Jun 10, 2021 · कुण्डलिया
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34 कुंडलियां जून एक से 10 तक 2021

[01/06, 9:16 AM] Ravi Prakash: *गिरा रहे उत्साह (कुंडलिया)*
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बुरा बताना केंद्र को ,कुछ का यह ही काम
सुबह उठे पानी पिया ,कोसा फिर अविराम
कोसा फिर अविराम , देश पीछे ले जाते
राष्ट्र – नीति पर प्रश्न ,चतुर यह रोज लगाते
कहते रवि कविराय , बेसुरा इन का गाना
गिरा रहे उत्साह , कार्य हर बुरा बताना
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*पानी पीकर कोसना* = यह एक मुहावरा है
जिसका अर्थ कुटिलतापूर्वक अनिष्ट की
इच्छा से किसी के पीछे पड़ना होता है
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[01/06, 10:06 AM] Ravi Prakash: *रहस्यमय व्याधि (कुंडलिया)*
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फैली नभ में व्याधियाँ ,मुश्किल में है जान
कैसे अब जिंदा रहे , घर – बाहर इंसान
घर – बाहर इंसान , साँस लेने से डरता
सेवन कर विष- वायु ,काल के हाथों मरता
कहते रवि कविराय , हवा बोलो क्यों मैली
यह रहस्यमय व्याधि ,कहो जग में क्यों फैली
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नभ = आसमान ,आकाश
व्याधि = रोग ,बीमारी
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रचयिता : रवि प्रकाश, बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[01/06, 11:03 AM] Ravi Prakash: *खेती-बाड़ी (कुंडलिया)*
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खेती – बाड़ी अब कहाँ ,सब की प्रथम पसंद
शहरों में जाने लगा , कृषक आय जब मंद
कृषक आय जब मंद ,प्रवासी बन कर जाता
दो पैसे का कार्य , दूर करके हर्षाता
कहते रवि कविराय , चल रही ऐसे गाड़ी
हुआ कृषक कृशकाय ,छोड़कर खेती-बाड़ी
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बाड़ी = वाटिका ,फुलवारी
खेती-बाड़ी = कृषि कर्म
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रचयिता : रवि प्रकाश, बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 9997 61 5451
[01/06, 4:40 PM] Ravi Prakash: *मोर (कुंडलिया)*
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सबसे अच्छा मानिए , जंगल में बस मोर
अपनी धुन में नाचता ,मस्ती में चहुँ ओर
मस्ती में चहुँ ओर ,शहर से रखा न नाता
लेता खुलकर साँस ,गंध मधुरिम है पाता
कहते रवि कविराय ,नाचता जाने कब से
जाना शहर न बँधु ,नम्र हो कहता सब से
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 9997 615451
[03/06, 10:38 AM] Ravi Prakash: *विश्व पटल (कुंडलिया)*
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चलता रहता है पटल ,कब हो पाया मौन
इसके ऊपर क्या असर ,जीवित या मृत कौन
जीवित या मृत कौन ,जगत का चक्र अनूठा
इसका अर्थ न खास ,हँसा या कोई रूठा
कहते रवि कविराय ,मरण दो दिन बस खलता
तीजे के फिर बाद ,विश्व पहले – सा चलता
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*तीजा* = दाह संस्कार के तीसरे दिन होने
वाला शोक
*पटल* = मेज ,पट्ट ,बोर्ड ,तख्ता ,छप्पर
आवरण ,पर्दा
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*रचयिता : रवि प्रकाश* , बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[04/06, 9:40 AM] Ravi Prakash: *दालमोठ (कुंडलिया)*
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हुई मिठाई से अधिक ,चर्चित चारों ओर
सबके घर में चल रहा ,दालमोठ का जोर
दालमोठ का जोर , शुगरवाले भी खाते
लगता मुंह को स्वाद ,वाह सब कहते जाते
कहते रवि कविराय ,सभी ने पास बिठाई
दालमोठ सिरमौर , हेय अब हुई मिठाई
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हेय = तुच्छ
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[04/06, 11:21 AM] Ravi Prakash: *मृगनयनी (कुंडलिया)*
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बढ़कर बाणों से हुई , मृगनयनी की मार
आंखों के भीतर छिपा , प्रेमराग का सार
प्रेमराग का सार , नयन मतवाले काले
बच पाता तब कौन , सुंदरी डोरे डाले
कहते रवि कविराय ,भाग्य लाया वह गढ़कर
जाता है जो डूब , नयन में दो बढ़-बढ़कर
