Jun 10, 2021 · कुण्डलिया
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34 कुंडलियां अगस्त 2020

[1/8/2020, 10:34 AM] Ravi Prakash: *शाकाहारी भोजन (कुंडलिया)*
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खाओ सब्जी पूरियाँ , रोटी चावल दाल
इनको खाने से हुआ ,किसको कहो मलाल
किसको कहो मलाल ,अहिंसा व्रती कहाओ
बिना जानवर मार ,जिंदगी सुखी बिताओ
कहते रवि कविराय ,मांस भोजन ठुकराओ
शाकाहारी भोज ,रोज सब सज्जन खाओ
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[1/8/2020, 11:14 AM] Ravi Prakash: *मांस पशु का मत खाओ (कुंडलिया)*
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मारे जाते किसलिए , होता कत्लेआम
मूक जानवर कर रहे ,हम से प्रश्न तमाम
हम से प्रश्न तमाम ,मांस पशु का मत खाओ
रहो मनुज की भाँति ,नेह मन में उपजाओ
कहते रवि कविराय ,रहें हिल – मिलकर सारे
छोड़ स्वाद का लोभ ,आदमी पशु मत मारे
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
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[1/8/2020, 11:20 AM] Ravi Prakash: *धन जीवन-आधार (कुंडलिया)*
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धन से बनते हैं भवन ,धन से बने मकान
धन से चलती है सदा ,बढ़िया एक दुकान
बढ़िया एक दुकान ,इलेक्शन धन से जीते
धन का देते दान ,सेठ जी अमृत पीते
कहते रवि कविराय नहीं रिश्ते हैं मन से
धन जीवन-आधार ,जिंदगी चलती धन से
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
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[4/8/2020, 11:10 PM] Ravi Prakash: *असली दीपक जल रहे (कुंडलिया)*
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असली दीपक जल रहे ,असली बाती तेल
शुरू हुआ लो हिंद में ,स्वाभिमान का खेल
स्वाभिमान का खेल , हृदय में है दीवाली
गए पाँच सौ साल ,गुलामी बाबर वाली
कहते रवि कविराय,अस्मिता अब तक मसली
जागृत हिंदू भाव , राम मंदिर से असली
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*रचयिता : रवि प्रकाश , बाजार सर्राफा*
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[6/8/2020, 7:46 PM] Ravi Prakash: *सत्य राम का नाम (कुंडलिया)*
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जाती अर्थी ने कहा , सुन लो यह पैगाम
जग झूठा निस्सार है ,सत्य राम का नाम
सत्य राम का नाम , राम कष्टों में हँसते
जिनके मन निष्काम ,नहीं माया में फँसते
कहते रवि कविराय ,आयु नश्वर तन पाती
आत्मा तत्व विशेष ,राह पर मरण न जाती
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*रचयिता : रवि प्रकाश , बाजार सर्राफा*
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[11/8/2020, 8:15 AM] Ravi Prakash: *सुबह का भूला (कुंडलिया)*
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भूले थे जो सुबह के ,घर को आए शाम
नेताजी का हो गया ,ऐसे युद्ध – विराम
ऐसे युद्ध – विराम , रुकी सब मारामारी
नकली भर मुस्कान ,कहा प्रियतम आभारी
कहते रवि कविराय ,नहीं गुब्बारे फूले
भटके सौ – सौ राह ,हार घर आए भूले
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[12/8/2020, 8:35 AM] Ravi Prakash: *मास्क के अन्य लाभ (हास्य कुंडलिया)*
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आया मास्क कई – कई , लिए फायदे साथ
मुख को अब ढकना नहीं ,पड़ता रखकर हाथ
पड़ता रखकर हाथ , नहीं बदबू आ पाती
गुंडों की पहचान , फोटुओं में कब आती
कहते रवि कविराय ,लिपस्टिक खर्च बचाया
जिसने पहना मास्क ,लाभ में सौ-सौ आया
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[13/8/2020, 8:00 AM] Ravi Prakash: *भादो की शुभ अष्टमी (कुंडलिया)*
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भादो की शुभ अष्टमी ,कृष्ण – जन्म का शोर
बारिश बादल बिजलियाँ ,गर्जन चारों ओर
गर्जन चारों ओर , अँधेरा दिन में छाया
भरे तलैया ताल , नदी का जल उफनाया
कहते रवि कविराय ,लला को सिर पर लादो
पहुँचो नंद – निवास , बधाई देने भादो
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
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[13/8/2020, 8:23 AM] Ravi Prakash: *आजादी (कुंडलिया)*
