्ति माँ तेरी गाते
निर्मल सात्विक भाव ,संपदा तुझसे पाते
कहते रवि कविराय ,हरो जग का माँ क्रंदन
कोटि-कोटि शत बार ,तुम्हारा हे माँ वंदन
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””’
भैरवी = दुर्गा ,पार्वती ,चामुंडा नामक देवी
[19/10/2020, 10:22 AM] Ravi Prakash: __
*यति ( कुंडलिया )*
■■■■■■■■■■★■■■■
पूजे जाते हैं सदा , संन्यासी यति लोग
जीवन जिनका त्यागमय ,तुच्छ जानते भोग
तुच्छ जानते भोग ,जगत का हित नित करते
जग में रह निष्काम ,बीच जन नित्य विचरते
कहते रवि कविराय ,नहीं मिलते जन दूजे
जिन पर रख विश्वास ,लोक निष्ठा से पूजे
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 9997 615451*
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
यति = तपस्वी , त्यागी
[20/10/2020, 1:38 PM] Ravi Prakash: __
*इंदु (कुंडलिया)*
■■■■■■■■■■■■■■■■■
देखा नभ को एक दिन ,पाया मद्धिम इंदु
जैसे कोई रह गया , छोटा – मोटा बिंदु
छोटा-मोटा बिंदु ,रोज फिर बढ़ता जाता
होता गोल-मटोल ,पूर्णिमा दिन जब आता
कहते रवि कविराय ,यही परिवर्तन-रेखा
होती रत्ती-सेर ,विश्व का क्रम यह देखा
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
इंदु = चंद्रमा , कपूर
[20/10/2020, 3:41 PM] Ravi Prakash: _
*चक्की (कुंडलिया)*
■■■■■■■■■■■■■■■■■
चक्की में गेहूँ पिसा , चलते दोनों हाथ
कसरत पूरी हो रही ,दिल-दिमाग के साथ
दिल-दिमाग के साथ , रोज का ताजा आटा
गेहूँ का भंडार , नहीं आटे का घाटा
कहते रवि कविराय ,देखकर हक्की-बक्की
बोली बहू नवीन , हाय ! ऐसी थी चक्की
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[20/10/2020, 6:31 PM] Ravi Prakash: *मोदी जी का संदेश ( कुंडलिया )*
■■■■■■■■■■■■■■■
लापरवाही मत करो ,खतरा अब भी जान
मोदी जी का देश को ,यह संदेश प्रधान
यह संदेश प्रधान ,पिता-सम सीख सिखाते
अब भी फैला रोग , महामारी बतलाते
कहते रवि कविराय ,मास्क की आदत चाही
रहिए दो गज दूर , न करिए लापरवाही
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””””'”””””””
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[21/10/2020, 11:40 AM] Ravi Prakash: *आद्या ( कुंडलिया )*
■■■■■■■■■
जग की आद्या शक्ति हे ,माता तुम्हें प्रणाम
बुद्धि प्रदाता सौम्यमय ,दाता तुम सुखधाम
दाता तुम सुखधाम ,हृदय पावन कर जातीं
तुमसे नवनिधि आठ ,सिद्धियाँ हम तक आतीं
कहते रवि कविराय ,धूलि माँ दे दो पग की
कटती सारी व्याधि ,प्राप्त पद-रज से जग की
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””””‘””””””””””
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””‘””””””””
आद्या = दुर्गा ,मास की प्रथम तिथि
[22/10/2020, 11:20 AM] Ravi Prakash: *अमेय (कुंडलिया)*
■■■■■■■■■
माता का वरदान नर , पाता सदा अमेय
अद्भुत मनभावन रहा , माँ का दिव्य प्रदेय
माँ का दिव्य प्रदेय ,सिंह की बनी सवारी
अति घातक तलवार ,हाथ में शोभित प्यारी
कहते रवि कविराय ,अभय वर की है दाता
कात्यायनी स्वरूप , चार भुजधारी माता
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 9997615451*
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
_अमेय = असीम , जिसे जाना न जा सके_
[23/10/2020, 11:57 AM] Ravi Prakash: *मालविका (कुंडलिया)*
■■■■■■■■■■■
देवी दुर्गा हैं जहाँ ,मालविका का वास
चरणों में बैठी हुई ,लगता यह आभास
लगता यह आभास ,उच्च शिखरों से नाता
करके सिंह सवार ,जहाँ माता को लाता
कहते रवि कविराय ,वायुमंडल की सेवी
मालविका तुम धन्य ,निकट हो दुर्गा देवी
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
मालविका = ऊँचे पहाड़ों की एक लता
[25/10/2020, 7:41 PM] Ravi Prakash: *याम ( कुंडलिया )*
■■■■■■■■■■■■■■■■
सब जन रावण से दुखी ,कहते आओ राम
प्रभु अब तो अवतार लो ,रटते आठों याम
रटते आठों याम , असुर ने सिया चुराई
गलती थी अक्षम्य , राम ने करी चढ़ाई
कहते रवि कविराय ,नाभि में अमृत था धन
सोखा प्रभु ने धन्य ,हर्ष में डूबे सब जन
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
रचयिता : रविप्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
*याम* = समय ,काल ,तीन घंटे का काल
[26/10/2020, 11:15 AM] Ravi Prakash: *मंजरी (कुंडलिया)*
■■■■■■■■■■■■■■■
पूजा तुलसी की करें ,अर्पण नित आभार
इसके होने मात्र से , पर्यावरण सुधार
पर्यावरण सुधार ,नित्य तुलसीदल खाएँ
लगी मंजरी शुष्क ,यत्न से भेंट चढ़ाएँ
कहते रवि कविराय ,न पावन पौधा दूजा
इसीलिए हर रोज ,विश्व ने इसको पूजा
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
मंजरी = आम के बौर ,कोंपल ,तुलसी
[27/10/2020, 12:46 PM] Ravi Prakash: *कंचन (कुंडलिया)*
■■■■■■■■■■■■■■■■■
कंचन – काया हो गई ,मटकी भर कर राख
कहता काल मनुष्य से ,यही तुम्हारी साख
यही तुम्हारी साख ,चार दिन तन का मेला
एक दिवस फिर अंत ,छोड़ जग चला अकेला
कहते रवि कविराय ,भूमिका का बस मंचन
मिला किसी को काँस्य ,रजत कुछ पाते कंचन
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
कंचन = सोना ,धन-संपत्ति ,निरोग
[28/10/2020, 11:48 AM] Ravi Prakash: *मंथर (कुंडलिया)*
■■■■■■■■■■■■■■■■■
चलता मंथर गति मनुज ,मगर चला अविराम
मंजिल तक पहुँचा वही , सौ – सौ उसे प्रणाम
सौ – सौ उसे प्रणाम , परिश्रम जो नित करता
किस्मत देती साथ , चौकड़ी देखो भरता
कहते रवि कविराय ,शशक में आलस पलता
धावक यद्यपि तीव्र , कूर्म से पीछे चलता
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
मंथर = धीमा ,मंदबुद्धि ,स्थूल