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नयनी = आंख की पुतली
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[04/06, 11:51 AM] Ravi Prakash: *आत्मीय बंधु ,कवि मित्र श्री राजीव प्रखर जी(मुरादाबाद) के जन्म दिवस के अवसर पर सप्रेम भेंट*
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*प्रखर कहें सब लोग (कुंडलिया)*
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जीवन जीना चाहिए , प्रखर कहें सब लोग
हास्य सदा मिश्रित रहे , चेतनता का योग
चेतनता का योग , कला हर मन को भाए
रोता आया व्यक्ति , हँसा कर जग से जाए
कहते रवि कविराय ,गरल हँस-हँस कर पीना
लगे न कोई दाग , बंधु यों जीवन जीना
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
*रचना तिथि : 4 जून 2021*
[04/06, 4:52 PM] Ravi Prakash: *सास-बहू (हास्य कुंडलिया)*
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नया जमाना आ गया ,रही सास कब खास
जींस पहन बहुएँ चलीं , घूँघट ओढ़े सास
घूँघट ओढ़े सास , आज की बहुएँ भारी
देती रहतीं ज्ञान ,सास को दिन-भर सारी
कहते रवि कविराय ,गुरु गूगल को माना
मोबाइल – निष्णात ,बहू अब नया जमाना
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निष्णात = पारंगत ,खूब अच्छी तरह जानने
की समझ
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[04/06, 10:34 PM] Ravi Prakash: *तारीखें पड़ती रहीं (कुंडलिया)*
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तारीखें पड़ती रहीं , हुए दशक बर्बाद
न्याय मिले जल्दी सुलभ ,आई किसको याद
आई किसको याद , कोट काले का खर्चा
जेवर बिके मकान , सब जगह यह ही चर्चा
कहते रवि कविराय , मुकदमों से यह सीखें
करते शुरू जवान , वृद्ध जाते तारीखें
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[05/06, 12:43 PM] Ravi Prakash: *पर्यावरण दिवस 【5 जून】पर विशेष*
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*नगपति {कुंडलिया}*
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वर दो नगपति देवता ,अचल सिंधु का प्यार
पेड़ हरे पौधे मधुर , मिले स्वास्थ्य उपहार
मिले स्वास्थ्य उपहार ,धरा पावन कर जाओ
नदियाँ हों निर्दोष , वायु नित स्वच्छ बहाओ
कहते रवि कविराय ,हरित सुषमा सब कर दो
खुल कर लें सब साँस ,देवता यह शुभ वर दो
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नगपति = भगवान शिव ,हिमालय पर्वत
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[05/06, 1:33 PM] Ravi Prakash: *समोसा ( कुंडलिया )*
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गरम समोसा खा रहा , पूरा हिंदुस्तान
यूपी और बिहार हो ,या फिर राजस्थान
या फिर राजस्थान ,सभी के मन को भाता
आलू इसका प्राण ,भरा सुंदर – सा जाता
कहते रवि कविराय ,प्लेट में गया परोसा
दो खाकर मन तृप्त ,चाय से गरम समोसा
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रचयिता : रवि प्रकाश , बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[05/06, 1:45 PM] Ravi Prakash: *मठरी (कुंडलिया)*
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मठरी है सबसे भली ,आटे की नमकीन
घी में यह जाती तली ,करके छेद महीन
करके छेद महीन , घरों में सबके भाती
सँग में अगर अचार ,स्वाद दोगुना बढ़ाती
कहते रवि कविराय ,बाँधकर जाता गठरी
जब मानव परदेस ,काम तब आती मठरी
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रचयिता : रवि प्रकाश, बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[05/06, 2:20 PM] Ravi Prakash: *सेब (कुंडलिया)*
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रहना चाहें स्वस्थ तो , खाएँ प्रतिदिन सेब
बीमारी आती नहीं , घटती तनिक न जेब
घटती तनिक न जेब , तरोताजा तन रहता
जैसे निर्मल वायु , चित्त वैसे ही बहता
कहते रवि कविराय ,सेब-गुण का क्या कहना
सदा चाहिए सेब , एक – दो घर में रहना
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*रचयिता: रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश )
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[05/06, 7:47 PM] Ravi Prakash: *दही (कुंडलिया)*
