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3.सुन प्रीतम की बात….??

Radhey shyam Pritam

Radhey shyam Pritam

कुण्डलिया

October 3, 2017

सुन प्रीतम की बात..
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1..कुंडलिया
धुन हृदय जगे गर तो,सफर आसान बने।
हर कार्य रुचिकर लगता,रुचि से पहचान बने।।
रुचि से पहचान बने,बिन थके चले मुसाफिर।
सूर्य-चंद्र सम सफर,तय करले मंजिल डगर।
सुन प्रीतम की बात,मन से जीवन स्वप्न बुन।
बैखोफ आगे बढ,जगाकर रे मन में धुन।
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2..कुंडलिया
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सौंदर्य वस्तु मेंं नहीं,बुद्धि में ही होता।
फूल की कीमत नहीं,मान बू से होता।।
मान बू से होता,यथार्थ मान लो भैया।
सोच बदलो अपनी,तीर लग जाए नैया।
सुन प्रीतम की बात,कैसा रूप और शौर्य।
विवेक हो तेज गर,जीवन में हो सौंदर्य।
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3..कुंडलिया
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प्रीत-हँसी अधर धरले,हृदय में मिलन रीत।
फूल-खुशबू सम मिलिए,बनके तुम मंजीत।।
बनके तुम मंजीत,खुशियाँ बाँटते चलना।
काँटों बदले फूल,बनके सदा तुम खिलना।
सुन प्रीतम की बात,करनी-भरनी की रीत।
याद सदैव रखना,प्रीत बदले मिले प्रीत।
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4..कुंडलिया
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तब हृदय में लगी चोट,देखा चूरन नोट।
एटीएम की खूबी, या कर्मी का खोट।।
या कर्मी का खोट,हुई यार खटिया खडी।
बिन बुलाए भैया,मुसीबत है गले पडी।
सुन प्रीतम की बात,तरीका निकालिए अब।
ऊर्जित जी निवेदन,मिटेगा यह संकट तब।
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5..कुंडलिया
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हरपल जीभर जी यार,जीवन है सौगात।
वक्त लिए तीव्रता सुन,बढता ले बारात।।
बढता ले बारात,कीमत इसकी पहचान।
अनुशासन में रह,कर कर्म हृदय में ठान।
सुन प्रीतम की बात,मायूसी नहीं है हल।
सोच समझकर चलो,खुशी से बीते हरपल।
*******राधेयश्याम बंगालिया
प्रीतम कृत*************

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