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आजादी लगती भली ,सबकी जीवन-प्राण
इसकी रक्षा सब करें ,लगे नहीं विष – बाण
लगे नहीं विष- बाण ,आत्मनिर्भर कहलाएँ
खोएँ मत सम्मान ,विदेशी शरण न जाएँ
कहते रवि कविराय ,गुलामी जाती लादी
जो जन लापरवाह ,छिनी उनकी आजादी
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[13/8/2020, 9:34 AM] Ravi Prakash: *मीठा केवल नाम (कुंडलिया)*
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काटा हमको भिर्र ने , मारे डंक तमाम
लगने ऐसा लग गया ,जीवन की ज्यों शाम
जीवन की ज्यों शाम , तीर हो जैसे खाया
हुई अधमरी देह , दर्द भीषणतम पाया
कहते रवि कविराय ,शहदवाली से घाटा
मीठा केवल नाम ,काम डँकिआया काटा
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[13/8/2020, 5:40 PM] Ravi Prakash: *आती मौत बिना कहे (कुंडलिया)*
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आती मौत बिना कहे ,झटपट लेती जान
अब तक थीं शहनाइयाँ ,जाते अब शमशान
जाते अब शमशान ,राख मटकी भर पाई
श्रद्धाँजलि के बोल ,मनुज अच्छा था भाई
कहते रवि कविराय ,कथा इतनी रह जाती
फोटो पर है हार , याद केवल बस आती
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*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
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[14/8/2020, 11:33 AM] Ravi Prakash: *सैंतालिस में जो हुआ (कुंडलिया)*
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खंडित भारत हो गया ,मजहब का उन्माद
सैंतालिस में जो हुआ ,अब भी सबको याद
अब भी सबको याद ,पाशविकता थी छाई
अपनी थी जो भूमि ,टूट कर हुई पराई
कहते रवि कविराय ,प्रथकता हो अब दंडित
होगा अपना देश ,हिंद अब कभी न खंडित
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
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[14/8/2020, 6:14 PM] Ravi Prakash: *जाते खाली हाथ (कुंडलिया)*
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थोड़ा पाते हैं यहाँ , थोड़ा खोते लोग
किसको कितना मिल सका ,यह विधि का संयोग
यह विधि का संयोग , मिला जो ज्यादा जानो
प्रभु का पुण्य – प्रसाद , जो मिला उसको मानो
कहते रवि कविराय , रात-दिन जो भी जोड़ा
जाते खाली हाथ , साथ रहता कब थोड़ा
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*रचयिता : रवि प्रकाश , बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
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[18/8/2020, 11:25 AM] Ravi Prakash: *नेताजी की मृत्यु : एक रहस्य( कुंडलिया)*
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मारे नेता जी गए , इसमें थे संदेह
किसने देखा वीर का ,मरण मर चुकी देह
मरण मर चुकी देह ,अमरता जग ने मानी
हुए लापता बोस , अबूझी रही कहानी
कहते रवि कविराय ,तथ्य संशय के सारे
कैसे कह दे देश , गए नेता जी मारे
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*रचयिता :रवि प्रकाश , बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
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[18/8/2020, 1:05 PM] Ravi Prakash: *बैठो नहीं उदास (कुंडलिया)*
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हँसना हरदम चाहिए , बैठो नहीं उदास
हारो मत उत्साह को ,दिल में रखना आस
दिल में रखना आस ,राह मिलती मनचाही
चलती कलम विशेष ,सिर्फ जिसमें है स्याही
कहते रवि कविराय ,नहीं आँसू में फँसना
चाहे जो हो हाल , ठहाका लेकर हँसना
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर( उत्तर प्रदेश )*
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[18/8/2020, 6:00 PM] Ravi Prakash: *आलू (कुंडलिया)*
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आलू में हैं गुण बड़े ,सबके रहता साथ
स्वाद भरी जो सब्जियाँ ,सब में इसका हाथ
सब में इसका हाथ ,दही के आलू खाते
टिक्की आलू चाट ,तृप्ति भीतर से लाते
कहते रवि कविराय ,चिप्स हैं सबसे चालू
बिकें चार सौ भाव ,सिर्फ चालिस के आलू
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*रचयिता: रवि प्रकाश, बाजार सर्राफा*
*रामपुर ,(उ.प्र.)*
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[19/8/2020, 11:28 AM] Ravi Prakash: *सावन भादो (कुंडलिया)*
