आज -कल के बच्चे

शिष्टाचार मा पाथर पड़गा
अनुशासन मा गिर गय गाज ।
न बड़ेन के सम्मान बचा
न उनखे आगे आबय लाज।
नया जमाना चालू होइगा
दादा होइगें डैडी।
पुत्ता-पुत्ती बिसर गें सब
अब लड़का खेलय टैडी।
ताऊ-काका अंकल होइगें
ताई-काकी आंटी ।
मोबाइल मा सब खेलय गेम
हेराय गईं सब बंटी।
दीदी ,अम्मा मोम कहामय
कोजि कउन-कउन ऊं नाम धरामय।
भाई अब कहलामय ब्रो
बहन कहलामय सिस्टर ।
पहिले जउन पतिदेव रहें
होइगें अब ऊं मिस्टर ।।

AK

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