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खाओ भल्ला या बड़ा ,होता दही कमाल
खाने में इसकी कहीं ,मिलती नहीं मिसाल
मिलती नहीं मिसाल , रायता होता प्यारा
नुकती का यदि मेल ,विश्व मोहित फिर सारा
कहते रवि कविराय ,आयु मस्तिष्क बढ़ाओ
दही कटोरी एक ,याद से नियमित खाओ
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रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[05/06, 8:12 PM] Ravi Prakash: *कचौड़ी-भोज (कुंडलिया)*
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गरम कचौड़ी यदि सिंकी , बाकी सब फिर फेल
पतले – आलू रायता , गंगाफल का मेल
गंगाफल का मेल , श्रेष्ठतम भोज कहाता
मिलता यह जिस रोज ,भाग्यफल खिल-खिल जाता
कहते रवि कविराय , प्लेट हलवे की दौड़ी
खा कर मन है तृप्त , धन्य हे गरम कचौड़ी
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रचयिता : रवि प्रकाश, बाजार सर्राफा
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[06/06, 2:16 PM] Ravi Prakash: *प्रियतम (कुंडलिया)*
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प्रियतम तुम हमको मिले ,अहोभाग्य शत बार
ईश्वर का वंदन करें , दें उसको आभार
दें उसको आभार , तुम्हें हम से मिलवाया
पाणि-ग्रहण सौभाग्य ,दिवस जब तुमको पाया
कहते रवि कविराय ,रहा जीवन में कब गम
तुमको पाया प्राण ,बाँह में जब से प्रियतम
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[06/06, 3:35 PM] Ravi Prakash: *काजू कतली (कुंडलिया)*
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काजू की कतली लगे , मानो गोरी मेम
बाकी को ज्यों कह रही ,शेम शेम जी शेम
शेम शेम जी शेम , रंग पर यह इतराती
पतली नाजुक चाल ,शुगर कम ही पड़वाती
कहते रवि कविराय ,गगन बबलू या राजू
सब की प्रथम पसंद ,मिठाई कतली काजू
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रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[06/06, 3:53 PM] Ravi Prakash: *गुलाब जामुन (कुंडलिया)*
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रस में डूबी का मजा , गरमा – गरम परात
दो गुलाब जामुन सदा , खाती रही बरात
खाती रही बरात , मिठाई सबको भाती
फोकी वृहदाकार , तृप्त मन को कर जाती
कहते रवि कविराय ,दिखी तो कब मन बस में
चखते सब मिष्ठान , दौड़कर डूबी रस में
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फोकी = मुलायम
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रचयिता : रवि प्रकाश, बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[06/06, 4:20 PM] Ravi Prakash: *झेलते जीवनसाथी (हास्य कुंडलिया)*
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मिलता जीवन में किसे , साथी पूर्ण पसंद
कुछ के होंठ अधिक खुले ,कुछ के मिलते बंद
कुछ के मिलते बंद , जिंदगी गुजरा करती
कुछ सच्ची कुछ झूठ ,झेलती रही विचरती
कहते रवि कविराय ,पुष्प कब मन का खिलता
सोचा करते रोज ,काश कुछ मन का मिलता
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रचयिता : रवि प्रकाश, बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[07/06, 12:21 PM] Ravi Prakash: *अग्रसेन-संदेश (कुंडलिया)*
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खाएँ पशु को मारकर ,आदिम-युग का ज्ञान
अग्रसेन जी ने कहा , दया करो इंसान
दया करो इंसान , प्रेम करुणा उपजाओ
सब जीवों में एक , ब्रह्म का भाव बढ़ाओ
कहते रवि कविराय ,अभय पशु नर से पाएँ
खाएँ मनुज न मांस ,साग-सब्जी-फल खाएँ
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*आदिम* = जो बहुत पुराना अविकसित आरंभिक हो
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[07/06, 9:21 PM] Ravi Prakash: *मूँग की दाल (कुंडलिया)*
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खाने में हल्की रही , मधुर मूँग की दाल
शहर मुरादाबाद का , यह है एक कमाल
यह है एक कमाल ,सुबह ठेलों पर मिलती
पत्ता खाते एक ,तबीयत खाकर खिलती
कहते रवि कविराय , दावतों में जाने में
दिखी मूँग की दाल ,मध्य शोभित खाने में
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तबीयत = शरीर अथवा मन की स्थिति
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[07/06, 9:37 PM] Ravi Prakash: *लड्डू मोतीचूर (कुंडलिया)*
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खाते सदियों से सभी , लड्डू मोतीचूर
खुशियों का मौसम जहाँ ,रहते कभी न दूर
रहते कभी न दूर , ब्याह पूजा वरदाई
लड्डू करते चार , पूर्णता रस्म सगाई
कहते रवि कविराय ,आजकल महंगे आते
घी के लेकिन शुद्ध ,रसिक लड्डू ही खाते
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मोतीचूर के लड्डू = नुकती( बूंदी )को चीनी की चाशनी में मिलाकर बनने वाली सुंदर और स्वादिष्ट गोलाकार मिठाई
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रचयिता : रवि प्रकाश, बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[07/06, 10:14 PM] Ravi Prakash: *हलवा (कुंडलिया)*
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हलवा खाने में मधुर , होता है स्वादिष्ट
सब मिठाइयों से अलग ,यह अत्यंत विशिष्ट
यह अत्यंत विशिष्ट , काम पूजा में आता
आठे – नौमी हेतु , बनाया यह ही जाता
कहते रवि कविराय ,बला का इसका जलवा
खाते भर – भर मोद ,लोग दोनो में हलवा
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*बला* = उच्च कोटि का शानदार
*जलवा* = रौनक ,सुंदर प्रदर्शन
*मोद* = प्रसन्नता
*दोने* = सामान्यतः पेड़ के पत्ते से बना पात्र
*आठे-नौमी* = दुर्गा-अष्टमी तथा रामनवमी
पर घर-घर में हलवा बनाकर
खाया और खिलाया जाता है
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[08/06, 11:26 AM] Ravi Prakash: *रवि (कुंडलिया)*
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आओ ढूँढें क्या हुए , रवि के सुंदर नाम
सूर्य दिवाकर भानु ने , किए एक ही काम
किए एक ही काम ,प्रभाकर भास्कर सविता
अर्क तरणि आदित्य ,नमन दिनकर की कविता
कहते रवि कविराय , अंशुमाली में पाओ
कवि दिनेश मार्तंड , ढूँढ कर ले – ले आओ
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*रवि के पर्यायवाची =* सूर्य ,दिवाकर ,भानु
,प्रभाकर ,भास्कर ,सविता ,अर्क ,तरणि
,आदित्य ,दिनकर ,अंशुमाली ,दिनेश ,मार्तंड
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*रचयिता : रवि प्रकाश* , बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[08/06, 1:03 PM] Ravi Prakash: *लेखनी (कुंडलिया)*
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चलती जग में लेखनी , करती रही कमाल
जिसने जो कुछ लिख दिया ,जिंदा सौ-सौ साल
जिंदा सौ – सौ साल , नहीं अक्षर हैं मरते
कागज कलम किताब ,क्रांति दुनिया में करते
कहते रवि कविराय ,अग्नि ज्वाला ज्यों जलती
ईंधन समझो भाव , लेखनी लेकर चलती
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[08/06, 5:02 PM] Ravi Prakash: *पगड़ी पहनी (हास्य कुंडलिया)*
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पगड़ी पहनी जन्म में , सिर्फ एक ही बार
घोड़ी पर बैठे चले , जैसे हों सरकार
जैसे हों सरकार , समझते खुद को राजा
आगे – आगे बैंड , बजाता चलता बाजा
कहते रवि कविराय , फीस जाती है तगड़ी
होता कभी न ब्याह ,बिना बाजा बिन पगड़ी
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश )
मोबाइल 99976 15451
[09/06, 9:36 AM] Ravi Prakash: *बड़-मावस (दो कुंडलियाँ)*
1️⃣
आओ सोचें जन सभी ,बड़-मावस का अर्थ
बिना पेड़-पौधे हवा ,ऑक्सीजन सब व्यर्थ
ऑक्सीजन सब व्यर्थ ,शुद्ध परिवेश बनाएँ
शाखा बड़ की एक ,सैकड़ों उप – शाखाएँ
कहते रवि कविराय ,वृक्ष बरगद अपनाओ
बड़ – पूजन के हेतु , विश्व मानवता आओ
2️⃣
पूजा जिसने वृक्ष – वट ,उसको मिलती आयु
सदियों से देता रहा ,सदा स्वच्छ जलवायु
सदा स्वच्छ जलवायु ,खींच यम से यह लाता
सत्यवान के प्राण , पेड़-वट सिर्फ बचाता
कहते रवि कविराय ,स्वास्थ्यदाता कब दूजा
बड़ – मावस पर वृक्ष , इसलिए हमने पूजा
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
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*बड़-मावस :* दो हजार से अधिक वर्षों से बरगद भारत के प्राकृतिक सौंदर्य की जिजीविषा को अभिव्यक्त करता रहा है । बड़-मावस इसी भाव का एक सुंदर आध्यात्मिक प्रतीकात्मक त्यौहार है। बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर इसके मोटे तने तथा वृहदाकार मांसल तथा चिकनी पत्तियों को निहार कर भला किसे आनंद की अनुभूति नहीं होगी ? इसलिए जेठ के महीने की अमावस्या को बरगद का पेड़ अर्थात वट-वृक्ष पूजने की परंपरा अर्थात बड़-मावस का त्यौहार भारत जैसे हरियाली से संपन्न देश की आध्यात्मिक परंपरा से उपजा हुआ एक अनूठा आयोजन है । यह केवल किसी सावित्री द्वारा अपने पति सत्यवान को मृत्यु के मुँह से बचा कर ले आने का त्यौहार-मात्र नहीं है । यह प्रकृति की गोद में स्वच्छ जलवायु की शरण में जाकर जीवन की पुनर्स्थापना का त्यौहार है । इसका अर्थ है पेड़ों को आदर । स्वच्छ जलवायु को प्राथमिकता । ऑक्सीजन की प्रचुरता की आवश्यकता की ओर समाज का ध्यानाकर्षण । इन्हीं सब से तो बड़-मावस का त्यौहार बनता है । बरगद के पेड़ की पूजा केवल एक वृक्ष की नहीं अपितु प्रकृति में व्याप्त हरीतिमा के अभिनंदन का त्यौहार है । पेड़ के चारों तरफ डोर बाँधना वृक्षों की रक्षा का व्रत है। हजारों साल बाद भी इन त्यौहारों की वैज्ञानिक उपयोगिता कम नहीं हुई है ,बल्कि कई गुना बढ़ गई है।
【 *लेखक : रवि प्रकाश* 】
[09/06, 10:44 AM] Ravi Prakash: *आम (कुंडलिया)*
🥭🥭🥭🥭🥭🥭🥭🥭🥭
फल का राजा जानिए , मीठा – मीठा आम
लँगड़ा चौसा दशहरी , कलमी इनके नाम
कलमी इनके नाम , काट कर फाँकें खाते
पतले रस के आम , चूसनी हैं कहलाते
कहते रवि कविराय , दूध सँग खाओ ताजा
जामुन का यह मित्र ,स्वास्थ्यप्रद फल का राजा
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फाँके = फल को चाकू से काटकर किए जाने वाले हिस्से
जामुन = काले रंग का छोटा फल
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[09/06, 12:38 PM] Ravi Prakash: *मृदुल (कुंडलिया)*
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रखना सबको चाहिए , सुंदर मृदुल विचार
सरस सुकोमल से सदा , हो मन का श्रंगार
हो मन का श्रंगार , नेह की धार बहाओ
सब में जानो ब्रह्म ,ऐक्यता गुण उपजाओ
कहते रवि कविराय ,भेद का भाव न चखना
कहो जगत सब मित्र ,प्रेम जन-जन से रखना
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मृदुल = कोमल
ऐक्यता = एकता
भेद का भाव = भेदभाव ,बांटने वाली दृष्टि
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रचयिता : रवि प्रकाश, बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[09/06, 4:01 PM] Ravi Prakash: *रसगुल्ला (कुंडलिया)*
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रसगुल्ला रस से भरा , गोरा गोल – मटोल
बिकता दर्जन से सदा , होती कभी न तोल
होती कभी न तोल , मुलायम यह खाने में
भरता कब मन एक , अदद केवल पाने में
कहते रवि कविराय ,कहो सब खुल्लमखुल्ला
बंगाली मिष्ठान्न , हमारा प्रिय रसगुल्ला
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[10/06, 11:05 AM] Ravi Prakash: *दुकानों की पगड़ी (कुंडलिया)*
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पगड़ी महंगी हो गई , कैसे मिले दुकान
बड़ा किराए से हुआ ,पगड़ी का भुगतान
पगड़ी का भुगतान , रंक कैसे दे पैसे
मुश्किल में व्यापार , कष्ट हैं कैसे – कैसे
कहते रवि कविराय ,नई आफत यह तगड़ी
बेचें निजी मकान ,चुकाएँ तब फिर पगड़ी
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[10/06, 11:54 AM] Ravi Prakash: *धृति (कुंडलिया)*
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धृति से बढ़कर कुछ नहीं ,धृति जीवन का प्राण
मन की अविचलता यही ,दवा राम का बाण
दवा राम का बाण , धैर्य यह ही कहलाया
दृढ़ता धीरज धीर , हुई धृति ही की काया
कहते रवि कविराय ,जगत चलता संसृति से
मिलता है निर्वाण ,एक बस पावन धृति से
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*धृति =* मन की दृढ़ता ,चित्त की अविचलता,
धीरता ,धीरज,धैर्य
*संसृति =* बार-बार जन्म ,प्रवाह ,आवागमन
*निर्वाण =* मृत्यु ,मुक्ति ,मुक्त मन ,पुनर्जन्म से
मुक्ति ,मोक्ष ,कर्म बंधन से मुक्ति ,जीव के
सांसारिक अस्तित्व की समाप्ति
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*

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Ravi Prakash
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