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सावन भादो का मजा ,कहाँ साल में और
बादल बूँदें बिजलियाँ ,करिएगा तो गौर
करिएगा तो गौर ,गगन का दृश्य सुहाना
आते बादल रोज ,उधम दिन-रात मचाना
कहते रवि कविराय ,रूप वर्षा मनभावन
मौसम गाता गीत ,कह रहा भादो सावन
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[20/8/2020, 2:06 PM] Ravi Prakash: *लापरवाह तमाम [कुंडलिया]*
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कोरोना में दिख रहे , लापरवाह तमाम
सड़कों पर मिल जाएँगे ,बिना मास्क के आम
बिना मास्क के आम ,कहाँ दो गज की दूरी
लगती इन्हें असह्य , मास्क वाली मजबूरी
कहते रवि कविराय ,जान से हाथ न धोना
रखिए सभी बचाव , हराएँ मिल कोरोना
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 999761 5451_
[20/8/2020, 2:56 PM] Ravi Prakash: *अपने बारे में भ्रम( कुंडलिया )*
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लगता है सबको यही ,हम काफी मशहूर
दुनिया हम को जानती ,हम हैं जग का नूर
हम हैं जग का नूर , अरे हम सूरज चंदा
तारों का सौंदर्य , हमारे सम्मुख मंदा
कहते रवि कविराय ,महा ठग है भ्रम ठगता
हाड़-मांस का जीव ,लौह का खुद को लगता
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर [उत्तर प्रदेश]*
_मोबाइल 999761 5451_
[21/8/2020, 1:36 PM] Ravi Prakash: *नेता बूढ़े जब हुए (कुंडलिया)*
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नेता बूढ़े जब हुए ,समझो हुए जवान
कुर्सी को कब छोड़ते ,कुर्सी इनकी जान
कुर्सी इनकी जान ,पैर यम ने हैं पकड़े
हिलती गर्दन रोज ,उच्च पद से पर अकड़े
कहते रवि कविराय ,बुढ़ापा अवसर देता
हुआ साठ के बाद ,उभरकर असली नेता
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[22/8/2020, 9:34 AM] Ravi Prakash: *गणेश वंदना (कुंडलिया)*
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करिएगा हम पर कृपा ,विघ्नविनाशक देव
दया चाहते आपकी ,दें अब बुद्धि – विवेक
दें अब बुद्धि – विवेक ,जीत कोरोना पाएँ
दो गज रखिए दूर ,मास्क सब लोग लगाएँ
कहते रवि कविराय ,रोग भीषण हरिएगा
सजग रहें सब भक्त ,मुक्त भय से करिएगा
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[22/8/2020, 7:41 PM] Ravi Prakash: *एक कवि-गोष्ठी यह भी (हास्य कुंडलिया)*
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रसगुल्ला रस का भरा ,यह है हास्य-प्रतीक
मठरी में है वीरता , ओजस्वी यह ठीक
ओजस्वी यह ठीक , सोन पपड़ी इतराती
बर्फी आती रोज , सामयिक गीत सुनाती
कहते रवि कविराय,समोसा खुल्लम-खुल्ला
गायक सदाबहार , मात देता रसगुल्ला
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[24/8/2020, 10:24 PM] Ravi Prakash: _
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*वोटर का अंदाज (कुंडलिया)*
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राजा – जैसा दिख रहा ,वोटर का अंदाज
निर्धन है तो क्या हुआ ,अदा मधुरतम आज
अदा मधुरतम आज ,राज मतदाता पाया
जिसे चाहिए वोट ,शीश नत करके आया
कहते रवि कविराय ,बजा नेता का बाजा
बोला माई – बाप ,आज के दिन तुम राजा
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*रचयिता : रवि प्रकाश, बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[25/8/2020, 11:00 AM] Ravi Prakash: __
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*दीपक (कुंडलिया)*
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जलता दीपक .कह रहा ,गति मुझमें अविराम
जब तक तिल-भर तेल है ,करता कब आराम
करता कब आराम , उजाला सदा लुटाता
मेरे भीतर प्राण , नहीं तम से घबराता
कहते रवि कविराय ,हाथ क्षण-भर में मलता
हुआ खत्म जब तेल ,कभी फिर बुझा न जलता
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[25/8/2020, 11:28 AM] Ravi Prakash: *ऑनलाइन बस उड़ते (कुंडलिया)*
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सजते कब पंडाल हैं ,जुड़ती अब कब भीड़
अपनी – अपनी टहनियाँ ,अपने – अपने नीड़
अपने – अपने नीड़ ,पाँच जन केवल जुड़ते
कविताएँ सत्संग , ऑनलाइन बस उड़ते
कहते रवि कविराय ,मास्क को सब जन भजते
बीमारी विकराल , लोग घर में ही सजते
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[25/8/2020, 2:57 PM] Ravi Prakash: *मोबाइल उपहार( बाल कुंडलिया )*
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कोरोना से फायदा ,सुन लो मेरे यार
हम बच्चों को मिल गया ,मोबाइल उपहार
मोबाइल उपहार ,ऑनलाइन अब पढ़ते
पढ़कर ढेर सवाल ,रोज उत्तर हम गढ़ते
कहते रवि कविराय ,मजा यह हमें न खोना
अच्छा तिरछा – लाभ ,दिया तुमने कोरोना
😷😷😷😷😷😷😷😷😷😷
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[27/8/2020, 11:53 AM] Ravi Prakash: *मात्रा का चक्कर (हास्य कुंडलिया)*
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मात्रा का चक्कर बड़ा ,करते तोड़ – मरोड़
*रक्खे* रख का हो गया ,आधा अक्षर जोड़
आधा अक्षर जोड़ , *नीबु* निचुड़ा बेचारा
जीता *इक* का शब्द , एक मात्रा से हारा
कहते रवि कविराय ,फँसे लिखना था छात्रा
हुई छात्र में तीन , हमारी पूरी मात्रा
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश )*
*मोबाइल 999761 5451*
[27/8/2020, 6:24 PM] Ravi Prakash: *साला – साली (हास्य कुंडलिया)*
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साला – साली मानिए ,सारे गुण की खान
इनकी आवभगत करें , दें इनको सम्मान
दें इनको सम्मान , प्रेम – संबंध बनाएँ
करें खूब तारीफ , चापलूसी अपनाएँ
कहते रवि कविराय ,मिलेगा सुख का प्याला
घरवाली के साथ , पूजिए साली – साला
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[28/8/2020, 9:31 AM] Ravi Prakash: *मास्क ( कुंडलिया )*
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आओ देखें मास्क को , कैसे पहने लोग
मुखमंडल उघड़ा हुआ ,सिर्फ कंठ से योग
सिर्फ कंठ से योग , नेकलस जैसे पहना
कुछ रखते इस भाँति ,जेब में जैसे गहना
कहते रवि कविराय ,नजर सब जन दौड़ाओ
चेतो अरे समाज , सजग राहों पर आओ
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*रचयिता : रवि प्रकाश, बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[28/8/2020, 9:17 PM] Ravi Prakash: मुदित ( कुंडलिया )
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होते मुदित महान जन ,गाते मंगल – गीत
जग में शत्रु न हो सका ,सब जन उनके मीत
सब जन उनके मीत ,प्रीति से जीवन जीते
सबसे रखते नेह , बाँटकर अमृत पीते
कहते रवि कविराय ,चैन की निद्रा सोते
जिनके मन निष्काम ,हर्षमय हर दिन होते
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[30/8/2020, 11:35 AM] Ravi Prakash: *ढका मास्क से राज ( हास्य कुंडलिया )*
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कानाफूसी रुक गई ,दो गज हैं सब दूर
हाथ मिलाने का नहीं ,जिंदा अब दस्तूर
जिंदा अब दस्तूर ,दाँत देखे कब पीसे
किसने देखा कौन ,निपोरे अपनी खींसे
कहते रवि कविराय ,अगर टॉफी है चूसी
ढका मास्क से राज ,कीजिए कानाफूसी
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[30/8/2020, 2:56 PM] Ravi Prakash: *क्षितिज (कुंडलिया)*
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करता है मन दौड़ के ,चलें क्षितिज के पार
देखें फिर जाकर वहाँ , कैसा है संसार
कैसा है संसार , देवता शायद पाएँ
अमृत की दो बूँद ,काश हमको मिल जाएँ
कहते रवि कविराय ,सुना तन वहाँ न मरता
रहता सदा जवान ,रोग की फिक्र न करता
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[30/8/2020, 6:10 PM] Ravi Prakash: *स्निग्ध (कुंडलिया)*
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जीते जो जीवन रहे ,होकर स्निग्ध महान
उनके ही मुख पर रही ,निर्मल मधु-मुस्कान
निर्मल मधु-मुस्कान ,सदा सबको सुख देते
उनके मन संतोष , न्यूनतम ही बस लेते
कहते रवि कविराय , चैन का अमृत पीते
जग को करते तृप्त ,तुष्ट होकर खुद जीते
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[31/8/2020, 9:34 AM] Ravi Prakash: *बचो जमघट जो खोला (कुंडलिया)*
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खोला पूरे देश में , संस्कृति धर्म समाज
अनुशासन अब खुद रखें ,संभव है क्या आज
संभव है क्या आज ,मास्क दो गज की दूरी
डर केवल चालान , इसलिए है मजबूरी
कहते रवि कविराय ,तुला पर खुद को तोला
नहीं चाहिए भीड़ ,बचो जमघट जो खोला
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
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