शशक = खरगोश

कूर्म = कछुआ
[29/10/2020, 10:52 AM] Ravi Prakash: _
*चाय (कुंडलिया)*
■■■■■■■■■■■■■■■■■■
पहले कप से चाय के ,खुलती कहाँ खुमार
चस्का जिसको लग गया ,पीता है दो बार
पीता है दो बार , दूसरा चषक जगाता
पेय चाय क्या वाह , पात्र मस्ती ले आता
कहते रवि कविराय ,जमाना कुछ भी कह ले
सुबह चाहिए चाय ,नहाकर सबसे पहले
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
*रचयिता : रवि प्रकाश , बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
“”””””””””””””””””””””””””””””'”””‘”””””””””””
_चषक = प्याला_
[29/10/2020, 11:27 AM] Ravi Prakash: *कनक (कुंडलिया)*
■■■■■■■■■■■■■■■■■
पाता – खाता जो कनक ,सदा एक तासीर
मदमाता फिरने लगा ,हुआ बाढ़ का नीर
हुआ बाढ़ का नीर ,सदा आपे को खोता
कहे चौगुना वीर ,स्वयं को जितना होता
कहते रवि कविराय दिखा जग में बौराता
घातक कनक सदैव ,व्यक्ति जो पाता-खाता
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
_कनक = सोना , धतूरा,_
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””’
_तासीर (अरबी शब्द है) = असर , प्रभाव_
[29/10/2020, 5:13 PM] Ravi Prakash: *शरद पूर्णिमा (कुंडलिया)*
■■■■■■■■■■■■■■■■■
आती यों तो पूर्णिमा , सभी माह की रात
किंतु शरद के चाँद की ,अलग खास कुछ बात
अलग खास कुछ बात ,रात्रि में अमृत झरता
रखी पात्र में खीर ,तत्व – रस भीतर भरता
कहते रवि कविराय ,कौमुदी स्वास्थ्य बढ़ाती
महारास की रात , क्वार में यह ही आती
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””‘
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर( उत्तर प्रदेश )*
*मोबाइल 9997615451*
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
कौमुदी = चाँदनी
[29/10/2020, 10:03 PM] Ravi Prakash
*केतली (कुंडलिया)*
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
लेकर चलते केतली , करिएगा तो गौर
ऐसे पीते चाय को ,कितने हैं जन और
कितने हैं जन और ,होंठ पर प्यारा प्याला
जिह्वा का ले स्वाद ,चाय में तन को ढाला
कहते रवि कविराय ,तृप्ति अंतर को देकर
पीते हैं अविराम , केतली कर में लेकर
••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[30/10/2020, 10:59 AM] Ravi Prakash: *कदंब (कुंडलिया)*
■■■■■■■■■■■■■■■■■
बजती बंसी कृष्ण की ,यमुना तट पर रास
शोभित पेड़ कदंब के ,शरद पूर्णिमा खास
शरद पूर्णिमा खास ,फूल लघु पीले छाते
कादंबरी विशेष , पेय प्रिय मादक पाते
कहते रवि कविराय ,सुंदरी गोपी सजती
महारास का नृत्य ,बाँसुरी मोहक बजती
••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
*_कदंब* = कदम नामक वृक्ष , समूह_
*_कादंबरी* = कदंब के पेड़ से निकलने वाला द्रव_
[31/10/2020, 10:47 AM] Ravi Prakash: *विटप (कुंडलिया)*
■■■■■■■■■■■■■■■■■■
बढ़ते पौधे इसलिए ,उनमें विटप – विधान
एक तने से सौ नई , शाखा हुईं महान
शाखा हुईं महान ,विजय – उल्लास मनाते
नए-नए विस्तार ,मधुर शाखों पर पाते
कहते रवि कविराय ,वही ऊँचाई चढ़ते
सबका लेकर साथ ,जिंदगी में जो बढ़ते
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
विटप = पेड़ या लता की नई शाखा , झाड़ी

7 Views
Copy link to share
Ravi Prakash
44 Posts · 657 Views
Follow 2 Followers
You may also like: