Jun 10, 2021 · कुण्डलिया
Reading time: 11 minutes

39 कुंडलियां जुलाई 2020

[2/7/2020, 10:52 AM] Ravi Prakash: *त्यागो चीनी माल (कुंडलिया)*
— *—————————–*
चीनी चीजों से बचो , खुद से करो सवाल
बनो आत्मनिर्भर सदा ,त्यागो चीनी माल
त्यागो चीनी माल ,देश- निर्मित अपनाओ
भारत का व्यापार ,उच्च नभ तक ले जाओ
कहते रवि कविराय ,दवा कड़वी पर पीनी
हँसकर सहो अभाव ,भाव मत देना चीनी
– *———————————–*
*रचयिता : रवि प्रकाश , बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 999761 5451_
[4/7/2020, 7:41 PM] Ravi Prakash: चित्र पर आधारित कविता
*गगरी (कुंडलिया)*
– *—————————*
लेकर गगरी चल पड़ी ,हीरोइन विख्यात
शूटिंग में सबने कहा ,वाह वाह क्या बात
वाह वाह क्या बात ,दूर पनघट था जाना
लेकिन कंटक एक ,राह में था अनजाना
कहते रवि कविराय ,कड़े गोरी के तेवर
बोली अब के बाद ,न दीखूँ गगरी लेकर
— *—————————–*
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश )*
_मोबाइल 99976 15451_
[5/7/2020, 9:20 AM] Ravi Prakash: चित्र पर आधारित एक और कविता
*गगरी भाग-2 (कुंडलिया)*
——————————-
पानी का संकट बढ़ा ,नल में पानी बंद
चली फ्लैट से षोडशी ,गगरी लेकर मंद
गगरी लेकर मंद ,राह में जंगल आया
काँटो की भरमार ,एक ने इश्क लड़ाया
कहते रवि कविराय ,याद तब आई नानी
बोली जगत खराब ,नहीं अब भरना पानी
———————————————–
*रचयिता :रवि प्रकाश, बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[6/7/2020, 12:36 PM] Ravi Prakash
*मानो निकली भोर (कुंडलिया)*
– *———————————*
धरती बंजर दूर तक ,मरुस्थल था चहुँ ओर
फिर भी पौधा उग गया ,मानो निकली भोर
मानो निकली भोर ,चीर धरती को आया
बोला मैं उत्साह , नाम आशा कहलाया
कहते रवि कविराय ,कृपा माँ अंबा करती
अचरज बारंबार , देह में भरती धरती
— *——————————–*
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[7/7/2020, 11:23 AM] Ravi Prakash: _चित्र पर आधारित कविता_
*मोबाइल पर ध्यान (कुंडलिया)*
*——————————-*
बच्चे पर है ध्यान कब ,मोबाइल पर ध्यान
माँ की ममता इस तरह ,होती लहूलुहान
होती लहूलुहान ,दूध की बोतल रोती
बच्चा गिरा धड़ाम ,शौक में माँ पर खोती
कहते रवि कविराय ,दृश्य यह दिखते सच्चे
माँ खुद में मशगूल ,पड़े औंधे मुँह बच्चे
– *—————————–*
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[7/7/2020, 4:16 PM] Ravi Prakash: *लटका मुख पर मास्क (कुंडलिया)*
— *————————–*
लटका मुख पर मास्क है ,दिखती पूरी नाक
साँसों को ले – दे रही ,नियमों को रख ताक
नियमों को रख ताक ,नजर कुछ यह भी आए
दिखे होंठ फिर दाँत ,बोल में कण बिखराए
कहते रवि कविराय ,रोज यह डर है खटका
पटक नहीं दे रोग ,काल बन सिर पर लटका
— *——————————-*
रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा, रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[11/7/2020, 12:47 PM] Ravi Prakash:
*गुब्बारे सौ – सौ लिए (कुंडलिया)*
– *———————————*
आओ लौटें फिर चलें ,बचपन के दिन संग
गुब्बारे सौ – सौ लिए , जाने कितने रंग
जाने कितने रंग ,पहाड़ों पर चढ़ जाएँ
देखें बादल दूर , मस्तियाँ ले – ले आएँ
कहते रवि कविराय ,देवता वर दे जाओ
तन में फिर उत्साह ,बालपन लेकर आओ
– *————————-*
*रचयिता : रवि प्रकाश , बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[13/7/2020, 4:29 PM] Ravi Prakash: *चार दिन होता मिलना (कुंडलिया)*
— *———————————–*
मिलना जग में भाग्य से ,मिलते अच्छे लोग
चार दिवस की जिंदगी ,होते शुभ संयोग
होते शुभ संयोग ,बिछड़ मिलते नर- नारी
पल दो पल आह्लाद ,जीव पाता संसारी
कहते रवि कविराय ,सुमन का जैसे खिलना
नश्वर जग निस्सार ,चार दिन होता मिलना
— *————————————*
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 999761 5451*
[13/7/2020, 4:37 PM] Ravi Prakash: *निर्धन धनिक समान (कुंडलिया)*
— *—————————-*
कोरोना से लड़ रहे ,निर्धन धनिक सामान
सबको यह डँसता दिखा ,सबकी लेता जान
सबकी लेता जान , उपेक्षा इसकी भारी
करता काम तमाम ,गई जिसकी मति मारी
कहते रवि कविराय ,मास्क आवश्यक होना
दो गज रहिए दूर , मार खाए कोरोना
——————————-
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[14/7/2020, 11:20 AM] Ravi Prakash: *साठ बरस के हो गए (हास्य कुंडलिया)*
●●●●●●●●●●●●●●●●●●
साठ बरस के हो गए ,हुए सीनियर आज
बोले पचपन पर टिका ,माने मुझे समाज
माने मुझे समाज ,आज से पचपन बोलूँ
उम्र हो गई साठ ,राज हरगिज मत खोलूँ
कहते रवि कविराय ,श्वेत बालों में बस के
उम्र कह रही रोज ,हुए हम साठ बरस के
★★★★★★★★★★★★★★
*रचयिता : रवि प्रकाश , बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[14/7/2020, 11:42 AM] Ravi Prakash
*मीरा भक्ति प्रधान ( कुंडलिया )*
★★★★★★★★★★★★★★★★
अर्पण प्रभु को हो गई ,मीरा भक्ति- प्रधान
डूबी ऐसी याद में ,खुद का रहा न ध्यान
खुद का रहा न ध्यान ,प्रीति का रंग चढ़ाया
मनमोहन संबंध , साँवरे संग बढ़ाया
कहते रवि कविराय ,रूप दिखलाता दर्पण
भक्तों में सिरमौर ,भक्त मीरा का अर्पण
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 9997615451_
[14/7/2020, 2:35 PM] Ravi Prakash: *झूला (कुंडलिया)*
*~~~~~~~~~~~~~*
झूला सावन बारिशें , काले मेघ फुहार
सजी-धजी हैं नारियाँ ,ऋतु खुद में त्यौहार
ऋतु खुद में त्यौहार ,पवन मस्ती है लाती
नन्हीं – नन्हीं बूँद ,मेघ नभ से बरसाती
कहते रवि कविराय ,बाग पेड़ों को भूला
दुर्लभ कोयल कूक , ढूँढ़ना पड़ता झूला
— *———————————*
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[15/7/2020, 9:49 AM] Ravi Prakash: *सावन का वरदान (कुंडलिया)*
★★★★★★★★★★★★★★
सूखी है मन की नदी ,खिली धूप चहुँ ओर
बादल आएँ जल लिए ,गरजें अब तो घोर
गरजें अब तो घोर ,बूँद टप – टप बरसाएँ
नभ से पड़े फुहार , गीत भीगे मन गाएँ
कहते रवि कविराय ,देह धरती की रूखी
सावन का वरदान ,भीगती दुनिया सूखी
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*रचयिता : रवि प्रकाश , बाजार सर्राफा*
*रामपुर ( उत्तर प्रदेश )*
📞 99976 15451
[15/7/2020, 11:58 AM] Ravi Prakash: *लोभ जब खींचे मन को ( कुंडलिया )*
~*~~~~~~~”|~~~~”~~~~~~””~*
धन को चाहें निम्न जन ,उच्च लोग सम्मान
कुछ सुख सुविधा जानते ,रहती इनमें जान
रहती इनमें जान ,मान की कीमत जानो
यह सबसे बहुमूल्य ,इसे ही जीवन मानो
कहते रवि कविराय ,लोभ जब खींचे मन को
लाओ बुद्धि विवेक ,तुच्छ ठुकराओ धन को
“” *””~~~””~~~~””””~~~~”~~~”””*
*रचयिता :रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[17/7/2020, 11:37 AM] Ravi Prakash: *मुख पर बाँधो मास्क (कुंडलिया)*
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
कोरोना है इस समय , फैला चारों ओर
बिन-लक्षण कुछ दिख रहे ,कुछ में लक्षण घोर
कुछ में लक्षण घोर ,मान सबमें बीमारी
सबसे रहिए दूर , जानकर खतरा भारी
कहते रवि कविराय ,हाथ साबुन से धोना
मुख पर बाँधो मास्क ,जानलेवा कोरोना
■■■■■■■■■■■■■■■■■
रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश )
मोबाइल 99976 15451
[17/7/2020, 3:18 PM] Ravi Prakash: *खूँटी का अब काम (कुंडलिया)*
¿ *¿¿¿¿¿¿¿¿¿¿¿]¿¿¿¿¿¿*
कोरोना से लड़ रहे ,सबसे ज्यादा कान
जैसे नींवों पर टिका ,ऊँचा एक मकान
ऊँचा एक मकान ,मास्क की डोरी लादे
अब तक दिखे वजीर ,आजकल दिखते प्यादे
कहते रवि कविराय ,कान की किस्मत ढोना
खूँटी का अब काम ,शेष जब तक कोरोना
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*रचयिता : रवि प्रकाश , बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[18/7/2020, 6:10 PM] Ravi Prakash: *वर्षा ऋतु (कुंडलिया)*
★★★★★★★★★★★★★★★
रानी ऋतुओं की हुई , वर्षा की पहचान
इसकी चाल अदा अलग ,इसकी अद्भुत शान
इसकी अद्भुत शान , मेघ काले मतवाले
मस्त डोलती वायु ,शाम में खुद को ढाले
कहते रवि कविराय ,गगन से बरसा पानी
हर्षित वृद्ध जवान , देखकर बरखा रानी
■■■■■■■■■■■■■■■■■■
*रचयिता : रवि प्रकाश , बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[19/7/2020, 8:53 AM] Ravi Prakash: *मास्क ( कविता )*
●●●●●●●●●●
छोटी सी है चीज पर ,करता मास्क कमाल
हमें बचाता मौत से ,बन जाता है ढाल
बन जाता है ढाल , रोक कोरोना पाता
आते जो कीटाणु ,मार यह दूर भगाता
कहते रवि कविराय , बात यह समझो मोटी
बड़े काम की चीज ,मास्क मत समझो छोटी
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451
[19/7/2020, 12:19 PM] Ravi Prakash: *धन्य श्रोता (कुंडलिया)*
★★★★★★★★★
खुलकर ताली से करें ,प्रोत्साहित सौ बार
कवि की कविता चाहती ,श्रोता से सत्कार
श्रोता से सत्कार , खून दो बूँद बढ़ाता
वाह -वाह की गूँज ,शब्द मन को हर्षाता
कहते रवि कविराय ,धन्य श्रोता जो घुलकर
चलते कवि के साथ ,दाद देते हैं खुलकर
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[19/7/2020, 8:03 PM] Ravi Prakash: *होती कब बरसात (कुंडलिया)*
■■■■■■■■■■■■■
आते हैं बादल घने , घिर – घिर आती रात
सूखी है धरती मगर , होती कब बरसात
होती कब बरसात , पेड़ – पौधे मुरझाए
नभ मे उमस प्रकोप , रोग हैं सौ-सौ छाए
कहते रवि कविराय , झूठ बातें बतियाते
काला तन-मन प्राण , मेघ बिन पानी आते
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*रचयिता : रवि प्रकाश , बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[21/7/2020, 3:33 PM] Ravi Prakash: _
*दुनिया का अब टूर ( कुंडलिया )*
शादी जैसे ही हुई , बोली दुल्हन हूर
मिस्टर जी लेकर चलो ,दुनिया का अब टूर
दुनिया का अब टूर , सुना पति जी घबराए
रूठ न जाना जान ,बोलकर दौड़े आए
कहते रवि कविराय ,जेब कड़की की आदी
कोरोना का काल ,लाद ली सिर पर शादी
*रचयिता : रवि प्रकाश , बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)* 9997615451_
[22/7/2020, 12:17 PM] Ravi Prakash: *बनता कृत्रिम चित्र (कुंडलिया)*
●●●●●●●●●●●●●●●●
चाहत सबकी है यही ,सुंदर – सी तस्वीर
दर्पण में देखें अगर ,दीखें माखन-खीर
दीखें माखन-खीर ,नजर अलबेले आएँ
यौवन हो अविराम ,रूप की खान कहाएँ
कहते रवि कविराय ,बात यह देती राहत
बनता कृत्रिम चित्र ,पूर्ण होती है चाहत
★★★★★★★★★★★★★★
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर( उत्तर प्रदेश )*
_मोबाइल 9997615451_
[23/7/2020, 9:34 AM] Ravi Prakash: *नारी का त्यौहार (कुंडलिया)*
★★★★★★★★★★★★★★★
सावन झूला मेघ पर ,नारी का अधिकार
सुंदर सजती मेंहदी ,नारी का त्यौहार
नारी का त्यौहार ,नारियाँ तीज मनातीं
बूँदें लेकर भेंट ,पास नारी के जातीं
कहते रवि कविराय , रूप वर्षा मनभावन
पकड़े नारी बाँह , देखिए गाती सावन
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*रचयिता : रवि प्रकाश , बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[24/7/2020, 10:42 AM] Ravi Prakash: *किसने जीती मौत (कुंडलिया)*
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
किसको अमृत है मिला , किसने जीती मौत
तन दो दिन का है अतिथि ,मरण मानिए सौत
मरण मानिए सौत , डाह तन से यह करती
राजा हो या रंक , देह सब ही की मरती
कहते रवि कविराय ,चार दिन रहकर खिसको
जीवन-गति अविराम ,फर्क पड़ता है किसको
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[25/7/2020, 10:24 AM] Ravi Prakash: *डुबकी में निष्णात( कुंडलिया )*
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
बिस्कुट डोबो चाय में ,कलाकार का काम
बिस्कुट यदि डूबा नहीं ,होगा जग में नाम
होगा जग में नाम ,चाय को भर – भर लाए
लेकिन पहली शर्त , डूबने से बच जाए
कहते रवि कविराय , लोक से रखिएगा पुट
डुबकी में निष्णात ,लौट आता ज्यों बिस्कुट
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर ( उत्तर प्रदेश )*
_मोबाइल 99976 15451_
[26/7/2020, 10:58 AM] Ravi Prakash: *मंदिर का निर्माण ( कुंडलिया )*
★★★★★★★★★★★★★★★
आया शुभ दिन राम के ,मंदिर का निर्माण
धनुष आज सार्थक हुआ ,लक्ष्य सिद्ध है बाण
लक्ष्य सिद्ध है बाण, भव्य भारत की गाथा
स्वाभिमान का गीत , गा रहा ऊँचा माथा
कहते रवि कविराय , देश में मंगल छाया
धन्य राम की भूमि ,राम – युग त्रेता आया
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[26/7/2020, 7:33 PM] Ravi Prakash: *लाइक और कमेंट (कुंडलिया)*
👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍
दाता इतने दीजिए ,लाइक और कमेंट
दिखें हमारे होंठ पर ,खुशियाँ परमानेंट
खुशियाँ परमानेंट ,प्लीज यह काम कराएँ
जीतें करें कमाल ,धाक हर ओर जमाएँ
कहते रवि कविराय ,फेसबुक तब ही भाता
लाइक और कमेंट , थोक में देते दाता
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[27/7/2020, 9:33 AM] Ravi Prakash: *जनता लापरवाह (कुंडलिया)*
😷😷😷😷😷😷😷😷😷😷
पहने हैं कुछ मास्क को ,बना कंठ का हार
कुछ ने रक्खा जेब में ,जैसे धन – भंडार
जैसे धन – भंडार ,भीड़ में घुस – घुस जाते
दो गज की क्या बात ,नाक से मुख टकराते
कहते रवि कविराय ,रोग खुश है क्या कहने
जनता लापरवाह ,मास्क ढँग से कब पहने
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
*रचयिता : रवि प्रकाश , बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[27/7/2020, 10:04 PM] Ravi Prakash: *अंतर्आत्मा की आवाज ( कुंडलिया )*
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
अंतर में आत्मा बसी ,मिली सड़क पर आज
बोली सुनता कौन है , मेरी अब आवाज
मेरी अब आवाज , न सुन इस्तीफा देता
मेरा प्यारा नाम , कौन अब मुख से लेता
कहते रवि कविराय , हुई मैं अब छूमंतर
राजनीति में मौन , नहीं बसती अब अंतर
———————————————-
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[27/7/2020, 10:06 PM] Ravi Prakash: *कोरोना और कविवर (हास्य कुंडलिया)*
— *——————————*
कोरोना को मिल गए ,कविवर तुक्कड़बाज
बोला छोडूँगा नहीं , पकड़ा तुमको आज
पकड़ा तुमको आज ,श्रेष्ठ कवि कब घबराए
जमकर सारे छंद , गीतिका – गीत सुनाए
कहते रवि कविराय ,बोर आखिर था होना
भागा पीछा छोड़ , दूर सौ फिट कोरोना
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[27/7/2020, 10:21 PM] Ravi Prakash: *साँसे (कुंडलिया)*
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
साँसे लेना सोचिए , है कितना आसान
कब लीं कब छोड़ी गईं ,किसको रहता भान
किसको रहता भान ,साँस से जीवन पाते
मुश्किल की तब बात ,छोड़ खाली हो जाते
कहते रवि कविराय ,एक दिन देती झाँसे
थक जाती है देह , हाँफ कर आती साँसे
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[28/7/2020, 11:30 AM] Ravi Prakash: _
*एक छाते के द्वारा (कुंडलिया)*
☔☔☔☔☔☔☔☔☔☔
सर्दी गर्मी सह रहे , मालिक और मजूर
बारिश की बूँदें रहीं , बोलो किससे दूर
बोलो किससे दूर ,भीग जाता तन सारा
लेकिन उठता हाथ ,एक छाते के द्वारा
कहते रवि कविराय ,नेह की पहने वर्दी
मालिक देता रोक ,धूप वर्षा या सर्दी
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*रचयिता : रवि प्रकाश , बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[28/7/2020, 7:23 PM] Ravi Prakash: *पाँच तिथि आई प्यारी (कुंडलिया)*
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
बनता देखा देश ने , मंदिर आलीशान
सारा भारत कह उठा ,धन्य धन्य भगवान
धन्य धन्य भगवान , धन्य महिमा तुम्हारी
पाँच शतक के बाद ,पाँच तिथि आई प्यारी
कहते रवि कविराय ,दीप उत्सव ज्यों मनता
पूजन हर्ष अपार , योग भादो में बनता
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*रचयिता : रवि प्रकाश , बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[29/7/2020, 11:47 AM] Ravi Prakash: *शुगर लेकिन दुखदाई (हास्य कुंडलिया)*
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
हलवाई को देखिए , बैठा लिए दुकान
मेवा की पंजीरियाँ , जलेबियों के घान
जलेबियों के घान , इमरती शक्करपारा
सुंदर कालाजाम , श्वेत रसगुल्ला प्यारा
कहते रवि कविराय ,शुगर लेकिन दुखदाई
चखने से मजबूर , आह भरता हलवाई
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[30/7/2020, 12:43 PM] Ravi Prakash: *नदियाँ पेड़ पहाड़ (कुंडलिया)*
●●●●●●●●●●●●●●●●●
नदियाँ पेड़ पहाड़ हैं , जीवन का आधार
इनकी रक्षा जो करें , उनका बेड़ा पार
उनका बेड़ा पार , मनुज को जीवन देते
यह दाता अविराम , नेह बस केवल लेते
कहते रवि कविराय ,लोभ-बिन बीती सदियाँ
जिंदा पेड़ पहाड़ , आज भी जिंदा नदियाँ
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*रचयिता : रवि प्रकाश , बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[30/7/2020, 1:00 PM] Ravi Prakash: *हम भी पूरे साठ ( कुंडलिया )*
★★★★★★★★★★★★★
होने को तो हो रहे , हम भी पूरे साठ
लेकिन अब तक कब पढ़े ,जीवन के सब पाठ
जीवन के सब पाठ ,काल अनुभव सिखलाता
टूट रहे संबंध , रोज कुछ जुड़ता नाता
कहते रवि कविराय ,देह बाकी खोने को
कहती है सौ पास , आयु पूरी होने को
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[30/7/2020, 1:21 PM] Ravi Prakash: *रोज मैंने कुछ सीखा (कुंडलिया)*
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
सीखा सब आकर यहीं , थोड़ा-थोड़ा ज्ञान
कुछ जाना कुछ रह गया ,अब भी मैं नादान
अब भी मैं नादान , गलतियाँ होती रहतीं
फिर भी पाकर *वाह* ,अश्रु धाराएँ बहतीं
कहते रवि कविराय ,धन्य जिनको गुण दीखा
मैं अवगुण भंडार , रोज मैंने कुछ सीखा
■■■■■■■■■■■■■■■■■■
*रचयिता : रवि प्रकाश , बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश )*
_मोबाइल 99976 15451_
[31/7/2020, 9:40 AM] Ravi Prakash: *जलते दीपक कह रहे (कुंडलिया)*
•••••••••••••••••••••••••••••••••
जलते दीपक कह रहे ,धन्य – धन्य हे राम
भारत को दो पूर्णता , स्वाभिमान अविराम
स्वाभिमान अविराम ,गर्व का क्षण सुख छाया
मंदिर का निर्माण ,आज जन-जन को भाया
कहते रवि कविराय ,स्वप्न अब सुंदर पलते
पूजो श्री दरबार ,दीप झिलमिल कर जलते
🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_

5 Views
Copy link to share
Ravi Prakash
44 Posts · 650 Views
Follow 2 Followers
You may also like: